FATF की 'ग्रे लिस्ट' में ही चार महीने और रहेगा पाकिस्तान

  • 22 फरवरी 2020
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मनी लॉन्ड्रिंग और टेरर फंडिंग की रोक थाम के अंतरराष्ट्रीय संगठन फ़ाइनैंशियल एक्शन टास्क फ़ोर्स (एफ़एटीएफ़) ने पाकिस्तान को जून 2020 तक ग्रे लिस्ट में बरक़रार रखने का फ़ैसला किया है.

भारत और उसके समर्थकों की कोशिश थी कि पाकिस्तान को एफ़एटीएफ़ के ब्लैक लिस्ट में डाला जाए. पेरिस में होने वाली एफ़एटीएफ़ की बैठक में भारत का कहना था कि पाकिस्तान दहशतगर्दी की रोकथाम और उसकी आर्थिक मदद को रोकने में कोई गंभीर प्रयास नहीं कर सका.

पाकिस्तान की कोशिश थी कि उसे ग्रे लिस्ट से निकाल लिया जाए लेकिन पाकिस्तान की ये कोशिश फ़िलहाल कामयाब नहीं हो सकी.

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लेकिन चीन, तुर्की और मलेशिया समेत पाकिस्तान के समर्थक देशों का कहना था कि पाकिस्तान अपने सीमित संसाधनों में जितने क़दम उठा रहा है उनसे ये साफ़ है कि पाकिस्तान टेरर फ़ंडिंग की रोकथाम के लिए सख़्त कार्रवाई कर रहा है.

पाकिस्तान ने लशक-ए-तैय्यबा और जमात-उद-दावा के पूर्व प्रमुख हाफ़िज़ मोहम्मद सईद को हाल ही में सज़ा सुनाए जाने का उदाहरण दिया.

हाफ़िज़ सईद को लाहौर की एक अदालत ने दहशत गर्दी की आर्थिक मदद करने के जुर्म में दो अलग-अलग मामलों में साढ़े पाँच साल की सज़ा सुनाई है.

किसी देश को ग्रे लिस्ट में रखने या न रखने का फ़ैसला एफ़एटीएफ़ का ही एक संगठन 'इंटरनेशनल कोऑपरेशन रिव्यू ग्रुप' यानी 'आईसीआरजी' करता है.

पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट में से निकलने के लिए कुल 39 सदस्यों में से 12 के समर्थन की ज़रूरत थी लेकिन उसे ये समर्थन नहीं मिल सका.

एफ़एटीएफ़ के एशिया पैसिफ़िक ग्रुप ने पिछले साल नवंबर में बीजिंग में होने वाली बैठक में कहा था कि पाकिस्तान को टेरर फंडिंग की रोक थाम और काले धन को साफ़ करने के सिलसिले में जो 27 बिंदुओं वाले एक्शन प्लैन दिए गए थे उनमें से वो केवल 14 पर ही कोई कार्रवाई कर सका था.

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भारत की दलील

पेरिस में होने वाली इस बैठक में भारत का कहना था कि पाकिस्तान बाक़ी 13 बिंदुओं पर कार्रवाई करने से बचता रहा इसलिए उसे 'ब्लैक लिस्ट' किया जाए.

भारत की ये दलील भी थी कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की तरफ़ से दहशतगर्द क़रार दिए गए कथित मास्टरमाइंड मसूद अज़हर के ख़िलाफ़ भी पाकिस्तान ने कोई कार्रवाई नहीं की.

एफ़एटीएफ़ ने पाकिस्तान पर ज़ोर दिया है कि वो तमाम चरमपंथी संगठनों के प्रमुखों के ख़िलाफ़ भरपूर कार्रवाई करे और ख़ास तौर पर उन्हें सज़ा सुनाए जाने की दर बेहतर हो.

पाकिस्तान के आर्थिक मामलों के मंत्री हम्मद अज़हर के नेतृत्व में एफ़एटीएफ़ में पाकिस्तान की नुमाइंदगी करने वाले प्रतिनिधिमंडल मंडल का दावा है कि पाकिस्तान के उठाए गए क़दमों के कारण उसे जल्द ही ग्रे लिस्ट से निकाल लिया जाएगा और फ़िलहाल ब्लैक लिस्ट से बचने को वो अपनी सफलता समझ रहा है.

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