डोनल्ड ट्रंप भारत आकर क्या हासिल करना चाहते हैं

  • 23 फरवरी 2020
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अमरीकी राष्ट्रपति ट्रंप की पहली भारत यात्रा सोमवार से शुरू हो रही है. भारत आने वाले वे सातवें अमरीकी राष्ट्रपति होंगे.

राष्ट्रपति ट्रंप की दो दिनों की भारत यात्रा इस तरह से रखी गई है कि इससे उनके गुरूर को कुछ हद तक सुकून मिले.

लेकिन इससे भी ज़्यादा अहम ये है कि ये दौरा साल 2020 के चुनाव में राष्ट्रपति ट्रंप के व्हॉइट हाउस में लौटने की संभावनाओं को मजबूत बनाने के लिए रखा गया है.

ट्रंप भारत के तीन शहरों का दौरा करेंगे. दिल्ली, आगरा में वे ताजमहल देखेंगे और अहमदाबाद में 'नमस्ते ट्रंप' रैली में एक लाख से ज़्यादा लोगों की भीड़ को संबोधित करेंगे.

ये कहना जरा सा भी ग़लत नहीं होगा कि 'नमस्ते ट्रंप' रैली पिछले साल ह्यूस्टन में आयोजित 'हाउडी मोदी' का कूटनीतिक जवाब है.

ह्यूस्टन की रैली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने अमरीका में रह रहे 50 हज़ार भारतीयों को संबोधित किया था.

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Image caption ह्यूस्टन की रैली में ट्रंप और मोदी ने तकरीबन 50 हज़ार लोगों को संबोधित किया था

ताक़तवर भारतीय मूल के मतदाता

लेकिन ये दौरे केवल नाटकीय माहौल और फ़िज़ा बनाने के इरादे से नहीं किए जाते हैं.

इसका मक़सद ये भी है कि इससे अमरीकी हुक्मरानों को हिंदुस्तान के प्रति अपना रुख बदलने के लिए मजबूर किया जाए.

भारत के वजूद को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता है. इस दौरे की अहमियत राष्ट्रपति ट्रंप को ये समझाने के लिए लिहाज से भी अहम है.

साथ ही निशाने पर अमरीका में मौजूद 24 लाख ताक़तवर भारतीय मूल के मतदाता भी हैं.

और एक वजह ये भी है कि राष्ट्रपति ट्रंप के गुरूर को ये पसंद आएगा, ताक़तवर, मजबूत रिश्ते.

भारत और अमरीका के बीच जारी व्यापार गतिरोध को लेकर कोई कामचलाऊ समझौता इस यात्रा के दौरान हो जाए, इसकी संभावना कम ही है.

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भारत-अमरीका व्यापार समझौता

सेब, अखरोट और मेडिकल उपकरणों की क़ीमतों को लेकर दोनों देशों के बीच मतभेद हैं.

भारत के डेयरी, पॉल्ट्री और ईकॉमर्स बाज़ार में अमरीका बेरोकटोक पहुंच की मांग कर रहा है.

साथ ही अमरीका में बने हार्ले डेविडसन मोटरसाइकिलों पर आयात शुल्क में कमी करने मुद्दा आज भी अनसुलझा है.

और अमरीका की तरफ़ से व्यापार वार्ता कर रहे रॉबर्ट लाइज़र राष्ट्रपति ट्रंप के साथ भारत दौरे पर आएंगे या नहीं, इसे लेकर कयासों का दौर जारी है.

इन अफ़वाहों से ये संकेत मिलते हैं कि भारत-अमरीका व्यापार समझौता थोड़े समय के लिए ही सही ठंडे बस्ते में चला गया है.

ट्रंप के अपने शब्दों में कहें तो 'डीलमेकर' के लिए इस बार कोई 'डील' नहीं है. यानी सौदे पटाने में माहिर आदमी सौदा नहीं कर पाया.

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Image caption अमहदाबाद के मोटेरा स्टेडियम में राष्ट्रपति ट्रंप एक लाख से ज़्यादा लोगों को संबोधित करेंगे

व्यापार घाटे का सवाल

साल 2008 में भारत और अमरीका के बीच 66 अरब डॉलर का कारोबार होता था तो 2018 में बढ़कर 142 अरब डॉलर हो गया.

जब भारत का सकल घरेलू उत्पाद सालाना 7 से 8 फीसदी की दर से बढ़ रहा था तो उस दौरान हुई रणनीतिक साझादारी से दोनों देशों एक दूसरे के साथ ये व्यापार भी बढ़ा.

लेकिन अब तस्वीर बदल गई है, भारत के विकास के आंकड़ों में तेज़ी से गिरावट दर्ज़ की गई है. साल 2019-20 के लिए विकास दर 5% रहने का अनुमान लगाया गया है.

इसके अलावा भारत में संरक्षणवादी आर्थिक नीतियों का चलन बढ़ रहा है. इसलिए ट्रंप भारत और अमरीका के बीच के व्यापार घाटे को दुरुस्त करना चाहते हैं जो फिलहाल भारत के पक्ष में है.

इन वजहों से दोनों देशों के रिश्तों में सुधार की गुंजाइश कम हो गई है.

इन हालात में ये प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जिम्मेदारी होगी कि वो राष्ट्रपति ट्रंप को व्यापार समझौते को दुरुस्त करने की जिद छोड़ने और भारत-अमरीका संबंधों के रणनीतिक संभावनाओं पर ध्यान देने के लिए मना लें.

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Image caption राजस्थान में भारत और अमरीका के सैनिक एक साझा युद्धाभ्यास में

रक्षा सौदे

आख़िरकार भारत दुनिया का सबसे बड़ा खुला डेटा बाज़ार है. प्रति व्यक्ति इंटरनेट डेटा खपत करने के लिए लिहाज भारत दुनिया का सबसे बड़ा देश है.

अमरीका की बड़ी टेक्नॉलॉजी कंपनियों के लिए भारत इतना बड़ा बाज़ार मुहैया कराता है जितना किसी और देश में उनके लिए उपलब्ध नहीं है.

तमाम आर्थिक चिंताओं के बावजूद अमरीकी उत्पादों और व्यापार के लिए भारत सबसे तेज़ी से बढ़ता हुआ और तुलनात्मक रूप से खुला हुआ उपभोक्ता बाज़ार बना हुआ है.

हथियारों की खरीद के मामले में भी भारत एक बड़ा ग्राहक है. रक्षा सौदों को भारत अमरीका संबंधों के एक अहम पहलू के तौ पर देखा जाता है.

साल 2008 में भारत और अमरीका के बीच रक्षा सौदे तकरीबन न के बराबर थे जबकि साल 2019 में ये बढ़कर 15 अरब डॉलर का हो गया.

ट्रंप की इस भारत यात्रा के दौरान माना जा रहा है कि कुछ चुनिंदा रक्षा सौदों पर सहमति बन सकती है. इसमें अमरीकी कंपनी लॉकहीड मार्टिन के हेलिकॉप्ट भी शामिल हैं.

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दुनिया के हालात पर...

एक तरफ़ जब दोनों देशों के अधिकारी रक्षा सौदों और उससे जुड़े समझौतों की बारीकी पर गौर कर रहे होंगे तो दूसरी तरफ़ अहमदाबाद के मोटेरा स्टेडियम में ट्रंप को चकाचौंध कर देने के लिए स्वागत तैयारियां अपने चरम पर हैं. ट्रंप को तड़क-भड़क और आडंबर पसंद भी आता है.

हम ऐसे दौर में जी रहे हैं जब दुनिया की राजनीति बदल रही है. दूसरे विश्व युद्ध के बाद बने सियासी क़ायदे-क़ानूनों को चुनौती दी जा रही है. अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं से अमरीका आहिस्ता-आहिस्ता कदम वापस खींच रहा है. जलवायु परिवर्तन समझौता जिसके लिए मुश्किल लड़ाई लड़ी गई थी, अमरीका ने इससे पल्ला झाड़ लिया है.

चीन की महत्वाकांक्षी 'वन बेल्ट, वन रोड परियोजना, रूस, ब्रेग्ज़िट, 5G जैसी नई टेक्नॉलॉजी को लेकर यूरोपीय देशों में मतभेद, ये वो मुद्दे हैं जिनपर दुनिया के दो सबसे बड़े लोकतंत्रों को ध्यान देने की ज़रूरत है.

अहमदाबाद के रंगारंग कार्यक्रम और ताजमहल की सैर के बीच ये उम्मीद की जा सकती है कि मोदी और ट्रंप दुनिया के हालात और भारत-अमरीका संबंध की संभावनाओं पर बात करने के लिए वक़्त निकाल सकें.

(रूद्र चौधरी थिंक टैंक कारनेगी इंडिया के निदेशक हैं. उन्होंने फोर्ज्ड इन क्राइसिसः इंडिया एंड द यूनाइटेड स्टेट्स सिंस 1947 नाम से किताब भी लिखी है.)

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