डोनाल्ड ट्रंप की पहली भारत यात्रा पर क्या कह रहा है अमरीकी मीडिया

अपने भारत दौरे के पहले दिन ट्रंप पत्नी के साथ साबरमती आश्रम गए

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अपने भारत दौरे के पहले दिन ट्रंप पत्नी के साथ साबरमती आश्रम गए

अमरीकी अख़बार 'वॉशिंगटन पोस्ट' ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को अहमदाबाद के साबरमती आश्रम में परोसे गए ब्रोकली समोसे को प्रमुखता दी है.

अख़बार लिखता है, "ट्रंप की भारत यात्रा के लिए बनाया गया ब्रोकली समोसा किसी को पसंद नहीं आया और ट्रंप ने भी हाथ नहीं लगाया."

दरअसल, साबरमती आश्रम में ट्रंप के लिए ख़ासतौर पर एक समोसा बनाया गया था, जिसमें आलू मटर की जगह ब्रोकली और कॉर्न का मिश्रण इस्तेमाल किया गया था.

लेकिन ट्रंप समेत अमरीका से आए किसी भी मेहमान ने इस समोसे को हाथ नहीं लगाया.

'ट्रंप के सीएए विरोध पर बात करने के आसार कम'

अमरीकी न्यूज़ संस्थान 'न्यूज़वीक' ने अपने लेख में मैसाचुसेट्स के अधिकारियों की चिंताओं को प्रमुखता से छापा है.

'न्यूज़वीक' के साथ बात करते हुए मैसाचुसेट्स के कैंब्रिज़ शहर के सिटी काउंसलर जीवन सोबरिन्हो व्हीलर ने कहा है, "अगर वो (ट्रंप) इस मुद्दे पर बात करते हैं, तो इससे सीधा संदेश जाएगा और अमरीका के लिए यही प्राथमिकता है."

वहीं, कैंब्रिज़ शहर के मेयर संबल सिद्धीकी ने कहा है, "चूंकि कई सीनेटर और कॉन्ग्रेस विमन इस मुद्दे को ट्रंप प्रशासन के सामने रख चुके हैं. ऐसे में मुझे लगता है कि इस मुद्दे पर बात राष्ट्रपति के लिए ज़रूरी है."

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ट्रंप के इस दौरे की दुनियाभर में तमाम तरह की व्याख्याएं की गई हैं.

'व्यापारिक समझौतों पर केंद्रित हो ट्रंप का भारत दौरा'

वॉशिंगटन एग्ज़ामिनर वेबसाइट ने लिखा है कि दुनिया की सबसे बड़ी जनसंख्या वाले लोकतंत्र के साथ सकारात्मक इंगेजमेंट का स्वागत किया जाना चाहिए. लेकिन अगर ट्रंप भारत को एक ऐसे देश के रूप में देखते हैं, जो कि वॉशिंगटन की इच्छा के अनुरूप कार्य करेगा, तो ये बुद्धिमत्ता की बात नहीं होगी.

इसके साथ ही मोदी की अधिनायकवादी आंतरिक नीतियों और विवादित क्षेत्र कश्मीर पर उनकी सरकार की नीति को देखते हुए अमरीका की नीति भारत को हथियार बेचने की जगह उत्पादक व्यापारिक कूटनीति की होनी चाहिए.

'ट्रंप की आत्ममुग्धता को सहलाना सीख लिया है'

अमरीकी मीडिया प्रतिष्ठान MSNBC ने अपनी रिपोर्ट लिखा है कि अमरीका के मौजूदा राष्ट्रपति अपने दिखावे और उत्सव में यक़ीन रखते हैं और विदेशी अधिकारियों ने उनकी इस आत्ममुग्धता को सहलाना सीख लिया है.

MSNBC ने लिखा कि कुछ राष्ट्रपति स्थानीय छात्रों से संवाद करते हैं या विदेशी पत्रकारों के साथ इंटरव्यू करके जवाब देते हैं. लेकिन डोनाल्ड ट्रंप के लिए ये सामान्य चीज़ें कारगर नहीं हैं, क्योंकि रिपब्लिकन पार्टी से ताल्लुक रखने वाले ट्रंप को नीति, संस्कृति और इतिहास में कोई दिलचस्पी नहीं है.

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कई मीडिया संस्थानों ने इस इवेंट को ट्रंप का भीड़ से प्रेम बताया है.

'अहमदाबाद में इंसानियत को ढक दिया गया'

न्यूयॉर्क से संचालित होने वाले मीडिया संस्थान क्वार्ट्ज़ ने अपनी रिपोर्ट में अहमदाबाद में झुग्गियों के सामने बनाई गई दीवार को तरजीह दी है.

रिपोर्ट में लिखा है, "ट्रंप-मोदी के रोड शो के रास्ते में पड़ने वाली एक झुग्गी को छिपाने के लिए करीब 400 मीटर की दूरी तक चार फुट ऊंची दीवार बनाई गई है." क्वॉर्ट्ज़ ने इसे इंसानियत को ढका जाना क़रार दिया है.

रिपोर्ट में दर्ज है, "दीवार के पीछे सरणियावास में करीब 700 कच्चे घर हैं. यहां साफ-सफाई, शौचालय, पानी की पाइपलाइन और सीवर सिस्टम का अभाव है."

झुग्गी में रहने वाली एक महिला के हवाले से रिपोर्ट में लिखा है, "ये बस अंग्रेज़ों की गुलामी है."

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मोटेरा स्टेडियम में 'नमस्ते ट्रंप' इवेंट में मोदी और ट्रंप

'ट्रंप जो करना चाहते हैं, मोदी पहले ही कर चुके हैं'

अमरीकी मैगज़ीन 'दि अटलांटिक' ने 'नमस्ते ट्रंप' कार्यक्रम को 'हाउडी मोदी' का सीक्वल बताया है.

इसकी रिपोर्ट में लिखा है, "ट्रंप ने हिंदी के कुछ शब्द बोलने की कोशिश की. वह जिस शहर में गए थे, उसका नाम लेने में लड़खड़ाए भी, लेकिन वह जिस भीड़ के लिए भारत गए थे, वह उन्हें मिल गई."

मैगज़ीन ने मोदी-ट्रंप की दोस्ती को लेकर लिखा है, "ट्रंप मुस्लिमों को बैन करना चाहते हैं, मोदी यह पहले ही कर चुके हैं. ट्रंप मीडिया को फेक न्यूज़ कहते हैं, मोदी सरकार ने आइना दिखाने वाले मीडिया में दरार डाल दी है."

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