डोनाल्ड ट्रंप के बयान पर पाकिस्तान क्या बोला?

  • 25 फरवरी 2020
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पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी ने मंगलवार को कहा कि अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत दौरे के दौरान पाकिस्तान को लेकर जो कहा है उसकी अहमियत से इनकार नहीं किया जा सकता.

ट्रंप ने सोमवार को भारत के दौरे पर अहमदाबाद में कहा था कि पाकिस्तान से भी अमरीका के अच्छे रिश्ते हैं. पाकिस्तानी विदेश मंत्री ने कहा कि अमरीकी राष्ट्रपति का यह कहना मायने रखता है.

ट्रंप ने कहा था कि अमरीका का पाकिस्तान से भी अच्छा संबंध है. उन्होंने कहा था, ''हम उम्मीद रखते हैं कि पाकिस्तान की मदद से दक्षिण एशिया में शांति और स्थिरता आएगी.'' ट्रंप के इस बयान पर पाकिस्तानी विदेश मंत्री ने कहा कि अमरीकी राष्ट्रपति का यह बयान असाधारण है.

महमूद क़ुरैशी ने कहा, ''ट्रंप चाहते हैं कि इलाक़े में शांति और स्थिरता हो और इसमें भारत सकारात्मक भूमिका निभाए. यह तभी संभव होगा जब कश्मीर समस्या का समाधान होगा. भारत की वर्तमान सरकार ने कश्मीर समस्या को और उलझा दिया है. भारत ने पाँच अगस्त को जो फ़ैसला किया उससे कश्मीर की पहचान प्रभावित हुई है. कश्मीर में पिछले 206 दिनों से लोगों को क़ैद करके रखा गया है. ऐसे में हालात कैसे सुधरेंगे?''

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क़ुरैशी ने कहा कि भारत ने नया नागरिकता क़ानून बनाकर अपना इरादा ज़ाहिर कर दिया है. उन्होंने कहा कि भारत इतना कुछ कर रहा है ऐसे में शांति और स्थिरता की उम्मीद कैसे की जा सकती है. क़ुरैशी ने कहा कि इससे पूरी दुनिया प्रभावित होगी.

पाकिस्तानी विदेश मंत्री ने कहा कि भारत अपने व्यवहार और नीतियों की समीक्षा करे. उन्होंने कहा, ''ट्रंप ने साफ़ कर दिया है कि आतंकवाद के ख़िलाफ़ लड़ाई में पाकिस्तान अमरीका का पार्टनर है. अफ़ग़ानिस्तान की शांति प्रक्रिया में भी पाकिस्तान की अहम भूमिका है. पूरे इलाक़े में पाकिस्तान का अहम रोल है.

महमूद क़ुरैशी ने कहा सीएए के ख़िलाफ़ दिल्ली में जारी विरोध-प्रदर्शन और हिंसा को राष्ट्रपति ट्रंप ने भी देखा होगा.

ट्रंप के भारत दौरे की पाकिस्तानी मीडिया में ख़ूब चर्चा है. पाकिस्तान के प्रमुख अख़बार डॉन ने ट्रंप के दौरे पर संपादकीय टिप्पणी लिखी है.

डॉन ने संपादकीय में लिखा है, ''प्रधानमंत्री मोदी और अमरीकी राष्ट्रपति ट्रंप में कई तरह की समानताएं हैं. दोनों नेताओं ने सत्ता के शीर्ष तक पहुंचने के लिए दक्षिणपंथी लोकप्रियतावाद का सहारा लिया. दोनों नेताओं ने अल्पसंख्यकों की क़ीमत पर बहुसंख्यकवाद को बढ़ावा दिया. आज दोनों नेताओं में भले ही इतनी दोस्ती दिखाई जा रही है लेकिन ये वही मोदी हैं जिन्हें अमरीका ने 2005 से प्रधानमंत्री बनने तक अपने यहां एंट्री पर पाबंदी लगा रखी थी. अमरीका ने 2002 में गुजरात दंगे को लेकर मोदी पर पाबंदी लगाई थी. ट्रंप ने उसी मोदी को भारत का सबसे कामयाब नेता कहा है.''

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डॉन ने लिखा है कि ट्रंप ने भले ही कहा कि पाकिस्तान के साथ अमरीका के बहुत अच्छे रिश्ते हैं लेकिन उन्हें अब कश्मीर पर भी बात करनी चाहिए.

जीओ टीवी ने अपनी वेबसाइट पर ट्रंप के दौरे को लेकर एक विश्लेषण छापा है. जावेद एम गोराया के विश्लेषण में लिखा गया है, ''ट्रंप ने भारतीय लोकतंत्र की तारीफ़ की लेकिन कश्मीर के बारे में एक शब्द भी नहीं बोला. 80 लाख लोग पिछले साल के पाँच अगस्त से क़ैद हैं लेकिन वहां के लोकतंत्र की तारीफ़ कर रहे हैं. यहां तक कि ट्रंप ने भारत के उस नैरेटिव को भी दोहराया कि पाकिस्तानी सीमा से आतंकवाद का संचालन होता है. यह वैसा ही है जैसे भारत पाकिस्तान को एफ़एटीएफ़ में बैन कराने के लिए तर्क देता है. ट्रंप ने यहां तक कह दिया कि अमरीका पाकिस्तान के साथ सीमा पर आतंकवाद से लड़ने के लिए साथ मिलकर काम कर रहा है.''

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