पाकिस्तान में एक बांग्लादेशी मुसलमान होने का मतलब: ब्लॉग

  • मोहम्मद हनीफ
  • बीबीसी हिंदी के लिए
कराची के कई इलाकों में बड़ी संख्या में बंगाली रहते हैं
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कराची के कई इलाकों में बड़ी संख्या में बंगाली रहते हैं

फ़र्ज़ करें आप कराची में रहने वाली चौथी नस्ल के बंगाली हैं.

ज़्यादा संभावना है कि आप ग़रीब हैं लेकिन हर ग़रीब की तरह आपको भी अपने बच्चों को पढ़ाने का बहुत शौक़ है.

फ़र्ज़ करें कि आप कुछ ख़ुश क़िस्मत भी हैं क्योंकि न सिर्फ़ आपकी बच्ची को पढ़ने का बहुत शौक़ है बल्कि उसे 'सिटिज़न फाउंडेशन' नाम की संस्था के स्कूल में फ्री शिक्षा भी मिल रही है.

बच्ची हर क्लास में टॉप करके आगे बढ़ती जा रही है. डॉक्टर, पायलट या मार्क ज़ुकरबर्ग बनने के सपने देखती है.

आप भी उसे सपने देखने से नहीं रोक सकते और बच्ची ये सपने देखते-देखते नवीं क्लास में पहुँच जाती है और वहां उसे बताया जाता है कि वो दसवीं क्लास का बोर्ड का इम्तिहान नहीं दे सकती क्योंकि आप के पास पहचान पत्र नहीं है.

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बंगाली बच्चे अपने क्षेत्र के अस्थाई स्कूलों में पढ़ने जाते हैं

नागरिकता क़ानून

आपके माँ-बाप भी यहीं पैदा हुए थे. उनके माँ-बाप भी यहीं पले बढ़े थे.

आपके पिता के पास पहचान पत्र भी था आपके पास भी अपना बर्थ सर्टिफ़िकेट, बच्ची का बर्थ सर्टिफ़िकेट मौजूद है.

लेकिन कंप्यूट्राइज़्ड पहचान पत्र आए तो सरकार ने अपने ही बनाए हुए नागरिकता क़ानून का उल्लंघन करते हुए आपको सरकारी रिकॉर्ड से ग़ायब कर दिया.

आपकी बच्ची के सपने नौवीं क्लास के साथ दम तोड़ जाएंगे वो कभी दसवीं क्लास का इम्तेहान नहीं दे सकेगी.

एक बंगाली नौजवान का सपना

फ़र्ज़ करें आप एक बंगाली नौजवान हैं. आपको कुछ करना नहीं आता, बस गाड़ी चलानी सीख ली थी. कराची ज़ालिम शहर है मगर इतना ज़ालिम भी नहीं.

सरकारी ट्रांसपोर्ट नहीं है तो प्राइवेट बसों पर चलता है. देश के दूसरे क्षेत्रों से बुरा ड्राइवर भी आता है तो 20 हज़ार की नौकरी पकड़ लेता है.

आप का जन्म तो यहीं हुआ है, शहर के रास्ते भी जानते हैं लेकिन ड्राइवर की नौकरी के लिए ड्राइविंग लाइसेंस चाहिए और उसके लिये क्या चाहिए? जी हां पहचान पत्र.

आपके पिता के पास था, आपके पास नहीं है. कराची में ड्राइवर बनने का सपना देखना बंद कर दें.

मेहनतकश महिलाओं की मुश्किल

फ़र्ज़ करें आप चार बच्चों की माँ हैं और उनके सिर पर छत रखने के लिए, उनका पेट पालने के लिए किसी सेठ के घर में झाड़ू लगाती हैं.

सेठ मेहरबान है, एक वक़्त का खाना देता है, सिर्फ़ 10 घंटे काम लेता है और इतवार की छुट्टी भी देता है लेकिन तनख्वाह कम देता है.

आपने मोहल्ले वालों से सुना है कि सरकार ने बेनज़ीर के नाम पर एक प्रोग्राम रखा है जिसमें आप जैसी मेहनतकश महिलाओं को हर महीने कुछ हज़ार रुपये मिलते हैं.

आपको पता है कि ये अफ़वाह नहीं है. आपकी जानने वालियों को, सहेलियों को ये पैसे हर महीने मिलते हैं.

वो कुछ हज़ार रुपये जिनसे बच्चों के जूते ख़रीदे जा सकते हैं, महीने में एक बार चिकन खाया जा सकता है.

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चरमपंथ के उभार के साथ, सब कुछ बदल गया है. नकली पाकिस्तानी राष्ट्रीय पहचान पत्र प्राप्त करना अब लगभग असंभव है

पहचान पत्र नहीं है...

वो कुछ हज़ार रुपये आपको नहीं मिल सकते क्योंकि आप बंगाली हैं, आपके पास पहचान पत्र नहीं है. आपके पिता के पास था.

आपको अंदाज़ा है कि इस देश के साथ एक घटना घटी थी, आपके जन्म से पहले बंगालियों ने लड़कर अपना देश बना लिया था, बांग्लादेश.

लेकिन जब वो देश बना तो आपका पिता पाकिस्तानी था और यहां कराची में केकड़े पकड़ता था.

फ़र्ज़ करें आप बंगाली हैं और कराची में रहते हैं और कोई आपसे पूछे कि कराची में कितने बंगाली रहते हैं तो आपके पास कोई जवाब नहीं है. 20 लाख या 30 लाख.

आबादी की गिनती करने वाले भी आपको भूल चुके हैं.

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इमरान ख़ान से उम्मीद

उनको ये भी याद नहीं कि आप वो बांग्लादेशी नहीं हैं जो 1980 के दशक में पूरा भारत पैदल चल कर रोज़ी रोटी की तलाश में कराची पहुंचे थे.

अब वो बांग्लादेश इतना विकास कर चुका है कि हमारा सेठ रहता तो कराची में है लेकिन फ़ैक्ट्री ढाका के मज़ाफ़ात में टेक्स फ्री ज़ोन में लगाता है.

फ़र्ज़ करें आप कराची मे रहने वाले बंगाली हैं तो आपने ज़िन्दगी में सिर्फ़ एक बार सपना देखा था जब इमरान ख़ान कराची आए थे जलसे में खड़े हो कर कहा था कि आप लोगों को नागरिकता मिलेगी.

वैसे तो पूरे पकिस्तान को इमरान ख़ान से इश्क़ है लेकिन उस भाषण के बाद जितना इश्क़ बंगालियों को इमरान ख़ान से हुआ, जितनी दुआएं उसके लिए बंगालियों के दिलों से निकलीं, वो इमरान ख़ान को पहले कभी न मिली होंगी.

अभी भी कराची के बंगाली इमरान ख़ान से उम्मीद लगा कर बैठे हैं.

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कराची में एक बंगाली चायवाले की दुकान

कराची के बंगाली

साथ-साथ ख़ौफ़ भी है कि उनके मंत्री और सलाहकार वो पुरानी सलाह न देदें कि ये कराची के बंगाली क्या कर लेंगे, आगे समुंदर है.

काश इमरान ख़ान एक बार मच्छर कॉलोनी आएं और देखें कि आगे समुंदर है, वाली बात कितनी अर्थहीन है.

हम तो पहले ही समुंदर पर कचरा डाल कर उस पर घर बना कर बैठे हैं. फ़र्ज़ करें आप बंगाली हैं.

आपकी नवीं क्लास तक टॉप करने वाली बेटी, डॉक्टर, पायलट, मार्क ज़ुकरबर्ग बनने का सपना देखने वाली बेटी अब घर में बैठी है और उसकी शादी होनी है.

बेटी होशियार है, दसवीं क्लास में टॉप ना करने का ग़म पता नहीं भूल सकी है या नहीं लेकिन उसका ज़िक्र नहीं करती.

मोहल्ले के मदरसे में या स्कूल जा कर बच्चों को पढ़ा भी आती है.

अब उसका रिश्ता देखने आएंगे तो बेटी चाय भी पेश करेगी और औपचारिकता के बाद रिश्ता लाने वाले पूछेंगे, बेटी का पहचान पत्र है?

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