कोरोना वायरस कैसे आपका धंधा-पानी मंदा कर रहा है?

जेम्स बॉन्ड की नई फ़िल्म 'नो टाइम टू डाई' की रिलीज़ नवबंर तक के लिए रोक दी गई है

इमेज स्रोत, Universal

इमेज कैप्शन,

जेम्स बॉन्ड की नई फ़िल्म 'नो टाइम टू डाई' की रिलीज़ नवबंर तक के लिए रोक दी गई है

  • यात्रा और मनोरंजन से जुड़ी गतिविधियों पर कोरोना वायरस का सबसे बुरा असर पड़ रहा है लेकिन इसके व्यापक आर्थिक प्रभाव क्या होंगे?
  • कारोबारियों की पैसे से जुड़ी परेशानी दूर कर के, सब्सिडी और टैक्स देने की समय सीमा बढ़ाकर सरकार और बैंक मदद कर सकते हैं.
  • हम जिस तरीके से काम करते हैं, नई टेक्नॉलॉजी और काम करने वाले लाखों लोगों की ज़िंदगी में जोख़िम कम करने के लिए सरकारें क्या कर सकती है, इसे लेकर आने वाले समय में तस्वीर बदल सकती है.

अगर 007 जेम्स बॉन्ड भी कुछ महीनों की मोहलत ले रहे हैं तो उन लोगों के लिए क्या उम्मीद बची है जो कोरोना वायरस से होने वाले कारोबारी नुक़सान का जोख़िम उठा रहे हैं?

जेम्स बॉन्ड की नई फ़िल्म 'नो टाइम टु डाई' की रिलीज़ नवबंर तक के लिए रोक दी गई है. उम्मीद है कि उस वक़्त फ़िल्म बेहतर मुनाफ़ा देगी और वितरक तब तक इंतज़ार कर सकते हैं.

लेकिन हर किसी के साथ ऐसे हालात नहीं हैं. उनके लिए सामने मुश्किल वक़्त है. गुरुवार को विमानन कंपनी फ़्लाईबी एयरलाइंस बंद हो गई. कोरोना का शिकार होने वाली शायद ये पहली कंपनी है.

पर इसकी वजहें भी हैं. फ़्लाईबी की आर्थिक सेहत पहले से ही ख़राब चल रही थी और विमानन क्षेत्र पहले से ही मुश्किल दौर से गुजर रहा है.

इमेज स्रोत, AFP

इमेज कैप्शन,

विमानन कंपनी फ़्लाईबी एयरलाइंस बंद हो गई

एयरलाइंस सेक्टर

फ़्लाईबी के बाद बड़ी ख़बर लुफ़्तांसा की तरफ़ से आई. लुफ़्तांसा ने कहा कि वो आने वाले हफ़्तों में वो अपनी कुल उड़ानों को आधा करने की योजना बना रही है.

जर्मनी की ये कंपनी इस समय अपने निवेशकों को इसके वित्तीय परिणामों के बारे में बताने की स्थिति में नहीं है. शुक्रवार को जब शेयर बाज़ार ढहे तो लंबी दूरी की उड़ान सेवाएं देने वाली एयरलाइन नॉर्वेजियन की शेयर कीमतें 21 फीसदी तक गिर गई.

एयरलाइन कंपनियों के लिए इस समय एक ही अच्छी ख़बर है. वो ये है कि तेल की क़ीमतें भी गिर रही हैं. चूंकि तेल उत्पादक देशों के बीच उत्पादन में कटौती पर सहमति नहीं बन पाई, इस वजह से एक दिन में तेल की क़ीमतें 10 फ़ीसदी तक गिरी हैं लेकिन विमामन उद्योग यात्रा और मनोरंजन क्षेत्र से जुड़ा हुआ है और ये दोनों ही क्षेत्र ख़ास तौर पर कोरोना वायरस की वजह से मांग में कमी के संकट का सामना कर रहे हैं. कोराबार की दुनिया में ये वक़्त बड़े यात्री जहाजों के चलाने का भी नहीं है.

जेम्स बॉन्ड जैसी ब्लॉक ब्लस्टर फ़िल्में रिलीज़ नहीं होंगी और लोग सिनेमाघरों को संक्रमण के ख़तरे के तौर पर लेंगे तो थिएटर मालिकों के सामने अलग संकट होगा.

नुक़सान की चेतावनी

फ़्लाईबी एयरलाइन का नुक़सान ये दिखाता है कि बुरा वक़्त भी बहादुरों के लिए अवसर जैसा होता है. लोगन एयर अब ज़्यादा फ़ायदेमंद हवाई मार्ग और स्टाफ़ चुना रहा है. उम्मीद जताई है जा रही है कि कोरोना संकट ख़त्म होने के बाद यह ज़्यादा मज़बूत स्थिति में होगा.

कोरोना की वजह से अलग-अलग सेक्टरों पर अलग-अलग प्रभाव पड़ेगा. संकट चाहे कितना भी हो, हम किराने और घरेलू ज़रूरतों का सामान फिर भी खरीदेंगे. हां, ये ज़रूर हो सकता है कि लोग दुकान जाकर सामान खरीदने के बजाय ऑनलाइन शॉपिंग ज़्यादा करने लगें.

लेकिन चूंकि कामगरों को वापस भेजा जा रहा है इसिलए उत्पादन में कमी आ सकती है. और अगर मांग पूरी नहीं होगी तो भुगतान पर भी असर पड़ेगा.

अगर लोग अपना खर्च अचानक कम कर देंगे तो धीरे-धीरे इसका असर अंतरराष्ट्रीय कंपनियों के निवेश पर पड़ेगा. संयुक्त राष्ट्र से सम्बद्ध संगठन यूएनसीटीएडी ने कहा है कि 100 सबसे बड़ी अंतरराष्ट्रीय कंपनियों में 42 ने 'प्रॉफ़िट वॉर्निंग' जारी की है. ये सब बैंकों के लिए भी फ़ायदेमंद नहीं है और ये चिंताजनक है.

टैक्स में रियायत

अब सवाल ये है कि सरकारें इस बारे में क्या कर सकती हैं? इसमें कोई शक़ नहीं है कि कोरोना जैसे संकट के दौरान स्वास्थ्य सेवाएं संभालने में बहुत खर्च हो जाता है.

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जी-7 देशों से लेकर विश्व मुद्रा कोष (आईएमएफ़) उन देशों की मदद करने की कोशिश कर रहे हैं जिनके यहां स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव है.

मदद करने वालों के लिए एक स्पष्ट रिमांडर है: अमीर होना पैनडेमिक (महामारी) से बचने की कोई गारंटी नहीं है. अगर आपके देश के ग़रीबों या सुदूर देशों के ग़रीबों को उनके हाल पर छोड़ दिया जाए और अगर वो इसी तरह संक्रमित होते रहे तो ये अमीरों के लिए भी उतना ही ख़तरा पैदा करेगा.

अरबपति होना आपको कोविड-1 से नहीं बचाएगा.

इसलिए ये ज़रूरी है कि संक्रमण रोकने के लिए संस्थानों की मदद की जाए ताकि वो अपने कर्मचारियों की मदद कर सकें. आईएमएफ़ ने शुक्रवार को बताया को फ़्रांस, जापान और कोरिया में उन कर्मचारियों की मदद की जा रही है जिन पर बच्चों की ज़िम्मेदारी है.

भरोसे का रिश्ता

ग्लोबल काउंसेल कंसल्टेंसी के ग्रेगर इरविन का कहना है कि कोरोना संकट सरकारों की परीक्षा है.

इरविन की सलाह है कि सरकारें इस स्थिति को कैसे संभालती हैं, उससे लोगों का भरोसा बनेगा या बिगड़ेगा. हो सकता है आने वाले वक़्तों में मांगों में कमी और कीमतों में गिरावट देखी जाए लेकिन फिर शायद ये ठीक भी हो जाएगा.

हम देख सकते हैं कि अभी कैसे लोगों की सरकारों से उम्मीदें बढ़ रही हैं. अभी हमें काम करने के नए-नए तरीकों को ढूंढने की ज़रूरत है.

मिसाल के तौर पर वर्क फ़्रॉम होम (घर से काम करने की सुविधा). संक्रमण के दौरान चूंकि लोग यात्राएं कम कर रहे हैं इसलिए यात्रा करने के बजाय वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग से काम चलाया जा सकता है.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)