कोरोना वायरस: क्या अब हम कभी हाथ मिला पाएंगे?

  • जेम्स जैफरी
  • बीबीसी के लिए
दूर दूर हाथ

छोटी सी मुलाक़ात से लेकर अरबों डॉलर की कारोबारी डील पक्का करने की प्रक्रिया में एक छोटा सा दुनियावी तौर-तरीक़ा भी शामिल होता है. आप उन अजनबियों से भी हाथ मिलाते हैं, जिनसे शायद ही आपकी दोबारा मुलाक़ात हो और उनसे भी जिनके साथ आपने अरबों डॉलर की बिज़नेस डील साइन की हो.

हाथ मिलाने की शुरुआत कहां से हुई, इस बारे में अलग-अलग विचार हैं. एक मत के मुताबिक़ इसकी शुरुआत ग्रीस में शांति के प्रतीक के तौर पर शुरू हुई होगी. इसका मतलब यह रहा होगा कि जब दो लोग हाथ मिला रहे हैं तो यह इस बात की गारंटी है कि उनके पास (हाथ में) कोई हथियार नहीं है. या मध्यकालीन यूरोप में योद्धाओं के बीच इसकी शुरुआत इसलिए हुई होगी कि इसके ज़रिये वे दुश्मन के हाथ में छिपे हथियारों को हिला कर गिरा देते होंगे.

हाथ मिलाने के प्रचलन को बढ़ावा देने का श्रेय क्वैकर्स (मूल रूप से ईसाई धर्म समूह से जुड़े सदस्य) को भी जाता है. किसी के सामने झुक कर अभिवादन करने की तुलना में वे इसे ज़्यादा बराबरी वाला व्यवहार मानते थे.

ऑस्टिन स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ़ टेक्सास में साइकोलॉजी की प्रोफ़ेसर क्रिस्टिन लेगार कहती हैं, "हाथ मिलाना लोगों के बीच संपर्क की एक मुद्रा है. यह एक प्रतीक है कि मनुष्य कैसे एक सामाजिक और स्पर्श की ओर झुकाव रखने वाले प्राणी के तौर पर विकसित हुआ."

जिस शारीरिक मुद्रा (हाथ मिलाने का) का इतिहास हज़ारों वर्ष पुराना है, उस पर रोक लगाना इतना आसान नहीं होगा. प्रोफ़ेसर लेगार कहती हैं, "मनुष्य के लिए स्पर्श कितना महत्वपूर्ण है इसका अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि लोगों ने अब हाथ मिलाने के बजाय कोहनियों को आपस में सटाना शुरू किया. यानी भले ही हाथ न मिलाएं लेकिन कोहनियों के ज़रिये स्पर्श का अहसास बरक़रार रहे."

दरअसल स्पर्श करने और करवाने की यह जैविक इच्छा हर प्राणी में पाई जाती है. 1960 में अमेरिकी साइकोलॉजिस्ट हैरी हर्लो ने दिखाया कि युवा रीसस बंदरों के स्पर्श और प्रेम के विकास के लिए यह कितना ज़रूरी था.

जानवरों में स्पर्श की तरह-तरह की भंगिमाएं देखने को मिलती हैं. चिंपाज़ी हथेलियों को छूते हैं, गले लगाते हैं और अभिवादन के तौर पर एक दूसरे का चुंबन लेते हैं. जिराफ़ अपनी गरदन दो मीटर लंबाई तक ले जा सकते हैं. उनकी इस शारीरिक हरकत को नेकिंग (Necking) कहते हैं. नर जिराफ़ आपस में गर्दन उलझा और रगड़ कर एक दूसरे की ताक़त का जायज़ा लेते हैं. इसके ज़रिये वे एक दूसरे पर अपना प्रभुत्व भी जमाने की कोशिश करते हैं .

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बात सरहद पार

दो देश,दो शख़्सियतें और ढेर सारी बातें. आज़ादी और बँटवारे के 75 साल. सीमा पार संवाद.

बात सरहद पार

समाप्त

दुनिया में लोगों के बीच अभिवादन के कई तरीक़े हैं. इसमें आप संक्रमण के लिए ख़तरा माने जा रहे शारीरिक स्पर्श से बच सकते हैं. हिंदू संस्कृति में अभिवादन नमस्ते के ज़रिये होता है. इसमें आप अपनी हथेलियों को मिला कर अभिवादन करते वक़्त थोड़ा सा झुकते हैं.

समोआ से भी अभिवादन होता है. इसमें किसी व्यक्ति के सामने अपनी आंख की भौहें थोड़ी ऊपर कर और एक चौड़ी सी मुस्कान बिखेर कर उसका अभिवादन किया जाता है.

मुस्लिम देशों में जिसे आप छू नहीं सकते, उसका दिल पर हाथ रख कर अभिवादन करते हैं. हवाईयन शाका साइन, भी अब अभिवादन का तरीक़ा बन गया है. समुद्र की तेज़ लहरों में सर्फ़ करने वाले अमरीकी सर्फ़रों ने इसे अपना कर इसे ख़ासा लोकप्रिय बना दिया है. हवाईयन (हवाई द्वीप से जुड़े) शाका साइन में हाथ की बीच की तीन अंगुलियां मोड़ ली जाती हैं और हाथ मिलाते वक़्त अंगूठे और सबसे छोटी अंगुली को आगे किया जाता है.

शारीरिक स्पर्श हमेशा इतना महत्वपूर्ण नहीं रहा है. 20वीं सदी के मध्य में कई मनोविज्ञानी यह मानते थे कि बच्चों के प्रति अपना प्रेम प्रदर्शित करना सिर्फ़ एक भावनात्मक मुद्रा है. इसका कोई वास्तविक उद्देश्य नहीं है. यहां तक कि वे तो यह चेतावनी भी देते थे कि इस तरह प्रेम दिखाने से बीमारियां फैल सकती हैं और इससे वयस्क होने पर मनौवैज्ञानिक परेशानियों का भी सामना करना पड़ सकता है.

लंदन स्कूल ऑफ़ हाइजिन एंड ट्रॉपिकल मेडिसिन में बिहेवियरल साइंटिस्ट वाल कर्टिस अपनी किताब'डोंट लुक, डोंट टच' में लिखती हैं कि हाथ मिलाना और गालों में चुंबन लंबे समय तक अभिवादन के तरीक़ों के तौर पर इसलिए बरक़रार हैं क्योंकि इनसे यह संकेत जाता है कि सामने वाला शख्स इतना विश्वसनीय है कि वह रोगाणुओं को साझा कर सकता है. दरअसल तौर-तरीक़ों को अपनाए जाने और छोड़ने का इतिहास जनस्वास्थ्य से जुड़ी चिंताओं पर आधारित रहा है.

1920 में अमेरिकी जर्नल ऑफ़ नर्सिंग में छपे लेखों में हाथ न मिलाने की चेतावनी दी गई थी क्योंकि ये बैक्टीरिया के वाहक हो सकते थे. उस दौरान अमेरीकियों को अभिवादन का चीनी तरीक़ा अपनाने के लिए कहा गया था, जिसमें किसी दोस्त का अभिवादन करना हो तो हाथ हिलाया जाता है.

हाथ मिलाने को लेकर कोरोना वायरस संक्रमण से पहले भी आपत्तियां जताई गई थीं. 2015 में यूनिवर्सिटी ऑफ़ कैलिफ़ोर्निया, लॉस एंजिलिस (UCLA) ने अपनी एक इंटेंसिव केयर यूनिट (ICU) में हैंड-शेक फ्री जोन बनाया था. हालांकि यह पॉलिसी छह महीने तक ही रही.

इस बीच, दुनिया की कई मुस्लिम महिलाएं हाथ मिलाने के ख़िलाफ़ आपत्ति जता चुकी हैं. हालांकि उन्होंने धार्मिक विश्वास के आधार पर इसका विरोध किया है.

लेकिन इन आपत्तियों और धार्मिक विश्वास के आधार पर विरोध के बावजूद 20वीं सदी के आगे बढ़ने के साथ ही हाथ मिलाने का रिवाज लगभग पूरी दुनिया में प्रचलित हो गया. यह पेशेवाराना अभिवादन का एक अकाट्य प्रतीक हो गया.

इस रिवाज के वैज्ञानिक अध्ययन ने यह पाया है कि किस तरह से एक बेहतरीन हैंड-शेक मस्तिष्क के उस हिस्से को सक्रिय कर देता है जो अच्छे भोजन, ड्रिंक्स और यहां तक कि सेक्स को भी प्रोत्साहित करता है.

हैंड-शेक का भविष्य क्या है?

अमरीका के कुछ प्रांतों में लॉकडाउन हल्का किया जाने लगा है. लेकिन हैंड-शेक के भविष्य पर अनिश्चितता बनी हुई है.

व्हाइट हाउस के कोरोनावायरस टास्क फोर्स के एक अहम सदस्य डॉ. एंथनी फॉची ने अप्रैल में कहा था, "ईमानदारी से कहूं तो मुझे नहीं लगता है कि हमें अब कभी हाथ मिलाना चाहिए. हाथ न मिलाना न सिर्फ़ कोरोना वायरस संक्रमण को रोकने में मददगार साबित होगा बल्कि इससे अमरीका में इन्फ्लुएंजा को भी तेज़ी से कम करने में मदद मिल सकती है.''

अमरीकी सरकार की गाइडलाइंस के मुताबिक़ सोशल डिस्टेंसिंग भी अभी यहां लंबे वक़्त तक बरक़रार रहने वाली है. लॉकडाउन को हल्का करने के लिए जो गाइडलाइंस जारी की गई हैं, उनके मुताबिक़ संक्रमण के ख़तरे का सबसे ज़्यादा सामना करने वाले लोग, मसलन बुजुर्ग, फेफड़ों की बीमारियों के मरीज़, मोटापे और डाइबिटीज़ से ग्रसित लोगों के लिए तो यह निहायत ज़रूरी होगी.

डेल मेडिकल में क्लीनिकल इंटिग्रेशन एंड ऑपरेशन्स पीठ के सह-अध्यक्ष स्टुअर्ट वुल्फ़ इसे 'साइंस-फिक्शन डिस्टोपिया' जैसी स्थिति बताते हैं. एक ऐसी स्थिति जहां समाज दो हिस्सों में बंटा होगा. एक हिस्सा उन लोगों का होगा जो स्पर्श कर सकते हैं और स्पर्श करवा भी सकते हैं. दूसरे हिस्से में वो लोग होंगे, जिन्हें बिल्कुल आइसोलेट होकर रहना होगा. डॉ. वुल्फ़ का कहना है इसके गंभीर मनोवैज्ञानिक प्रभाव पड़ सकते हैं.

वह कहते हैं, "हमने जवानी और ताक़त को समाज में इतनी अहमियत दी है कि इसने बूढ़े-अशक्त और युवा और स्वस्थ लोगों के बीच एक कृत्रिम दीवार खड़ी कर दी है. यह कुछ लोगों पर बहुत भारी पड़ेगी."

शारीरिक नज़दीकी की इच्छा हममें कहीं गहरे गुंथी हुई है. शायद यही वजह है कि एक अमरीकी राष्ट्रपति के हर साल 65 हज़ार लोगों से हाथ मिलाने का अनुमान लगाया जाता है.

लोगों के जोख़िम लेने की प्रवृति की स्टडी करने वाली प्रिंसटन यूनिवर्सिटी की साइकोलॉजी और पब्लिक अफ़ेयर्स प्रोफेसर एल्के वेबर का कहना है कि आदतें बहुत मुश्किल से छूटती हैं. दूसरी ओर अगर सामाजिक और आर्थिक संदर्भ बदलते हैं तो आदतें और सामाजिक रीति-रिवाज बदल सकते हैं. अभी स्वास्थ्य संदर्भ बदले हुए हैं. आप चीन में पैरों को बांधने (महिलाओं के पैर) के बारे में सोचिए. यह भी एक पुरानी परंपरा थी."

दुनिया में अभिवादन के कई विकल्प हैं, जिनमें शारीरिक स्पर्श की ज़रूरत नहीं होती. मसलन झुक कर अभिवादन करना. दुनिया के एक बड़े हिस्से में इस तरह अभिवादन होता है. थाईलैंड में कोरोना वायरस से कम मौतों का श्रेय इसे ही दिया जा रहा है. इस तरह हाथ हिलाना या सिर हिलाना, मुस्कराना और तमाम तरह के हाथ के संकेतों से अभिवादन हो सकता है. इन तरीक़ों में क़त्तई शारीरिक स्पर्श की ज़रूरत नहीं होती.

लेकिन प्रोफेसर लेगर का मानना है कि कोविड-19 की एक क्रूर विडंबना यह है कि यह ऐसे वक़्त में सामने आई है, जब दुनिया तनावपूर्ण हालात का सामना कर रही है. क्योंकि इस दौर में लोग मानव स्पर्श पर निर्भर हैं.

आप सोचिए कि किसी के मरने या कुछ बुरा होने पर लोग कैसे शोक ज़ाहिर करते हैं. गले लगकर या एक दूसरे के नज़दीक बैठ या फिर कंधे पर हाथ देकर. जब शारीरिक स्पर्श की बात हो तो मुट्ठियों को आपस में मिलाने या कोहनियों को मिलाने से वो बात नहीं आती जो हाथ मिलाने, गले लगने से आ सकती है.

हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में जॉनस्टोन फैमिली प्रोफेसर ऑफ़ साइकोलॉजी, स्टीवन पिंकर यूनवर्सिटी की ऑफ़िशियल न्यूज़ साइट हार्वर्ड गजट के एक लेख में लिखते हैं, "जब भी लोग मुट्ठी मिलाने या कोहनी मिलाने जैसी हरकत करते हैं, वे जानते हैं कि यह सहज दोस्ती की भावना के ख़िलाफ़ है. इसलिए जहां तक मेरा अनुभव है, ऐसे लोग इस तरह की हरकत करते हुए थोड़ा हंसते है, जैसे वे आश्वस्त करना चाह रहे हों कि इस तरह की भंगिमाएं संक्रमण की वजह से करनी पड़ रही हैं. इससे दोस्ती की भावना पर कोई फ़र्क़ नहीं पड़ने वाला."

पब्लिक हेल्थ सेक्टर और संक्रामक बीमारियों पर काम करने वाली डेलियाना गार्सिया हाथ मिलाना छोड़ चुकी हैं. ज़्यादातर लोगों से वह अब हाथ नहीं मिलातीं लेकिन कुछ आदतें दूसरी आदतों की तुलना में मुश्किल से टूटती हैं. गार्सिया कहती हैं, "मैं लोगों को ख़ूब गले लगाती हूं. अपनी 85 साल की मां के साथ सोशल डिस्टेंसिंग मेरे लिए बहुत मुश्किल साबित हुई है."

"मैं उनसे इतनी जुड़ी हुई हूं कि मैं उन तक पहुंच कर उनका चेहरा चूमना चाहती हूं. उनके गालों को एक चुंबन देकर उन्हें कहना चाहती हूं- आई लव यू."

"उनसे गले लगने की ज़बरदस्त इच्छा होती है लेकिन संक्रमण को लेकर डर लगता है, इस वजह से हम दोनों के बीच एक 'बेतरतीब डांस' शुरू हो जाता है.

"जब भी वह मेरी ओर बढ़ती हैं मुझे यह चिंता होती है कि कहीं मैं उन्हें बीमार न कर दूं? इसलिए मैं पीछे हट जाती हूं. लेकिन वो जब जाने लगती हैं तो मैं उनके पीछे-पीछे चल पड़ती हूं." मुझे उनका आश्वस्त करने वाला स्पर्श चाहिए होता है लेकिन मैं उन्हें अपने नज़दीक नहीं ला सकती हूं. हम एक दूसरे से छिटके रहते हैं."

प्रोफेसर वेबर कहती हैं, "ज़िंदा रहना और इसके लिए कोशिश करना मनुष्य की एक और मूल इच्छा है. इसका एक ही विकल्प है. और वह यह कि ज़िंदगी की ओर लौटा जाए. क्योंकि हम जानते हैं की बड़ी तादाद में बुज़ुर्ग, मोटापे के शिकार और बीमारियों के साथ जीने वाले लोग तब तक मरते रहेंगे जब तक कि हम हर्ड इम्यूनिटी नहीं हासिल कर लेते. और इसमें एक लंबा वक़्त लगेगा."

ऑस्टिन स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ़ टेक्सास के डिपार्टमेंट ऑफ़ साइकोलॉजी के प्रोफेसर आर्थर मार्कमैन कहते है, "मनुष्य बचे रहें इसके लिए बीमारियों से दूर रहना ज़रूरी है लेकिन अभी इतनी जल्दी हैंड-शेक को न छोड़िये."

वह कहते हैं, "इसके बजाय, हमें अपने रूटीन में ज़्यादा से ज़्यादा हाथ धोने पर ध्यान देना चाहिए. हम हैंड सेनिटाइनज़र का इस्तेमाल करें और उन तरीकों पर ध्यान दें, जिससे चेहरों पर हाथ न जाए. ना कि हम पूरी तरह शारीरिक स्पर्श को ही छोड़ दें. "

"असली चिंता तो यह है कि हमारे सामने अब एक न्यू नॉर्मल आ सकता है, जिसमें स्पर्श की कोई जगह नहीं होगी. अपने सामाजिक नेटवर्क के दायरे के लोगों को न छूकर हम यह अहसास भी नहीं कर पाएंगे कि हम आख़िर क्या खो रहे हैं".

सवाल और जवाब

कोरोना वायरस के बारे में सब कुछ

आपके सवाल

  • कोरोना वायरस क्या है? लीड्स के कैटलिन से सबसे ज्यादा पूछे जाने वाले

    कोरोना वायरस एक संक्रामक बीमारी है जिसका पता दिसंबर 2019 में चीन में चला. इसका संक्षिप्त नाम कोविड-19 है

    सैकड़ों तरह के कोरोना वायरस होते हैं. इनमें से ज्यादातर सुअरों, ऊंटों, चमगादड़ों और बिल्लियों समेत अन्य जानवरों में पाए जाते हैं. लेकिन कोविड-19 जैसे कम ही वायरस हैं जो मनुष्यों को प्रभावित करते हैं

    कुछ कोरोना वायरस मामूली से हल्की बीमारियां पैदा करते हैं. इनमें सामान्य जुकाम शामिल है. कोविड-19 उन वायरसों में शामिल है जिनकी वजह से निमोनिया जैसी ज्यादा गंभीर बीमारियां पैदा होती हैं.

    ज्यादातर संक्रमित लोगों में बुखार, हाथों-पैरों में दर्द और कफ़ जैसे हल्के लक्षण दिखाई देते हैं. ये लोग बिना किसी खास इलाज के ठीक हो जाते हैं.

    कोरोना वायरस के अहम लक्षणः ज्यादा तेज बुखार, कफ़, सांस लेने में तकलीफ़

    लेकिन, कुछ उम्रदराज़ लोगों और पहले से ह्दय रोग, डायबिटीज़ या कैंसर जैसी बीमारियों से लड़ रहे लोगों में इससे गंभीर रूप से बीमार होने का ख़तरा रहता है.

  • एक बार आप कोरोना से उबर गए तो क्या आपको फिर से यह नहीं हो सकता? बाइसेस्टर से डेनिस मिशेल सबसे ज्यादा पूछे गए सवाल

    जब लोग एक संक्रमण से उबर जाते हैं तो उनके शरीर में इस बात की समझ पैदा हो जाती है कि अगर उन्हें यह दोबारा हुआ तो इससे कैसे लड़ाई लड़नी है.

    यह इम्युनिटी हमेशा नहीं रहती है या पूरी तरह से प्रभावी नहीं होती है. बाद में इसमें कमी आ सकती है.

    ऐसा माना जा रहा है कि अगर आप एक बार कोरोना वायरस से रिकवर हो चुके हैं तो आपकी इम्युनिटी बढ़ जाएगी. हालांकि, यह नहीं पता कि यह इम्युनिटी कब तक चलेगी.

    यह नया वायरस उन सात कोरोना वायरस में से एक है जो मनुष्यों को संक्रमित करते हैं.
  • कोरोना वायरस का इनक्यूबेशन पीरियड क्या है? जिलियन गिब्स

    वैज्ञानिकों का कहना है कि औसतन पांच दिनों में लक्षण दिखाई देने लगते हैं. लेकिन, कुछ लोगों में इससे पहले भी लक्षण दिख सकते हैं.

    कोविड-19 के कुछ लक्षणों में तेज बुख़ार, कफ़ और सांस लेने में दिक्कत होना शामिल है.

    वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (डब्ल्यूएचओ) का कहना है कि इसका इनक्यूबेशन पीरियड 14 दिन तक का हो सकता है. लेकिन कुछ शोधार्थियों का कहना है कि यह 24 दिन तक जा सकता है.

    इनक्यूबेशन पीरियड को जानना और समझना बेहद जरूरी है. इससे डॉक्टरों और स्वास्थ्य अधिकारियों को वायरस को फैलने से रोकने के लिए कारगर तरीके लाने में मदद मिलती है.

  • क्या कोरोना वायरस फ़्लू से ज्यादा संक्रमणकारी है? सिडनी से मेरी फिट्ज़पैट्रिक

    दोनों वायरस बेहद संक्रामक हैं.

    ऐसा माना जाता है कि कोरोना वायरस से पीड़ित एक शख्स औसतन दो या तीन और लोगों को संक्रमित करता है. जबकि फ़्लू वाला व्यक्ति एक और शख्स को इससे संक्रमित करता है.

    फ़्लू और कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए कुछ आसान कदम उठाए जा सकते हैं.

    • बार-बार अपने हाथ साबुन और पानी से धोएं
    • जब तक आपके हाथ साफ न हों अपने चेहरे को छूने से बचें
    • खांसते और छींकते समय टिश्यू का इस्तेमाल करें और उसे तुरंत सीधे डस्टबिन में डाल दें.
  • आप कितने दिनों से बीमार हैं? मेडस्टोन से नीता

    हर पांच में से चार लोगों में कोविड-19 फ़्लू की तरह की एक मामूली बीमारी होती है.

    इसके लक्षणों में बुख़ार और सूखी खांसी शामिल है. आप कुछ दिनों से बीमार होते हैं, लेकिन लक्षण दिखने के हफ्ते भर में आप ठीक हो सकते हैं.

    अगर वायरस फ़ेफ़ड़ों में ठीक से बैठ गया तो यह सांस लेने में दिक्कत और निमोनिया पैदा कर सकता है. हर सात में से एक शख्स को अस्पताल में इलाज की जरूरत पड़ सकती है.

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मेरी स्वास्थ्य स्थितियां

आपके सवाल

  • अस्थमा वाले मरीजों के लिए कोरोना वायरस कितना ख़तरनाक है? फ़ल्किर्क से लेस्ले-एन

    अस्थमा यूके की सलाह है कि आप अपना रोज़ाना का इनहेलर लेते रहें. इससे कोरोना वायरस समेत किसी भी रेस्पिरेटरी वायरस के चलते होने वाले अस्थमा अटैक से आपको बचने में मदद मिलेगी.

    अगर आपको अपने अस्थमा के बढ़ने का डर है तो अपने साथ रिलीवर इनहेलर रखें. अगर आपका अस्थमा बिगड़ता है तो आपको कोरोना वायरस होने का ख़तरा है.

  • क्या ऐसे विकलांग लोग जिन्हें दूसरी कोई बीमारी नहीं है, उन्हें कोरोना वायरस होने का डर है? स्टॉकपोर्ट से अबीगेल आयरलैंड

    ह्दय और फ़ेफ़ड़ों की बीमारी या डायबिटीज जैसी पहले से मौजूद बीमारियों से जूझ रहे लोग और उम्रदराज़ लोगों में कोरोना वायरस ज्यादा गंभीर हो सकता है.

    ऐसे विकलांग लोग जो कि किसी दूसरी बीमारी से पीड़ित नहीं हैं और जिनको कोई रेस्पिरेटरी दिक्कत नहीं है, उनके कोरोना वायरस से कोई अतिरिक्त ख़तरा हो, इसके कोई प्रमाण नहीं मिले हैं.

  • जिन्हें निमोनिया रह चुका है क्या उनमें कोरोना वायरस के हल्के लक्षण दिखाई देते हैं? कनाडा के मोंट्रियल से मार्जे

    कम संख्या में कोविड-19 निमोनिया बन सकता है. ऐसा उन लोगों के साथ ज्यादा होता है जिन्हें पहले से फ़ेफ़ड़ों की बीमारी हो.

    लेकिन, चूंकि यह एक नया वायरस है, किसी में भी इसकी इम्युनिटी नहीं है. चाहे उन्हें पहले निमोनिया हो या सार्स जैसा दूसरा कोरोना वायरस रह चुका हो.

    कोरोना वायरस की वजह से वायरल निमोनिया हो सकता है जिसके लिए अस्पताल में इलाज की जरूरत पड़ सकती है.
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अपने आप को और दूसरों को बचाना

आपके सवाल

  • कोरोना वायरस से लड़ने के लिए सरकारें इतने कड़े कदम क्यों उठा रही हैं जबकि फ़्लू इससे कहीं ज्यादा घातक जान पड़ता है? हार्लो से लोरैन स्मिथ

    शहरों को क्वारंटीन करना और लोगों को घरों पर ही रहने के लिए बोलना सख्त कदम लग सकते हैं, लेकिन अगर ऐसा नहीं किया जाएगा तो वायरस पूरी रफ्तार से फैल जाएगा.

    क्वारंटीन उपायों को लागू कराते पुलिस अफ़सर

    फ़्लू की तरह इस नए वायरस की कोई वैक्सीन नहीं है. इस वजह से उम्रदराज़ लोगों और पहले से बीमारियों के शिकार लोगों के लिए यह ज्यादा बड़ा ख़तरा हो सकता है.

  • क्या खुद को और दूसरों को वायरस से बचाने के लिए मुझे मास्क पहनना चाहिए? मैनचेस्टर से एन हार्डमैन

    पूरी दुनिया में सरकारें मास्क पहनने की सलाह में लगातार संशोधन कर रही हैं. लेकिन, डब्ल्यूएचओ ऐसे लोगों को मास्क पहनने की सलाह दे रहा है जिन्हें कोरोना वायरस के लक्षण (लगातार तेज तापमान, कफ़ या छींकें आना) दिख रहे हैं या जो कोविड-19 के कनफ़र्म या संदिग्ध लोगों की देखभाल कर रहे हैं.

    मास्क से आप खुद को और दूसरों को संक्रमण से बचाते हैं, लेकिन ऐसा तभी होगा जब इन्हें सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए और इन्हें अपने हाथ बार-बार धोने और घर के बाहर कम से कम निकलने जैसे अन्य उपायों के साथ इस्तेमाल किया जाए.

    फ़ेस मास्क पहनने की सलाह को लेकर अलग-अलग चिंताएं हैं. कुछ देश यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि उनके यहां स्वास्थकर्मियों के लिए इनकी कमी न पड़ जाए, जबकि दूसरे देशों की चिंता यह है कि मास्क पहने से लोगों में अपने सुरक्षित होने की झूठी तसल्ली न पैदा हो जाए. अगर आप मास्क पहन रहे हैं तो आपके अपने चेहरे को छूने के आसार भी बढ़ जाते हैं.

    यह सुनिश्चित कीजिए कि आप अपने इलाके में अनिवार्य नियमों से वाकिफ़ हों. जैसे कि कुछ जगहों पर अगर आप घर से बाहर जाे रहे हैं तो आपको मास्क पहनना जरूरी है. भारत, अर्जेंटीना, चीन, इटली और मोरक्को जैसे देशों के कई हिस्सों में यह अनिवार्य है.

  • अगर मैं ऐसे शख्स के साथ रह रहा हूं जो सेल्फ-आइसोलेशन में है तो मुझे क्या करना चाहिए? लंदन से ग्राहम राइट

    अगर आप किसी ऐसे शख्स के साथ रह रहे हैं जो कि सेल्फ-आइसोलेशन में है तो आपको उससे न्यूनतम संपर्क रखना चाहिए और अगर मुमकिन हो तो एक कमरे में साथ न रहें.

    सेल्फ-आइसोलेशन में रह रहे शख्स को एक हवादार कमरे में रहना चाहिए जिसमें एक खिड़की हो जिसे खोला जा सके. ऐसे शख्स को घर के दूसरे लोगों से दूर रहना चाहिए.

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मैं और मेरा परिवार

आपके सवाल

  • मैं पांच महीने की गर्भवती महिला हूं. अगर मैं संक्रमित हो जाती हूं तो मेरे बच्चे पर इसका क्या असर होगा? बीबीसी वेबसाइट के एक पाठक का सवाल

    गर्भवती महिलाओं पर कोविड-19 के असर को समझने के लिए वैज्ञानिक रिसर्च कर रहे हैं, लेकिन अभी बारे में बेहद सीमित जानकारी मौजूद है.

    यह नहीं पता कि वायरस से संक्रमित कोई गर्भवती महिला प्रेग्नेंसी या डिलीवरी के दौरान इसे अपने भ्रूण या बच्चे को पास कर सकती है. लेकिन अभी तक यह वायरस एमनियोटिक फ्लूइड या ब्रेस्टमिल्क में नहीं पाया गया है.

    गर्भवती महिलाओंं के बारे में अभी ऐसा कोई सुबूत नहीं है कि वे आम लोगों के मुकाबले गंभीर रूप से बीमार होने के ज्यादा जोखिम में हैं. हालांकि, अपने शरीर और इम्यून सिस्टम में बदलाव होने के चलते गर्भवती महिलाएं कुछ रेस्पिरेटरी इंफेक्शंस से बुरी तरह से प्रभावित हो सकती हैं.

  • मैं अपने पांच महीने के बच्चे को ब्रेस्टफीड कराती हूं. अगर मैं कोरोना से संक्रमित हो जाती हूं तो मुझे क्या करना चाहिए? मीव मैकगोल्डरिक

    अपने ब्रेस्ट मिल्क के जरिए माएं अपने बच्चों को संक्रमण से बचाव मुहैया करा सकती हैं.

    अगर आपका शरीर संक्रमण से लड़ने के लिए एंटीबॉडीज़ पैदा कर रहा है तो इन्हें ब्रेस्टफीडिंग के दौरान पास किया जा सकता है.

    ब्रेस्टफीड कराने वाली माओं को भी जोखिम से बचने के लिए दूसरों की तरह से ही सलाह का पालन करना चाहिए. अपने चेहरे को छींकते या खांसते वक्त ढक लें. इस्तेमाल किए गए टिश्यू को फेंक दें और हाथों को बार-बार धोएं. अपनी आंखों, नाक या चेहरे को बिना धोए हाथों से न छुएं.

  • बच्चों के लिए क्या जोखिम है? लंदन से लुइस

    चीन और दूसरे देशों के आंकड़ों के मुताबिक, आमतौर पर बच्चे कोरोना वायरस से अपेक्षाकृत अप्रभावित दिखे हैं.

    ऐसा शायद इस वजह है क्योंकि वे संक्रमण से लड़ने की ताकत रखते हैं या उनमें कोई लक्षण नहीं दिखते हैं या उनमें सर्दी जैसे मामूली लक्षण दिखते हैं.

    हालांकि, पहले से अस्थमा जैसी फ़ेफ़ड़ों की बीमारी से जूझ रहे बच्चों को ज्यादा सतर्क रहना चाहिए.

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(जैम्स जैफरी एक फ्री-लांस राइटर हैं और टेक्सास में रहते हैं. वह बीबीसी के लिए लिखते रहते हैं . )

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