जॉर्ज फ़्लॉयड: मां की कब्र के बगल में ही दफ़नाया जाएगा बेटा

ताबूत

इमेज स्रोत, Getty Images

अफ्रीक़ी अमरीकी जॉर्ज फ़्लॉयड के अंतिम संस्कार के दौरान नस्लीय हिंसा के ख़िलाफ़ लोगों की भावनाएं साफ़ नज़र आईं.

टेक्सस प्रदेश के ह्यूस्टन शहर में उनके अंतिम संस्कार के लिए सैकड़ों की संख्या में लोग जमा हुए.

उनके अंतिम संस्कार में शामिल हुए बहुत से लोगों ने कहा कि वे जॉर्ज को हमेशा एक ऐसे शख़्स के तौर पर याद करेंगे जिसका अपराध यह था कि वो काला पैदा हुआ था.

मिनियापोलिस राज्य में जाने से पहले जॉर्ज ह्यूस्टन शहर में रहा करते थे. नॉर्थ कैरोलाइना राज्य में भी श्रद्धांजलि सभाएँ हुईं जहाँ जॉर्ज फ़्लॉयड का जन्म हुआ था.

25 मई को मिनियापोलिस में एक पुलिस अधिकारी ने फ़्लॉयड को गिरफ़्तार करते वक़्त लगभग नौ मिनट तक अपने घुटनों से उनका गला दबाए रखा था जिसके बाद उनकी मौत हो गई थी.

इस मामले में चार पुलिस अधिकारियों के खिलाफ़ कार्रवाई की गई है.

जॉर्ज के कॉफ़िन (ताबूत) को ह्यूस्टन मेमोरियल गार्डन में उनकी मां के पास ही दफ़नाया जाएगा.

फ़्लाॉयड की एक रिश्तेदार ने मौजूदा क़ानूनों में बदलाव का आह्वान किया. उनका तर्क था कि मौजूदा क़ानून काले लोगों को वंचित रखने के लिए ही बनाए गए थे.

ह्यूस्टन के द फ़ाउंटेन ऑफ़ प्रेज़ चर्च में फ़्लॉयड को श्रद्धांजलि देने वालों में आम लोगों के साथ-साथ कई राजनेता भी शामिल थे.

अमरीका के पूर्व उपराष्ट्रपति और इस साल होने वाले राष्ट्रपति चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी की ओर से प्रत्याशी जो बाइडन ने ह्यूस्टन में जॉर्ज फ़्लॉयड के संबंधियों से मुलाक़ात कर अपनी संवेदना प्रकट की.

उनके प्रतिनिधियों ने बताया कि जो बाइडेन अंत्येष्टि समारोह में एक वीडियो संदेश भी भेजेंगे.

हत्या के संदिग्ध को मिली ज़मानत

वहीं, सोमवार को मिनियापोलिस शहर के पूर्व पुलिसकर्मी और जॉर्ज फ़्लॉयड हत्या मामले के संदिग्ध को ज़मानत मिल गई है.

ज़मानत के लिए 1.25 मिलियन डॉलर यानी क़रीब 9 करोड़ 42 लाख रुपये की रकम तय की गई है.

आरोप की गंभीरता और सार्वजनिक तौर पर जिस तरह इस मुद्दे को लेकर लोगों में नाराज़गी है उसे देखते हुए ज़मानत के बदले ये रक़म तय की गई.

पूर्व ऑफ़िसर डेरेक शॉविन पर सेकेंड डिग्री मर्डर का आरोप है.

इस मामले में तीन अन्य पुलिसकर्मियों को भी नौकरी से निकाल दिया गया है. ये तीन पुलिस अधिकारी हैं थॉमस लेन, जे एलेक्सेंडर और टाउ थाओ. इन सब पर हत्या में मदद करने और हत्या को बढ़ावा देने के आरोप हैं.

जॉर्ज फ़्लॉयड की मौत के बाद अमरीका में नस्लीय भेदभाव के ख़िलाफ़ आक्रोश भड़क गया है. नस्लीय भेद-भाव के ख़िलाफ़ दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में भी प्रदशर्न हुए हैं. अमरीका समेत दुनिया के कई हिस्सों में पुलिस व्यवस्था में सुधार की मांग भी की गई.

इसी क्रम में डेमोक्रेट्स के नेताओं ने पुलिस बर्बरता और नस्लवाद के ख़िलाफ़ पुलिस प्रशासन में सुधार के लिए एक व्यापक क़ानून प्रस्ताव दिया है.

यह बिल पुलिस के ख़िलाफ़ कार्रवाई को सरल बनाने के उद्देश्य से प्रस्तावित किया गया है.

हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि अमरीकी सीनेट को नियंत्रित करने वाली रिपब्लिकन पार्टी इस प्रस्तावित बिल का समर्थन करेगी या नहीं.

इमेज स्रोत, TWITTER/RUTH RICHARDSON

कैसे हुई थी हत्या?

जॉर्ज फ़्लॉयड की मौत पुलिस हिरासत में हुई थी.

उनकी मौत का एक वीडियो सामने आया था. जिसमें एक पुलिसकर्मी को घुटना टेककर उनकी गर्दन दबाते हुए देखा जा सकता है, वो भी तब, जब जॉर्ज उनसे कह रहे हैं कि 'उन्हें सांस नहीं आ रही है.'

वीडियो कैप्शन,

अमरीका: फ़्लॉयड के लिए प्रार्थना, जुटे हज़ारों

दरअसल, पुलिस को रिपोर्ट मिली थी कि जॉर्ज फ़्लॉयड ने जाली नोट का इस्तेमाल किया है और इस बारे में पूछताछ के लिए कुछ पुलिसकर्मी सोमवार (25 मई) को उनके घर पहुंचे थे.

पुलिस विभाग के अनुसार, जब पुलिसकर्मियों ने जॉर्ज फ़्लॉयड से अपनी कार से दूर जाकर खड़े होने को कहा तो उन्होंने इससे इनकार किया, जिसकी वजह से जॉर्ज को हथकड़ी भी लगा दी गई थी.

लेकिन इसके बाद क्या हुआ, यह जाँच का विषय है, क्योंकि जो वीडियो वायरल हो रहा है, उसमें यह नहीं दिखाई देता कि पुलिसवालों और जॉर्ज के बीच झगड़ा किस बात पर हुआ.

लेकिन वीडियो में एक गोरे अफ़सर को उनके गले पर घुटना रखकर दबाते हुए देखा जा सकता है, जिस पर जॉर्ज कहते हैं, "प्लीज़ छोड़ दो, मुझे सांस नहीं आ रही है. मुझे मत मारो."

जिस पुलिसकर्मी ने जॉर्ज के गले पर घुटना रखा था, उनका नाम डेरेक शॉविन है.

ऑटॉप्सी की शुरुआती रिपोर्ट के मुताबिक़ पुलिस अधिकारी ने फ़्लायड की गर्दन पर आठ मिनट और 46 सेकेंड तक अपना घुटना रखा था. जिनमें से तीन मिनट ऐसे थे, जब फ़्लायड बिल्कुल निष्क्रिय हो गए थे.

वीडियो कैप्शन,

एक हत्या जिस पर पूरा अमरीका जल रहा है

शॉविन के अपने घुटना हटाने के दो मिनट पहले अन्य अधिकारियों ने फ़्लायड की पल्स देखने के लिए उनकी दाहिनी कलाई को चेक किया था, लेकिन उन्हें पल्स नहीं मिली. फ़्लायड को अस्पताल ले जाया गया, जहाँ एक घंटे बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया गया.

इस वीडियो के सामने आने के बाद ही इन सभी पुलिसकर्मियों को नौकरी से निकाल दिया गया था और उन पर अलग-अलग धाराएं लगाई गई थीं.

फ़्लायड के परिवार के एक वकील ने शॉविन पर सोच-समझ कर हत्या का आरोप लगाया है.

कोर्ट में क्या हुआ

डेरेक शॉविन टेलीकॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेश हुए लेकिन उन्होंने कोई याचिका दायर नहीं की है.

क़रीब 15 मिनट तक चली सुनवाई के दौरान उन्होंने एक शब्द भी नहीं कहा. उनके हाथ हथकड़ियों से बंधे हुए थे और उन्होंने एक नारंगी रंग का जंपसूट पहन रखा था.

उनके वक़ील ने ज़मानत के बदले अदा की जाने वाली राशि को लेकर कोई आपत्ति नहीं जताई.

कई बार स्थानांतरित किये जाने के बाद वर्तमान में उन्हें मिनेसोटा राज्य के ओक पार्क हाइट्स जेल में रखा गया है.

यह उनकी कोर्ट में पहली पेशी थी, उनकी दूसरी पेशी 29 जून को होगी.

इमेज स्रोत, Reuters

इमेज कैप्शन,

डेरेक शॉविन

डेरेक शॉविन के ख़िलाफ़ क्या हैं आरोप?

पुलिसकर्मी डेरेक शॉविन के ख़िलाफ़ सेंकड डिग्री मर्डर का केस दर्ज किया गया है. वहीं बाकी पुलिसकर्मियों पर हत्या में मदद करने और हत्या को बढ़ावा देने के आरोप लगाए गए है.

मिनेसोटा के क़ानून के मुताबिक फ़र्स्ट डिग्री और सेकंड डिग्री मर्डर के आरोप में इस बात के सबूत पेश करने होते हैं कि हत्यारे का इरादा हत्या करने का था. आमतौर पर सोच समझकर की गई हत्या के लिए फ़र्स्ट डिग्री मर्डर की धारा लगती है जबकि जज़्बात में या ग़ुस्से में की गई हत्या के लिए सेकंड डिग्री का चार्ज लगता है.

थर्ड डिग्री मर्डर में दोषी क़रार दिए जाने के लिए इस बात का सबूत नहीं देना होता है कि अभियुक्त चाहता था कि पीड़ित मर जाए, सिर्फ़ ये साबित करना होता है कि अभियुक्त ने जो किया वो ख़तरनाक था और उसके मन में मानव जीवन के लिए कोई परवाह नहीं थी.

यदि कोई अभियुक्त सेकंड डिग्री मर्डर का दोषी करार दिया जाता है तो उसे चालीस साल तक की सज़ा हो सकती है. वहीं थर्ड डिग्री मर्डर में 25 साल तक की सज़ा हो सकती है.

इमेज स्रोत, Reuters

इमेज कैप्शन,

सांकेतिक तस्वीर

परिवर्तन की वजह

एक अनुमान के मुताबिक़, अमरीका में पुलिस के हाथों हर साल क़रीब 1200 लोगों की मौत होती है, लेकिन क़रीब 99 प्रतिशत मामलों में पुलिस अधिकारियों पर किसी अपराध का केस दर्ज नहीं होता.

लेकिन जॉर्ज फ़्लॉयड की पुलिस हिरासत में मौत के बाद हुए प्रदर्शनों और पब्लिक प्रेशर के बीच इस बार मामला दर्ज किया गया है.

प्रदर्शनकारियों को उम्मीद है कि फ़्लॉयड का मामला पुलिस अधिकारियों को 'संरक्षण देने वाले' क़ानून में कड़े बदलाव की वजह बनेगा.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)