इंटरनेट के ‘शैतान’ जो लड़कियों की ज़िंदगियां तबाह करते हैं

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"वो शैतान जिसे रोका नहीं जा सकता था, उसे रोकने के लिए शुक्रिया."

दक्षिण कोरिया में जब एक शख़्स को आपत्तिजनक तस्वीरों के बदले धन वसलूने वाले गिरोह के संदिग्ध सरगना के रूप में पकड़ा गया तो उसकी ये प्रतिक्रिया थी.

'द डॉक' के नाम से चर्चित छो जू चो कई विवादित चैटरूम्स को चलाया करते थे.

चो ने इन चैटरूम्स में कई युवा महिलाओं, जिनमें से 16 लड़कियां नाबालिग़ थीं, को ब्लैकमेल करके रेप या हिंसात्मक यौन उत्पीड़न के वीडियो बनाने के लिए विवश किया.

इसके बाद चो ने इन वीडियोज़ को एनक्रिप्टेड मैसेज़िंग सर्विस टेलीग्राम पर बेच दिया. इसकी फीस उन्होंने 200 से 1200 डॉलर के बीच ली.

लेकिन वह ऐसे अकेले व्यक्ति नहीं हैं या इस क्षेत्र में पहले व्यक्ति नहीं हैं.

चो का चैटरूम 'डॉक्टर रूम' भी एक अन्य डॉक्टर रूम 'Nth Rooms' की तर्ज पर बना है.

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दो देश,दो शख़्सियतें और ढेर सारी बातें. आज़ादी और बँटवारे के 75 साल. सीमा पार संवाद.

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'Nth Rooms' में जाने के लिए लोग पैसे देते हैं जहां पर लड़कियों को रियल टाइम में ब्लैक मेल करके ऐसी सामग्री अपलोड करने के लिए कहा जाता था.

इस तरह के अन्य चैटरूम भी हैं जो कि ये बताते हैं कि इन चैट रूम में पैसे देकर शामिल होने वालों की संख्या हज़ारों में है.

कोरियाई अख़बार कूकमिन ल्बो के मुताबिक़, हर चैटरूम में तीन से चार लड़कियों के वीडियोज़ को चलाया जाता है जिन्हें चैटरूम के मालिकों की ओर से ब्लैकमेल किया गया होता है.

ये चैटरूम ऑपरेटर लड़कियों से मॉडलिंग और एस्कॉर्ट आदि की नौकरियों के लिए संपर्क करते हैं. इसके बाद ये महिलाओं से टेलीग्राम के ज़रिए व्यक्तिगत जानकारी हासिल करते हैं.

इन जानकारियों की मदद से ही वे पीड़ितों को ब्लैकमेल करते हैं.

चो के ख़िलाफ़ रेप, ब्लैकमेल, दबाव बनाने, सेक्सुअल कंटेट के अवैध निर्माण और वितरण करने समेत 14 मामले दर्ज हैं. चो के ख़िलाफ़ उनकी गिरफ़्तारी के तीन महीने बाद 11 जून को सुनवाई शुरू हुई है.

चो के वकील के मुताबिक़, वह ये स्वीकार करते हैं कि उन्होंने सेक्स वीडियोज़ बनवाए और टेलिग्राम पर साझा भी किए. लेकिन वे किसी तरह की ब्लैकमेलिंग, हिंसा और दबाव बनाने के अभियोगों से इनकार करते हैं.

फ़िलहाल जब दुनिया का ध्यान चो की ओर है तब उनकी शिकार हुई महिलाएं अकेलेपन में अपना भविष्य तलाशने का संघर्ष जी रही हैं.

इन वीडियो फिल्मों में प्रताड़ित हुई दर्जनों महिलाओं और बच्चों के सामने सामाजिक रूप से रूढ़िवादी कोरिया में अपनी आगे की ज़िंदगी जीना संघर्ष भरा होगा.

इन पीड़ितों की मदद कर रही एक महिला ली ह्योरिन ने बीबीसी को डिजिटल यौन अपराध के ख़िलाफ़ अपनी जंग के बारे में बताया.

इंटरनेट पर यौन अत्याचार

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ली ह्योरिन बीते तीन सालों से इंटरनेट पर मौजूद अश्लील सामग्री हटवा रही हैं.

ह्योरिन कहती हैं, "कभी कभी ऐसा लगता था कि कुछ देर के लिए आराम करना भी एक पाप है. इसका मतलब ये था कि मैं जितनी देर सोती रहूंगी, उतनी ही देर यौन उत्पीड़न के वीडियो इंटरनेट पर जाते रहेंगे और लोग शिकार बनते रहेंगे. शुरुआत में मुझे लगता था कि चाहें मुझे दिन रात काम करना पड़े, मुझे ये वीडियो डिलीट करने होंगे."

ह्योरिन साल 2017 से डिजिटल यौन अपराधों के बुरे परिणामों का सामना कर रही हैं. इस प्रक्रिया में शुरुआत में वीडियो डिलीट करना शामिल थी. लेकिन उन्हें जल्द ही ये अहसास हुआ कि सिर्फ अपराध का सबूत मिटाना काफ़ी नहीं है.

वे कहती हैं, "जब यौन उत्पीड़न के वीडियो पहली बार एक सामाजिक समस्या के रूप में सामने आए तब इन वीडियोज़ की पीड़िताओं की मदद करने का कोई ज़रिया नहीं था. तभी हमारी संस्था कोरिया सायबर सेक्सुअल वॉयलेंस रिस्पॉन्स सेंटर को स्थापित किया गया. हमारा उद्देश्य इन वीडियो फिल्मों को सिर्फ डिलीट करना नहीं था बल्कि महिला अधिकारों की नज़र से पीड़ितों की काउंसलिंग करवाना भी था."

ह्योरिन को जल्द ही ये समझ आया कि इस तरह की पीड़िताओं के लिए उनके काम की कितनी अहमियत है.

वह कहती हैं, "कई पीड़ित डरे हुए होते हैं कि उनके इस तरह के वीडियो इंटरनेट पर अभी और दस साल बाद तक सेव किये जाते रहेंगे और कैसे इनका इस्तेमाल मनोरंजन और पैसे कमाने के लिए किया जाएगा."

ये स्पष्ट था कि इन पीड़ितों के इस सदमें से बाहर निकलने का तरीका सिर्फ़ काउंसलिंग ही है. और ह्योरिन पीड़ितों के साथ ही काम कर रही हैं.

'ये आपकी ग़लती नहीं है'

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इस सेंटर पर आने वाले ज़्यादातर पीड़ित अपनी बात की शुरुआत किसी न किसी बहाने के साथ करते हैं.

ह्योरिन कहती हैं, "जब मैं पीड़ितों को बहाने बनाते हुए देखती हूँ तो मेरा दिल टूट जाता है. मैं उन्हें तसल्ली से बताती हूं कि वे इसके लिए ज़िम्मेदार नहीं हैं और ये उनकी ग़लती नहीं है."

ह्योरिन मानती हैं कि इस ग़लती के अहसास का ख़त्म होना इस तरह के पीड़ितों की मानसिक हालत सुधरने का पहला चरण होता है.

वे कहती हैं, "ये बेहद दुख की बात है कि कई पीड़ितों के आसपास ऐसे लोग नहीं हैं जो उन्हें वो बता सकें जो मैं बताती हूँ. इसकी जगह लोग उन पर तोहमतें मढ़ते हैं, और शायद यही वजह है कि कई पीड़ित काफ़ी शर्म और ग़लती का अहसास लेकर जीते हैं."

खुलकर सामने आने के लिए काफ़ी साहस की ज़रूरत होती है. ह्योरिन मानती हैं कि टेलीग्राम सेक्स ट्रैफिकिंग मामले में जो लोग उनकी संस्था के संपर्क में आए हैं, वे कुल पीड़ितों की संख्या की तुलना में काफ़ी कम हैं.

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ह्योरिन कहती हैं, "पीड़ित हम तक आने से पहले पुलिस और मीडिया आदि से निपटकर आते हैं. ऐसे में जब वे हमारे पास आते हैं तब तक वे काफ़ी थक चुके होते हैं."

कई पीड़ित हर तरह की आस भी छोड़ देते हैं.

पीड़ितों के साथ मिलकर काम करते हुए ह्योरिन उनके मन में ये अहसास एक बार फिर जाग्रत करती हैं कि उनकी ज़िंदगियों पर उनका ही अधिकार है.

ह्योरिन कहती हैं, "ठीक होने का मतलब ये है कि वे अपने साथ हुए अन्याय की शिकार बनकर रहने की जगह अपने साथ हुए अन्याय को जीवन के अन्य अनुभवों की तरह लेते हुए आगे बढ़ सकें."

चैट रूम कैसे काम करते हैं?

चो और उनके जैसे अन्य लोग सोशल मीडिया पर मॉडलिंग के काम से जुड़े प्रस्ताव देकर लड़कियों को आकर्षित करते हैं.

अगर इन प्रस्तावों के प्रति कोई भी लड़की रुचि दिखाती है तो उसे ज़्यादा जानकारी के लिए टेलीग्राम पर बुलाया जाता है. यहां पर चो जैसे लोग लड़कियों से उनकी व्यक्तिगत जानकारी जैसे कि नाम, फोन नंबर, पता और ऐसी कोई सामग्री जिसकी मदद से उन्हें ब्लैकमेल किया जा सके.

ये लड़कियों से काम की ज़रूरत का हवाला देते हुए पोर्नोग्राफ़िक तस्वीरें भी मंगवाते हैं. इसके बाद इन्हीं तस्वीरों और निजी जानकारियों की मदद से लड़कियों को वीडियो बनाने और शेयर करने के लिए कहा जाता है. इस प्रक्रिया में उन्हें सामान्यत: खुद को कष्ट देने और बेहद ख़तरनाक सैक्सुअल काम करने के लिए कहा जाता है.

चो लड़कियों को 'गुलाम' कहा करते थे और कभी कभी लड़कियों को डॉक्टर की गुलाम कहा करते थे.

कोरियाई पुलिस मानती है कि चो का टेलीग्राम पर बनाया गया डॉक्टर चैट रूम लोगों को इस ग्रुप में शामिल करने के लिए 1245 डॉलर लिया करता था. कोरियाई मीडिया के मुताबिक़, चो के डॉक्टर रूम के अलावा 8 अन्य ऐसे ही रूम मौजूद हैं.

टेलीग्राम ही क्यों?

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मैसेजिंग ऐप टेलीग्राम पर आप इस तरह के एनक्रिप्टेड चैट रूम बना सकते हैं जिनका डेटा विदेशी सर्वरों पर संग्रहित किया जाता है.

ये इसलिए अहम था क्योंकि जो पॉर्नोग्राफ़िक वेबसाइटें इस तरह की सामग्री को वितरित कर सकती थीं उन्हें कोरियाई सरकार साल 2018 के स्पाई कैम स्कैंडल के बाद बंद कर चुकी है.

स्पाई कैम स्कैंडल में कई सार्वजनिक बाथरूमों, चेंजिंग रूम, होटल आदि में खींची गई आपत्तिजनक तस्वीरें और वीडियो ऑनलाइन और सोशल मीडिया पर शेयर कर दिए गए थे.

टेलीग्राम पर चैटरूम को आसानी से बंद किया जा सकता है और क़ानूनी एजेंसियों की जांच से बचा जा सकता है. इसके साथ ही टेलीग्राम पर ऐसे चैटरूम आसानी से खड़े भी किए जा सकते हैं.

सबसे ख़ास बात ये है कि पेमेंट बिटक्वॉइन में ली जा सकती है जिससे लोग बिना अपनी पहचान ज़ाहिर किए चैट रूम के सदस्य बन सकते हैं.

काउंसलर के ऊपर कैसा असर

ह्योरिन के काम का असर उनके ऊपर भी पड़ा है.

वह कहती हैं, "जब मैं उनकी काउंसलिंग करती हूँ तो मैं उनका दर्द महसूस कर सकती हूं. मैं पीटीएसडी जैसे अनुभव से गुजरती हूँ. Nth Rooms के मामले में एक पुरुष ने एक लड़की को अपने भाई के साथ यौन संबंध बनाने के लिए बाधित किया. ये काफ़ी धक्का पहुंचाने वाला था कि ये लोग किस तरह अपने पीड़ितों को किस तरह से बेइज़्ज़त करके उनके साथ घनघोर अन्याय कर रहे हैं."

इस तरह की सामग्री से दो चार होने का असर उनकी व्यक्तिगत ज़िंदगी पर भी पड़ा है.

वह कहती हैं, "मैं अपने लिए भी डरती हूँ. इस संस्था में शामिल होने से पहले मैंने एक अवैध सेक्स वीडियो देखा जिसका थंबनेल मेरे और मेरे पार्टनर जैसा लग रहा था. मैं पूरी रात इस तरह की संभावना को लेकर रोती रही. सुबह मैंने वह वीडियो डाउनलोड करके देखा कि कहीं उस वीडियो में मैं तो नहीं हूँ. इसके कुछ समय बाद जब मैं पेशेगत रूप से सेक्स वीडियोज़ डिलीट कर रही थी तब एक बार मुझे एक ऐसा वीडियो दिखा जिसमें पीड़िता मेरी छोटी बहन जैसी लग रही थी. मैंने उस वीडियो को चेक किया कि कहीं वो मेरी बहन का वीडियो तो नहीं है."

समय ने उन्हें अपने काम के सबसे ख़राब पहलुओं का सामना करना सिखाया है.

ह्योरिन कहती हैं, "दो साल पहले जब मुझसे किसी का कंटेट डिलीट करने के लिए कहा गया था तो मैं सेक्स वीडियो का थंबनेल देखकर परेशान हो गई थी. लेकिन अब मैं ठीक हूँ. ऐसे में मुझे लगता है कि जैसे जैसे समय बीतता है, मैं वैसे वैसे ठीक होती जाती है. लेकिन काउंसलर भी काउंसलिंग लेते हैं ताकि वे तनाव से निकल सकें."

नाकाफ़ी सज़ा

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डिजिटल सेक्स क्राइम के ख़िलाफ़ क़ानूनी कार्रवाई करना काफ़ी मुश्किल होता है.

कोरियाई मीडिया के मुताबिक़, Nth Rooms ऑपरेशन के पीछे एक शख़्स, जो गॉड गॉड के नाम से चर्चित है, ने सरकारी एजेंसियों का मज़ाक उड़ाते हुए कहा था कि अगर वह उस फोन को फेंक सकता जिसे उसने इस काम के लिए इस्तेमाल किया था तो वह खुद आत्मसमर्पण भी कर देता, तब भी पुलिस सबूतों के अभाव में उसके ख़िलाफ़ अभियोग न चला पाती.

गॉड गॉड का असली नाम मून ह्यंग वूक है जो आने वाले समय में खुद को निर्दोष साबित करने की कोशिश करेगा.

वूक को 12 मई को गिरफ़्तार करके उन पर 12 मामले दर्ज किए गए थे.

डिज़िटल सेक्स क्राइम के लिए पकड़े गए लोगों को अक्सर एक चेतावनी के साथ छोड़ दिया जाता है. और जहां पर पुलिस उन्हें सजा दिलाने में कामयाब होती है, वहां उन्हें काफ़ी कम सजा मिलती है.

सुप्रीम कोर्ट के आंकड़ों के मुताबिक़, अवैध फिल्म बनाने के लिए 2012 से 2017 के बीच कानूनी कठघरे में खड़े होने वाले 7446 लोगों में से सिर्फ 647 लोगों को सज़ा या दंड भुगतना पड़ा है.

इससे कोरिया में लोग काफ़ी नाराज़ हैं.

बीबीसी की कोरिया संवाददाता लौरा बिकर कहती हैं, "कई बार महिलाओं ने मुझसे कहा है कि न्याय व्यवस्था यौन अपराधों के ख़िलाफ़ ठीक से सज़ा नहीं देता है कि और ये रवैया यौन अपराधों को रोकने में सहायक नहीं है. बार बार हज़ारों महिलाओं ने वर्तमान सरकार से इस मुद्दे पर कदम उठाने की मांग की है."

सरकार ने ऑनलाइन ग्रूमिंग, बच्चों - किशोरों को ब्लैकमेल करने और यौन अपराधों से जुड़े क़ानूनों को बदलने का वादा किया है.

मई में डिजिटल यौन अपराधों के ख़िलाफ़ कदम उठाने के बाद नेशनल असेंबली ने बिना मर्जी के रिकॉर्ड किए गए वीडियो फिल्मों और तस्वीरों को देखने, संग्रहित करने, खरीदने और अपने पास रखने पर तीन साल जेल और 25 हज़ार अमरीकी डॉलर का जुर्माना लगाने का क़ानून बनाया है.

इससे पहले इस तरह की सामग्री को देखने या अपने पास रखना दंडात्मक काम नहीं था.

Nth और डॉक्टर रूम के मामलों में कोरियाई पुलिस ने अब तक 664 संदिग्धों को अपनी गिरफ़्त में लिया है जिसमें कई सरगना शामिल हैं.

लेकिन कई न्यायाधीश अभी भी डिजिटल यौन अपराध करने वालों के प्रति नर्म रुख अपनाते हैं.

महिला अधिकारों की बात करने वालों ने उस न्यायालय के बाहर प्रदर्शन किया है जहां चो के ख़िलाफ़ कानूनी कार्रवाई चल रही है.

इन लोगों का कहना है कि अगर चो को सख़्त सज़ा नहीं मिली तो टेलीग्राम पर यौन उत्पीड़न के मामले लगातार जारी रहेंगे.

कभी ख़त्म न होने वाला काम

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ह्योरिन को ये ठीक ठीक पता है कि वह डिजिटल यौन अपराधों के ख़िलाफ़ लड़ाई क्यों लड़ रही हैं.

"साल 2018 में मैं गुस्से में खुद से पूछती रही कि ये इतना ग़लत कैसे हो सकता है. ये सब इतना अपमानजनक कैसे हो सकता है. मैं इतनी गुस्से में थी कि लगातार काम करती रहती थीं. मुझे लगता कि आप इसे दिल का काम कह सकते हैं.

ह्योरिन कहती हैं, "हमारे पास तैयार केस नहीं है. यही हमारी सबसे बड़ी दिक्कत है. हम रिवेंज पॉर्न और डिजिटल यौन उत्पीड़न की शिकार हुई महिलाओं की मदद करते हैं जब तक वे इस सबसे बाहर नहीं आ जातीं."

ह्योरिन कहती हैं कि हर बार जब कोई वीडियो डिलीट किया जाता है कि इससे पीड़ित को अपनी ज़िंदगी एक बार फिर शुरू करने का मौका मिलता है. लेकिन इस तरह के वीडियोज़ को डिलीट करने और ऐसे चैट रूम्स को बंद करने का काम कभी ख़त्म नहीं होता है.

वे कहती हैं, "डिजिटल चैट रूम किसी को उसकी मानवीय इज़्ज़त से महरूम कर सकता है. इसी लिए हम जो भी करते हैं, वो कभी बंद नहीं करना चाहिए."

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