उत्तर कोरिया ने दक्षिण कोरिया के साथ बने साझा वार्ता दफ़्तर को उड़ाया

साझा संपर्क कार्यालय

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उत्तर कोरिया ने दक्षिण कोरिया के साथ बने साझा वार्ता दफ़्तर को उड़ा दिया है.

दक्षिण कोरियाई समाचार एजेंसी योनहाप ने दक्षिण कोरियाई सेना के सूत्रों के हवाले से लिखा है कि उत्तर कोरिया के सीमावर्ती शहर कएसोंग के संयुक्त औद्योगिक परिसर से एक धमाका सुनाई पड़ा.

इससे पूर्व उत्तर कोरिया ने घोषणा की थी कि वह दक्षिण कोरिया और उसके बीच के सभी कम्युनिकेशन लाइंस वो ख़त्म करने जा रहा है. इस घोषणा के साथ ही उत्तर कोरिया ने ये भी कहा था कि वे सीमाई शहर कएसोंग में बनाए गए संपर्क कार्यालय को मंगलवार को बंद कर देंगे.

2018 में बातचीत के बाद दोनों देशों ने तनाव कम करने के लिए यह कार्यालय स्थापित किया था.

1953 में कोरियाई युद्ध की समाप्ति के बाद से दोनों देशों के बीच कोई शांति समझौता नहीं हुआ है इसलिए तकनीकी रूप से दोनों देश अभी भी युद्ध के दौर में हैं.

उत्तर और दक्षिण के बीच बनाई गई संपर्क लाइन

कोविड-19 महामारी के कारण लागू किए गए प्रतिबंधों की वजह से संपर्क कार्यालय जनवरी में अस्थाई तौर पर बंद कर दिया गया था. हालांकि, दोनों देशों के बीच संपर्क फ़ोन के ज़रिए जारी था.

दोनों देशों के बीच कार्यालय से सुबह 9 बजे और शाम को 5 बजे दो फ़ोन कॉल किए जाते थे.

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किम जोंग उन की बहन ने दी थी धमकी

उत्तर कोरिया की सरकारी न्यूज़ एजेंसी कोरियन सेंट्रल न्यूज़ एजेंसी (केसीएनए) का कहना था "हम इस निष्कर्ष पर पहुंचे हैं कि दक्षिण कोरियाई प्रशासन के साथ आमने-सामने बैठने और किसी मुद्दे पर बातचीत करने की ज़रूरत नहीं है क्योंकि उन्होंने हमें सिर्फ़ निराश ही किया है."

उत्तर कोरिया के शीर्ष नेता की बहन किम यो-जॉन्ग ने पिछले सप्ताह धमकी देते हुए कहा था कि वो तब तक दफ़्तर बंद कर देंगी जब तक कि दक्षिण कोरिया भगोड़े समूहों के पर्चे उत्तर कोरिया में आने से नहीं रोकता है.

उन्होंने कहा था कि पर्चे का अभियान एक शत्रुतापूर्ण हरकत है जो 2018 में दक्षिण कोरिया के मून जे-इन और किम जॉन्ग-उन के बीच हुए शांति समझौतों का उल्लंघन है.

सियोल संवाददाता लॉरा बिकर का विश्लेषण

ऐसा लगता है कि इस तरह से सारे संपर्क बंद कर देना सिर्फ़ सीमा से पर्चों के आने के कारण नहीं हुआ है बल्कि यह उत्तर कोरिया की एक बड़ी योजना का हिस्सा है.

उत्तर कोरिया शायद आगे की बातचीत से पहले एक संकट खड़ा करना चाहती है ताकि उससे उपजे तनाव का लाभ ले सके. थोड़े शब्दों में कहें तो यह एक ध्यान आकर्षित करने के लिए शुरू की गई लड़ाई है ताकि अपने पड़ोसी से और कुछ सहायता ली जा सके.

वो ये खेल 2013 से पहले भी खेल चुकेहैं ताकि वो दक्षिण कोरिया से और रियायतें ले सकें.

घरेलू स्तर पर देखा जाए तो ध्यान भटकाने के लिए भी यह अच्छा है. किम जॉन्ग-उन आर्थिक समृद्धि देने में नाकाम रहे हैं और ऐसी भी अफ़वाहें हैं कि कोविड-19 ने देश के कई हिस्सों को प्रभावित किया है.

राष्ट्र को एक आम दुश्मन देने के बाद लोगों का समर्थन मिलने में मदद मिलती है.

यह ध्यान देने वाली बात है कि इस नीति पर किम की बहन उभरकर सामने आई हैं. किम यो-जॉन्ग ने सियोल के साथ संबंध तोड़ने के आदेश दिए हैं. यह उनको एक प्लेटफ़ॉर्म देता है और इन अटकलों को भी मज़बूत करता है कि वो एक संभावित नेता के रूप में तैयार हो रही हैं.

लेकिन यह मून प्रशासन के लिए काफ़ी निराशा भरा है. दो साल पहले आशाओं की लहर में दोनों नेताओं के मिलने पर देश ने जश्न मनाया था और फ़ोन लाइन खोलने पर राज़ी हुए थे. अब उत्तर जाने वालीं सभी फ़ोन कॉल्स उठाई नहीं जाएंगी.

अब सवाल यह उठता है कि अगर यह उत्तर कोरिया की योजना है तो आगे क्या होने वाला है?

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क्या करते हैं भगोड़े?

उत्तर कोरिया के भगोड़े आमतौर पर उत्तर कोरिया की आलोचना में पर्चे लगू ग़ुब्बारे भेजते हैं. कई बार उत्तर कोरिया के लोग उसे उठाएं इसके लिए उसमें सामान भी होता है.

उत्तर कोरिया में सिर्फ़ सरकार नियंत्रित मीडिया से ख़बरें जा सकती हैं और कई लोगों के पास इंटरनेट नहीं है.

उत्तर और दक्षिण कोरिया के बीच संबंध 2018 में ठीक होते हुए दिखे थे. उस समय दोनों देशों के नेता तीन बार मिले थे. इस तरह की उच्च-स्तरीय बैठक एक दशक में भी नहीं हुई थी.

पिछले साल हनोई में किम और अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच परमाणु मुद्दे पर बातचीत रुकने के बाद उत्तर कोरिया ने दक्षिण कोरिया के साथ कई संबंध तोड़ लिए थे.

दोनों कोरियाई देश तकनीकी तौर पर अभी भी युद्ध में हैं क्योंकि 1950-53 के कोरियाई युद्ध के बाद दोनों देशों ने शांति समझौते की जगह संघर्ष विराम किया है.

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