पाकिस्तान हमला: मारे गए सुरक्षा गार्ड इफ़्तिख़ार वाहिद दो दिन बाद रिटायर होने वाले थे

  • 30 जून 2020
कराची हमले में मरने वाले सुरक्षा गार्ड
Image caption कराची हमले में मरने वाले सुरक्षा गार्ड

60 साल के इफ़्तिख़ार वाहिद को दो दिनों के बाद रिटायर होना था लेकिन उससे पहले वो सोमवार को हमलावरों का मुक़ाबला करते हुए ख़ुद मारे गए.

इफ़्तिख़ार वाहिद पिछले 10 वर्षों से पाकिस्तान स्टॉक एक्सचेंज में सुरक्षा गार्ड की ड्यूटी कर रहे थे.

सोमवार को कराची स्थित स्टॉक एक्सचेंज की इमारत पर कुछ बंदूक़धारियों ने हमला किया जिसके नतीजे में चार हमलावरों समेत स्टॉक एक्सचेंज के दो सुरक्षागार्ड एक पुलिस सब-इंस्पेक्टर मारे गए.

इस इमारत की सुरक्षा की ज़िम्मेदारी एक निजी सुरक्षा कंपनी के पास है.

मारे गए सुरक्षा गार्ड इफ़्तिख़ार वाहिद का घर स्टॉक एक्सचेंज की इमारत से सटे रेलवे कॉलोनी में है.

इफ़्तिख़ार वाहिद के बड़े बेटे एजाज़ वाहिद विकलांग हैं और कोई काम नहीं कर पाते हैं.

एजाज़ वाहिद ने बीबीसी को बताया कि सोमवार सुबह उन्होंने फ़ायरिंग की आवाज़ सुनी थी और बाद में लोगों ने बताया कि स्टॉक एक्सचेंज पर हमला हुआ है और कुछ लोग ज़ख़्मी हुए हैं.

एजाज़ वाहिद जब वहां पहुंचे तो सुरक्षाकर्मी ने बताया कि उनके पिता भी ज़ख़्मी हुए हैं और उन्हें सिविल अस्पताल में पहुंचाया गया है.

सिविल अस्पताल पहुंचने के बाद एजाज़ वाहिद को पता चला कि उनके पिता की मौत हो चुकी है.

एजाज़ वाहिद ने बीबीसी को बताया, ''मेरे पिता पिछले 10 साल से स्टॉक एक्सचेंज में काम कर रहे थे. उन्होंने 12 हज़ार रुपए मासिक वेतन से इस नौकरी की शुरुआत की थी. अब उनका वेतन 18 हज़ार रुपए था. वो सुबह सात बजे से शाम सात बजे तक ड्यूटी करते थे.''

इफ़्तिख़ार वाहिद के चार बच्चे हैं, जिनमें दो बेटे और दो बेटियां हैं.

एजाज़ वाहिद ने बताया कि उनके पिता ही घर में अकेले कमाने वाले थे. एजाज़ विकलांग होने के कारण कोई काम नहीं कर सकते हैं और दूसरे भाई-बहन अभी बहुत छोटे हैं.

कंपनी ने 55 से 60 साल तक की उम्र के कर्मचारियों की नौकरी ख़त्म करने का लेटर जारी कर दिया था और एक जुलाई से इफ़्तिख़ार भी रिटायर होने वाले थे.

एजाज़ के मुताबिक़ उनके पिता रिटायर होने के बाद ख़ैबर पख़्तूख़्वान में अपने पैतृक गांव में जाकर बसने की सोच रहे थे और वहीं कोई और नौकरी तलाशने की योजना बना रहे थे.

रेलवे कॉलोनी के जिस घर में इफ़्तिख़ार वाहिद अपने परिवार के साथ रहते थे, एजाज़ वाहिद के अनुसार रेलवे वाले कभी भी वो घर ख़ाली करवा सकते हैं.

इफ़्तिख़ार वाहिद की दो बेटियां हैं जिनकी शादी करवाने की ज़िम्मेदारी अब उनके बेटे एजाज़ वाहिद पर आ गई है.

एजाज़ वाहिद के मुताबिक़ उनके भाई भी अभी पढ़ रहे हैं और किसी मदद के बग़ैर ये सब अब संभव नहीं.

उनके अनुसार कंपनी से अब उन्हें कोई ख़ास मदद की उम्मीद नहीं है क्योंकि कंपनी ने तो पहले ही निकालने का फ़ैसला सुना दिया था.

इफ़्तिख़ार वाहिद ने बस कंडक्टर से अपनी नौकरी की शुरुआत की थी और उसके इलावा वो बिजली मिस्त्री का भी काम जानते थे. इफ़्तिख़ार के चाचा के अनुसार उनकी बस कंडक्टर की नौकरी भी चली गई क्योंकि उस लाइन पर बस चलनी बंद हो गई. उसके बाद उन्होंने किराए पर रिक्शा चलाना शुरू किया लेकिन उससे गुज़र बसर करना मुश्किल था.

बाद में उन्हें स्टॉक एक्सचेंज में सुरक्षा गार्ड की नौकरी मिल गई. घर से क़रीब होने के कारण उन्होंने ये नौकरी कर ली क्योंकि आने-जाने में भी कोई ख़र्च नहीं होता था.

सुरक्षा गार्ड तैनात करने वाली निजी कंपनी के एक सुपरवाइज़र ने बीबीसी को बताया कि इससे पहले कभी उनकी कंपनी ने किसी को कोई मुआवज़ा नहीं दिया है.

लेकिन कंपनी की गाड़ी में बैठे एक दूसरे इंचार्ज ने बताया कि कंपनी हर तरह की मदद करती है और वो मुआवज़ा भी देगी.

पाकिस्तान स्टॉक बोर्ड के चेयरमैन सुलैमान महदी का कहना है कि उनके सुरक्षा इंतज़ाम के कारण ये हमला नाकाम हुआ जिसमें सुरक्षाकर्मियों के साथ-साथ उनके सुरक्षागार्ड ने भी अहम रोल निभाया है.

नेशनल ट्रेड यूनियन फ़ेडरेशन के महासचिव नासिर मंसूर का कहना है कि ''निजी सुरक्षा कंपनियों के मालिक कर्मचारियों का शोषण करते हैं. ये रिटायर्ड अधिकारी अपनी पुरानी संस्थाओं का नाम इस्तेमाल कर रहे हैं.''

इफ़्तिख़ार वाहिद सोमवार की सुबह जब घर से निकले थे तो उनके बच्चे सो रहे थे इसलिए वो उन्हें देख नहीं सके थे.

दोपहर तीन बजे के क़रीब उनकी गली में एम्बुलेंस इफ़्तिख़ार वाहिद की लाश लेकर आई, उन चंद घंटों में उस घराने की दुनिया ही बदल चुकी थी.

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