बेलारूस में राष्ट्रपति को चुनौती देने वाली स्वेतलाना और उनकी तिकड़ी

बेलारूस

इमेज स्रोत, Valery Sharifulin/Getty Images

चुनाव में हुए कथित धांधली को लेकर बेलारूस की सड़कों पर ज़ोरदार प्रदर्शन हो रहे हैं. प्रदर्शनकारी रविवार 9 अगस्त को हुए चुनावों में कथित अनियमतता को लेकर नाराज़ हैं और राजधानी मिंस्क के मध्य इलाक़ों में 'मार्च फॉर फ्रीडम' यानी आज़ादी मार्च निकाल रहे हैं.

प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि राष्ट्रपति अलेग्जेंडर लुकाशेंको ने धोखे से चुनाव जीता है. उन्हें चुनाव में अस्सी फीसदी वोट हासिल हुए हैं, वहीं उनकी मुख्य प्रतिद्वंदी स्वेतलाना तिख़ानोव्सक्या को सिर्फ़ 10 फ़ीसदी वोट हासिल हुए हैं. स्वेतलाना का आरोप है कि जिन इलाक़ों में गिनती सही से हुई है वहां उन्होंने 60 से 70 फ़ीसदी तक मत हासिल किए हैं.

लुकाशेंको क़रीब 26 सालों से बेलारूस की सत्ता पर काबिज़ हैं और 1994 के बाद से किसी चुनाव में उनकी हार नहीं हुई है. इससे पहले सरकारी टीवी चैनल पर प्रसारित हुए चुनावी एग्ज़िट पोल में दिखाया गया था कि लुकाशेंको ने लगभग 80 प्रतिशत वोट हासिल किए हैं और वे देश के सभी ज़िलों में जीत रहे हैं. जबकि मुख्य विपक्षी उम्मीदवार स्वेतलाना तिख़ानोव्सक्या को सिर्फ़ सात फीसदी वोट मिले हैं.

इन आकड़ों के बारे में नौ अगस्त को हुई प्रेस वार्ता में स्वेतलाना ने कहा था कि उन्हें इन आंकड़ों पर बिल्कुल विश्वास नहीं हो रहा. उन्होंने कहा, "मुझे अपनी आँखों पर विश्वास है और मैं देख सकती हूँ कि बहुमत हमारे साथ है."

राष्ट्रपति लुकाशेंको स्वेतलाना को एक 'छोटी बच्ची' बताते हुए, अब तक सभी आरोपों को ख़ारिज करते रहे हैं. लुकाशेंको कहते हैं कि स्वेतलाना को 'विदेशों से ताक़त' मिलती है और वो 'कठपुतली' के तौर पर काम कर रही हैं.

राष्ट्रपति लुकाशेंको को रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का साथ मिलता रहा है.

इमेज स्रोत, MIKHAIL METZEL/GETTY IMAGES

कौन हैं स्वेतलाना तिख़ानोव्सक्या?

37 वर्षीय स्वेतलाना ने अपने जेल में बंद पति सर्गेई तिख़ानोव्सक्या के स्थान पर चुनाव लड़ा है. उनके पति को उम्मीदवार के तौर पर खड़ा होने से रोक दिया गया था.

सर्गेई एक यूट्यूबर रहे हैं और उन्होंने देश के विकास से जुड़े कई वीडियोज़ बनाए हैं. वीडियो बनाने के लिए उन्होंने पूरे बेलारूस का दौरा किया और लोगों से बात की. उन्होंने इन वीडियोज़ को अपने चैनल 'अ कंट्री फ़ॉर लाइफ़' पर पोस्ट किए हैं.

अपने वीडियोज़ में उन्होंने देश में मौजूद अपार संभावनाओं, तानाशाही के चलते देश को हुए नुक़सान, भ्रष्टाचार और सुधारों के अभाव का जिक्र किया.

जब उनके टैनल के फॉलोअर्स की संख्या बड़े पैमाने पर बढ़ी तो उन पर अधिकारियों का ध्यान गया और उन्हें जेल में डाल दिया गया. बाद में उन्हें चुनाव लड़ने से रोक दिया गया.

इमेज स्रोत, Natalia Fedosenko/Getty Images

स्वेतलाना नहीं चाहती थीं राजनीति में आना

छोड़कर पॉडकास्ट आगे बढ़ें
पॉडकास्ट
बात सरहद पार

दो देश,दो शख़्सियतें और ढेर सारी बातें. आज़ादी और बँटवारे के 75 साल. सीमा पार संवाद.

बात सरहद पार

समाप्त

इसके बाद सर्गेई की पत्नी स्वेतलाना ने चुनाव में विपक्ष की बागडोर अपने हाथों में ली. उन्हें इससे पहले राजनीति का कोई अनुभव नहीं रहा है. वो अंग्रेजी की शिक्षिका रही हैं और दो बच्चों की मां हैं. हालांकि उन्होंने सुरक्षा कारणों से अपने दोनों बच्चों को देश से बाहर भेज दिया है.

स्वेतलाना ने अपने चुनाव अभियान के दौरान कहा था कि बेलारूस में राष्ट्रपति लुकाशेंको के 26 साल की सत्ता को चुनौती देना किसी 'मिशन' की तरह था जिससे वो इंकार नहीं कर सकी. राष्ट्रपति लुकाशेंको को चुनौती देने वाले एक दूसरे अहम प्रतिद्वंदी की जेल में ही मौत हो गई तो तीसरा देश छोड़ कर भाग गया.

ऐसे वक्त में स्वेतलाना ने विपक्ष की बागडोर अपने हाथों में लेकर राष्ट्रपति लुकाशेंको के सामने चुनौती पेश की है.

अपने बारे में स्वेतलाना कहती हैं कि वे रैलियों में बोलने की बजाय अपने बच्चों को खाना खिलाना ज्यादा पसंद करती हैं, लेकिन उनके पास कोई विकल्प नहीं बचा था. जब उनके पति को जेल में डाल दिया गया तो उन्होंने लुकाशेंको को चुनाव को चुनौती देने के उनके मिशन को अपने हाथों में ले लिया.

इमेज स्रोत, TATYANA ZENKOVICH

स्वेतलाना का चुनाव प्रचार

जुलाई में उनकी इस मुहिम में उनके साथ दो और महिलाएं भी जुड़ गईं. ये थीं वेरोनिका सेप्कालो जो कि चुनाव में उतरने वाले एक उम्मीदवार की पत्नी थीं और मारिया कोलेस्निकोवा जो एक अन्य उम्मीदवार की की कैंपेन मैनेजर थीं.

चुनाव प्रचार के दौरान देश भर में इन तीनों महिलाओं की रैलियों में खूब भीड़ इकट्टा हुई.

वेरोनिका सेप्कालो के पति वैलेरे सेप्कालो अमरीका में देश के पूर्व राजदूत रह चुके हैं. राष्ट्रपति चुनाव के लिए उनकी भी उम्मीदवारी खारिज की जा चुकी थी.

वो कहते हैं, "ये महिलाएँ मार्गरेट थैचर की तरह नहीं हैं जो ज़िंदगी भर राजनीति में ही रही. लेकिन वो बहुत लगनशील हैं."

बीबीसी से उन्होंने कहा कि उन्हें बेलारूस छोड़ना पड़ा क्योंकि उन्हें कई स्रोतों से पता चला था कि उनकी गिरफ्तारी कभी भी हो सकती है. वो कहते हैं, "पिछले चुनाव में लुकाशेंको को जनता का समर्थन हासिल था लेकिन इस साल वो समर्थन बिल्कुल ग़ायब हो चुका है इसलिए वो घबराए हुए हैं."

इमेज स्रोत, Valery Sharifulin/Getty Images

चुनाव के बाद स्वेतलाना की अपील

चुनाव के बाद एक भावुक वीडियो में स्वेतलाना ने अपने समर्थकों से कहा था कि उन्होंने अपनी ताकत को बढ़चढ़ कर आंका था. वोटिंग के अगले दिन स्वेतलाना गायब हो गईं थीं.

तब लिथुआनिया के विदेश मंत्री ने ट्वीट कर बताया था कि वे उनके देश में सुरक्षित हैं और अपने बच्चों के साथ हैं.

उन्होंने बाद में एक कोर्डिनेटिंग काउंसिल का प्रस्ताव दिया जिसके हाथ में वो अपनी जिम्मेदारी सौंप सके. इसमें सामाजिक कार्यकर्ता, बेलारूस के गणमान्य नागरिक और पेशेवरों को शामिल करने का प्रस्ताव रखा गया था.

लेकिन 17 अगस्त को लिथुआनिया से जारी किए गए नए वीडियो में स्वेतलाना ने कहा कि वो बेलारूस का नेतृत्व करने को तैयार हैं और नए सिरे से चुनाव कराने की मांग करती हैं.

यह भी पढ़ें-

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)