पाकिस्तान का कोरोना ग्राफ़ भारत से इतना अलग कैसे?

  • सरोज सिंह
  • बीबीसी दिल्ली
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ख़राब स्वास्थ्य व्यवस्था, बड़ी आबादी और ग़रीब परिवार जो छोटी जगह पर एक साथ रहने को मजबूर हैं - पाकिस्तान के सामने भी कोरोना संक्रमण की शुरुआत में ये तमाम चुनौतियाँ थी. जून का महीना आते-आते वहाँ भी इस तरह की ख़बरें आनी शुरू हो गईं कि अस्पतालों में बिस्तर की कमी हो रही है, आईसीयू में जगह नहीं बची है और अस्पताल में बेड की तलाश में परिवार वाले अस्पतालों के चक्कर लगा रहे हैं.

लेकिन अगस्त आते-आते पाकिस्तान का कोरोना ग्राफ़ पहले के मुक़ाबले थोड़ा संभलता नज़र आ रहा है. आँकड़ो की बात करें तो बुधवार सुबह तक पाकिस्तान में कोरोना के कुल 2 लाख 94 हज़ार मामले सामने आएं हैं, जिनमें से 2 लाख 78 हज़ार ठीक हो चुके हैं. पाकिस्तान सरकार की वेबसाइट के मुताबिक़ कोरोना की वजह से मरने वालों की संख्या 6267 है.

दूसरी तरफ़ भारत है, जहाँ कोरोना के मामलों में हर रोज़ हज़ारों की संख्या में बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है. बुधवार सुबह के आँकड़ों की बात करें तो भारत में कुल कोरोना के मरीज़ 32 लाख के आसपास हैं. जिनमें से एक्टिव केस सात लाख हैं. वहीं संक्रमण से मरने वालों की तादाद 59 हज़ार पार है.

इन्हीं आँकड़ों के आधार पर कहा जा रहा है कि पाकिस्तान का कोरोना ग्राफ़ भारत से बेहतर है और पाकिस्तान ने कोरोना पर क़ाबू पा लिया है.

क्या वाक़ई ये आँकड़ें सही तस्वीर पेश कर रहे हैं? क्या केवल इन आँकड़ो के आधार पर इस तरह के निष्कर्ष पर पहुँचा जा सकता है?

पाकिस्तान में कोरोना मरीज़ों की टेस्टिंग

दरअसल पाकिस्तान में टेस्टिंग की संख्या बहुत कम है और दिन प्रतिदिन ये बढ़ने के बजाए घटती ही जा रही है. इसका असर पॉज़िटिव आने वाले केसों की संख्या पर दिखाई देगा.

ठीक उसी तरह से अस्पतालों में कोरोना के इलाज के लिए दाख़िल होने वालों की संख्या भी कम हो रही है.

पाकिस्तान में अपने चरम पर तक़रीबन 30 हज़ार टेस्ट रोज़ाना किए जा रहे थे. लेकिन, जून के आख़िरी हफ़्ते में इसमें गिरावट आने लगी. अब पाकिस्तान में बिना लक्षण वाले किसी भी शख्स की टेस्टिंग नहीं की जा रही है.

पाकिस्तान में प्रति मिलियन कुल टेस्ट 1400 हो रहे हैं वहीं भारत में प्रति मिलियन कुल टेस्ट 3700 हो रहे हैं.

वायरोलॉजिस्ट डॉ. शाहिद जमील कहते हैं कि विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक़ 20 टेस्ट करने पर अगर एक पॉज़िटिव केस मिले तब माना जा सकता है कि कोरोना कंट्रोल में है.

फ़िलहाल पाकिस्तान में आठ टेस्ट करने पर एक पॉज़िटिव केस सामने आ रहा है, जबकि भारत में 11 टेस्ट करने पर एक पॉज़िटिव मामला सामने आ रहा है.

पाकिस्तान ने अब तक कुल 20 लाख टेस्ट किए हैं, जबकि भारत ने अब तक तीन करोड़ 76 लाख टेस्ट तक किए हैं. डॉक्टर जमील के मुताबिक़ पाकिस्तान के कोरोना ग्राफ़ क़ाबू में दिखने की एक वजह ये हो सकती है.

मौत के आँकड़ों पर सवाल

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दूसरी वजह मौत के आँकड़ो से जुड़ा हो सकता है.

बीबीसी उर्दू द्वारा हासिल किए गए आँकड़ो के मुताबिक़ पाकिस्तान के दो बड़े शहर कराची और लाहौर में क़ब्रिस्तान में दफ़नाए जाने वालों की संख्या में इस साल जून में काफ़ी बढ़ोतरी हुई है. हालाँकि इसे सीधे कोरोना से जोड़ कर नहीं देखा जा सकता.

लाहौर के सबसे बड़े क़ब्रिस्तान, मियानी साहेब में जून 2020 में 1176 लाशों को दफ़नाया गया जबकि जून 2019 में 696 लोग दफ़नाए गए थे, जिसमें से केवल 48 मौतें ही कोरोना की वजह से हुई ऐसा बताया गया.

जानकार मानते हैं कि ज़्यादा मौतों के पीछे कई कारण हो सकते हैं. मसलन कुछ मौतें कोरोना की वजह से हुई हों, लेकिन समय रहते बीमारी का पता नहीं चला, कुछ मौतें दूसरी बीमारियों की वजह से हो सकती हैं जिनको कोरोना के दबाव में सही समय पर अस्पताल में इलाज नहीं मिला हो.

कराची शहर के क़ब्रिस्तान से भी जो आँकड़े मिले हैं वो भी पिछले साल के मुक़ाबले ज़्यादा मौतों दिखाती हैं. हालाँकि अगस्त के आँकड़े बताते हैं कि बीमारी से मरने वालों की संख्या में कमी आ रही है, लेकिन ये अब भी इतनी भी कम नहीं जितनी आधिकारिक आँकड़ों में दिखाई जा रही है.

भारत में भी मौत के आँकड़ो पर कई जानकार सवाल खड़े करते रहे हैं और पिछले दिनों कई ऐसी ख़बरें सामने आईं जहाँ शमशान घाट के आँकड़े और राज्य सरकार के आँकड़े मेल खाते नज़र नहीं आए.

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पाकिस्तान के जाने माने महामारी रोग विशेषज्ञ डॉक्टर राणा जावेद असग़र कम मौतों के पीछे की वजह युवा आबादी को मानते हैं. उनके मुताबिक़ पाकिस्तान में लोगों की औसत उम्र 22 साल है, जो ब्रिटेन या दूसरे पश्चिमी देशों के मुक़ाबले बहुत कम है. ब्रिटेन की बात करें तो वहाँ के आबादी की औसत उम्र 41 वर्ष है.

ये एक साबित तथ्य है कि कोरोना संक्रमण से ज़्यादातर मौतें दुनियाभर में बुज़ुर्गों में ही हुई है.

डॉक्टर असग़र के मुताबिक़ पाकिस्तान में केवल चार फ़ीसद जनता की उम्र 65 साल से ज्यादा है, जबकि अधिकतर विकसित देशों में बुज़ुर्ग आबादी 20-25 फ़ीसद के आसपास होती है.

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भारत के मुक़ाबले पाकिस्तान बेहतर है क्या?

भारत में भी मौत के आँकड़ें कुल कोरोना मरीज़ों की तुलना में कम बताए जाते हैं. भारत सरकार इसी बात पर अपनी पीठ थपथपाती है. लेकिन भारत में ये आँकड़ें पाकिस्तान की तुलना में फिर भी ज़्यादा हैं.

जॉन हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी के डेटा के मुताबिक़ पाकिस्तान में प्रति एक लाख की जनसंख्या में मौत का आँकड़ा 2.97 है, जबकि भारत के लिए ये आँकड़ा 4.32 है.

इसके अलावा डॉक्टर असग़र कहते हैं कि छोटे सोशल सर्कल, मौसम और दूसरी बीमारियों के एक्पोजर की वजह से भी कोरोना संक्रमण पाकिस्तान में कम घातक साबित हुआ है. हालाँकि इन में से कुछ थ्योरी ऐसी हैं जिनमें अभी वैज्ञानिकों को और शोध करने की आवश्यकता है.

पाकिस्तान ने उठाए कौन से क़दम

पाकिस्तान ने भारत की तरह पूर्ण लॉकडाउन नहीं लगाया. वहाँ चुनिंदा शहरों में स्मार्ट लॉकडाउन लगाया गया जहाँ जहाँ कोरोना के मामले ज़्यादा सामने आए. लेकिन उनका पालन हो रहा है या नहीं ये जनता पर ही छोड़ दिया गया.

पाँच महीन बंद रखने के बाद नौ अगस्त से अंतरराष्ट्रीय उड़ानें भी शुरू हो चुकीं हैं. स्कूल और कॉलेज फ़िलहाल बंद हैं, लेकिन सिनेमा घर में फ़िल्में देखने जाने पर कोई पाबंदी नहीं. होटल और रेस्तरां भी अगस्त में खुल चुके हैं.

लंदन स्कूल ऑफ़ हाइजीन एंड ट्रोपिकल मेडिसिन में सोशल एपिडिमियोलॉजिस्ट डॉक्टर मिशाल ख़ान ने बीबीसी को बताया कि पाकिस्तान के लोगों में कोरोना को लेकर 'ज़्यादा जागरूकता' है. पर यही बात 'सही तस्वीर' पेश नहीं करती.

वो आगे कहती हैं, जनसंख्या वितरण, जलवायु और समाजिक ताने-बाने की वजह से पश्चिम देशों की तुलना में पाकिस्तान का कोरोना के मामले में बेहतर प्रदर्शन तो फिर भी समझ आता है, लेकिन ये बात 'अभी तक स्पष्ट' नहीं कि भारत की तुलना में वहाँ कोरोना के मामले कम कैसे?

पब्लिक हेल्थ फ़ाउंडेशन ऑफ़ इंडिया के डॉक्टर के श्रीनाथ रेड्डी कहते हैं कि भारत में आबादी का घनत्व कई इलाक़ों में पाकिस्तान के मुक़ाबले ज़्यादा है, ये भी एक वजह हो सकती है. उनके मुताबिक़ फ़िलहाल भारत में दिल्ली और मुंबई जैसे शहरों में अब रोज़ाना कम मामले सामने आ रहे हैं, लेकिन कुछ हिस्सों में अब भी ये चिंता का कारण बने हुए हैं.

डॉक्टर असग़र के मुताबिक़ भारत पाकिस्तान के आँकड़ो की तुलना करना फ़िलहाल जल्दबाज़ी है. उनका मानना है कि पाकिस्तान में पीक आना अभी बाक़ी है. पाकिस्तान के कराची शहर के एक सर्वे में पाया गया है कि 17.5 फ़ीसद आबादी कोरोनो संक्रमित हो चुकी है. इसका मतलब ये है कि अभी और भी बड़ी आबादी को ये संक्रमण हो सकता है.

पाकिस्तान में जैसे-जैसे सरकार आवाजाही में रियायतें दे रही है, वैसे-वैसे लोग बड़े शहरों से ग्रामीण इलाक़ों की तरफ़ ज़्यादा जा रहे हैं. ऐसे में ग्रामीण इलाक़ों में कोरोना का ख़तरा आने वाले दिनों में बढ़ सकता है, जहाँ कॉन्टेक्ट ट्रेसिंग और स्वास्थ्य व्यवस्था की हालत ज्यादा ख़राब है.

डॉक्टर असग़र के मुताबिक़ पाकिस्तान को कॉन्टेक्ट ट्रेसिंग को और बेहतर करने की ज़रूरत है. पाकिस्तान ने अब तक कोरोना के मामले में बेहतर किया है इसका ये मतलब क़त्तई नहीं है कि पाकिस्तान कोरोना के ख़तरे से बाहर निकल गया है.

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