चीन ने आर्थिक मोर्चे पर भारत और अमरीका को कैसे पीछे छोड़ा

  • गुरप्रीत सैनी
  • बीबीसी संवाददाता
चीन

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सोमवार को जब भारत के मौजूदा वित्त वर्ष की पहली तिमाही के जीडीपी के आँकड़े आए, तो अर्थव्यवस्था को लेकर चिंता सच साबित हुई. अप्रैल से जून के बीच विकास दर में 23.9 फ़ीसदी की गिरावट दर्ज की गई.

अर्थव्यवस्था के सभी प्रमुख क्षेत्रों की ग्रोथ निगेटिव रही और कंस्ट्रक्शन, मैन्युफ़ैक्चरिंग सेक्टर का बुरा हाल देखने को मिला. भारत में जीडीपी के इन नए आँकड़ों को क़रीब 24 साल बाद ऐतिहासिक रूप से सबसे बड़ी गिरावट बताया गया है.

हालाँकि ये भी ध्यान देने वाली बात है कि जीडीपी के ये आँकड़े कोरोना वायरस को नियंत्रित करने के लिए लगाए गए लॉकडाउन के शुरुआती महीनों के हैं.

लेकिन चिंता की बात ये है कि दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में भारत की जीडीपी में सबसे ज़्यादा गिरावट आई है. कहने का मतलब ये कि महामारी ने सभी देशों की अर्थव्यवस्था को नुक़सान पहुँचाया, लेकिन भारत की हालत कुछ ज़्यादा ख़राब दिख रही है.

महामारी से सबसे ज़्यादा प्रभावित अमरीका की स्थिति भारत से कुछ बेहतर है. वहाँ जीडीपी दर -10.6 रही, वहीं जर्मनी की -11.9, इटली की -17.1, फ्रांस की -18.9, ब्रिटेन की -22.1 और स्पेन की जीडीपी भारत के सबसे नज़दीक यानी -22.7 प्रतिशत रही.

लेकिन चीन की विकास दर सकारात्मक

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लेकिन आर्थिक संकट के इस दौर में चीन की विकास दर सकारात्मक रही है. यानी चीन पहली बड़ी अर्थव्यवस्था है, जो महामारी के प्रकोप के बावजूद बढ़ रही है.

चीन का दावा है कि इसी अवधि यानी अप्रैल से जून की तिमाही में उसकी जीडीपी ग्रोथ 3.2 फ़ीसदी रही है. चीन ने अपनी इस तिमाही के आँकड़े जुलाई के मध्य में ही जारी कर दिए थे.

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आँकड़ों के मुताबिक़ चीन के फ़ैक्टरी आउटपुट में 4.4% की बढ़त दर्ज की गई. ऑनलाइन रिटेल सेल में 14.3 प्रतिशत की बढ़त देखी गई. हालाँकि रिटेल सेल में 3.9% की कमी आई. वहीं एक्सपोर्ट में भी 0.4% की वृद्धि दर्ज की गई.

चीन में जीडीपी के सकारात्मक आँकड़ों को देखने के बाद पहला सवाल यही आता है कि चीन ने ये कैसे किया? जब तमाम बड़ी अर्थव्यवस्थाएँ कोरोना महामारी के आगे परेशान हैं, तो चीन की अर्थव्यवस्था कैसे अच्छा प्रदर्शन कर रही है?

कोरोना वायरस महामारी की शुरुआत चीन से ही हुई थी. वहाँ दिसंबर में इस महामारी की शुरुआत हुई. चीन शटडाउन करने वाली और रिकवरी की प्रक्रिया शुरू करने वाली पहली अर्थव्यवस्था थी.

मार्च के बाद रिकवरी शुरू की

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चीन ने मार्च के अंत से रिकवरी की प्रक्रिया शुरू कर दी थी, जब वहाँ की सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी ने घोषणा की थी कि बीमारी अब नियंत्रण में हैं. जिसके बाद वहाँ लॉकडाउन हटा लिए गए थे. साथ ही फ़ैक्टरियाँ और स्टोर्स दोबारा खोल दिए गए थे.

जब दुनिया कोरोना वायरस से जंग लड़ रही थी, तब चीन की सरकार ने 24 मार्च को घोषणा की थी कि 8 अप्रैल से कोरोना महामारी का केंद्र रहे वुहान में आंशिक रूप से लॉकडाउन हटाया जाएगा.

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जबकि वुहान को छोड़कर हूबे प्रांत के अन्य हिस्सों में यात्रा प्रतिबंध को 24 मार्च की आधी रात से ही हटा दिया गया था. जब चीन में प्रतिबंध हटाए जा रहे थे, तब तक ये वायरस दुनिया के 186 देशों में फैल चुका था.

हालाँकि ये ध्यान रखने वाली बात है कि वुहान को जनवरी के मध्य में सील किया गया था. जिसकी वजह से जनवरी से मार्च तक की तिमाही में चीन की जीडीपी विकास दर में 6.8% की गिरावट आई थी. 1960 के मध्य के बाद से चीन का ये सबसे ख़राब प्रदर्शन था.

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चीन पर भारी पड़ रहा है कोरोना वायरस

लेकिन प्रतिबंधों में ढील के बाद चीन की अर्थव्यवस्था में नाटकीय रूप से बेहतरी आई. राष्ट्रीय सांख्यिकी ब्यूरो ने एक बयान में कहा, "देश की अर्थव्यवस्था की गति 2020 की पहली छमाही में कम होने के बाद दोबारा बढ़ गई."

हालाँकि 1990 की शुरुआत से यानी जबसे चीन ने तिमाही वृद्धि के आँकड़े रिपोर्ट करना शुरू किया है, तब से अब तक का चीन का ये (अप्रैल से जून तिमाही का जीडीपी आँकड़ा) सबसे कमज़ोर आँकड़ा है.

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2020 की दूसरी तिमाही में चीनी इकॉनमी 3.2% की दर से बढ़ी है.

अप्रैल से जून की तिमाही के जीडीपी आँकड़े जारी होने के बाद अर्थशास्त्रियों ने कहा कि चीन की अर्थव्यवस्था का ये सुधार आगे जारी रहेगा. जेपी मॉर्गेन असेट मैनेजमेंट के मार्सेला चाउ ने कहा, "हम अगली तिमाहियों में निरंतर सुधार देखने की उम्मीद करते हैं."

इन्वेस्टमेंट बैंक एचएसबीसी ने अनुमान लगाया है कि चीन की अर्थव्यवस्था अगली तिमाही में 5.4% से बढ़ेगी और उसकी अगली तिमाही में 6.2 प्रतिशत से. जिससे चीन की ग्रोथ प्री-कोविड स्तर पर वापसी करेगी.

अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए क़दम

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अर्थशास्त्रियों ने कहा कि चीन कुछ अन्य बड़ी अर्थव्यवस्थाओं से ज़्यादा तेज़ी से रिकवर कर सकता है, क्योंकि चीन की सरकार ने बहुत कड़े क़दम उठाए हैं. प्रतिबंध हटाए जाने के बाद चीन में कई दिन तक एक भी मामला रिपोर्ट नहीं किया गया.

जब कभी मामले आने लगे और बढ़ने लगे, तो चीन ने तुरंत क़दम उठाकर कोरोना को फिर से नियंत्रित करने का दावा किया है. यहाँ तक की एक बार वुहान की पूरी आबादी का चंद दिनों में टेस्ट कराने की बात भी कही गई. हालांकि ठंड के मौसम के साथ वहाँ फिर से मामले बढ़ने की ख़बरें आई हैं.

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लेकिन आर्थिक गतिविधियाँ चल रही हैं. पूरे चीन में रेस्तरां और जिम फिर से व्यस्त हैं. सबवे कारों और हवाई अड्डे के डिपार्चर लाउंज भरे हुए हैं.

चीनी सरकार ने अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए कई क़दम उठाने की बात कही. जिसमें राजकोषीय ख़र्च और बैंकों की रिज़र्व रिक्वायरमेंट में कटौती शामिल है.

चीन की आत्मनिर्भर बनने की रणनीति

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चीन ने नई आर्थिक रणनीति भी अपनाई है. राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने मई में "डुअल सर्कुलेशन" इकोनॉमिक मॉडल को इंट्रोड्यूस किया था.

चीन की ये नई रणनीति कहती है कि देश एक्सपोर्ट के लिए घरेलू उत्पादन का विस्तार जारी रखे (इंटरनेशनल सर्कुलेशन), लेकिन इसके साथ ही अर्थव्यवस्था का रुख़ बदलते हुए घरेलू खपत के लिए उत्पादन पर ज़्यादा ज़ोर दिया जाए (इंटर्नल सर्कुलेशन).

यानी केंद्र में घरेलू बाज़ार रहे और इसके साथ-साथ घरेलू और विदेशी बाज़ार एक दूसरे को मज़बूत करते रहें.

वैसे तो चीन दुनिया का लो-कॉस्ट मैन्युफ़ैक्चरिंग हब रहा है. वो एक्सपोर्ट पावरहाउस रहा है, जिसने अमरीका, यूरोप और जापान जैसे ज़्यादा खपत करने वाले बाज़ारों तक अपनी पहुँच बनाई. चीन को वैश्विक अर्थव्यवस्था के ग्लोबलाइज़ेशन का प्रमुख लाभार्थी कहा जाता है.

लेकिन हाल के वक़्त में चीन और अमरीका में ट्रेड वॉर बढ़ा है और यूरोप और जापान के साथ आर्थिक रिश्तों में भी फर्क आया है. पश्चिम में संरक्षणवादी भावनाओं में बढ़ोतरी देखी गई है.

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कोविड-19 की महामारी ने इस स्थिति को और चिंताजनक किया है और ग्लोबलाइज़ेशन को भी झटका पहुँचा है. भारत में भी आत्मनिर्भर बनने की कोशिशें हो रही हैं. वैसे ही चीन ने भी डुअल सर्कुलेशन के साथ आत्मनिर्भर आर्थिक रणनीति अपनाई है.

विशेषज्ञों का कहना है कि ये कोई नई रणनीति नहीं है. चीनी नेता मांग करते रहे हैं कि निवेश और एक्सपोर्ट-लेड ग्रोथ स्ट्रेटेजी से घरेलू खपत और सेवाओं पर आधिकारित आर्थिक रणनीति की ओर शिफ़्ट हुआ जाए.

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मौजूदा वित्तीय वर्ष की पहली तिमाही में ऐतिहासिक गिरावट

भारत के पूर्व विदेश सचिव श्याम सरन ने इंडियन एक्सप्रेस में लिखा है कि चीन ने इस मामले में प्रगति भी की है. जीडीपी में आज खपत 56 प्रतिशत बढ़ी है, जो एक दशक पहले क़रीब 35 प्रतिशत थी. वहीं एक्सपोर्ट, 2007 में जीडीपी का 36 प्रतिशत हिस्सा था लेकिन 2019 में घटकर 18 प्रतिशत रह गया.

हालांकि चीन की पीकिंग यूनिवर्सिटी में आर्थशास्त्र के प्रोफेसर माइकल पेटिस फ़ाइनेंशियल टाइम्स में लिखते हैं कि डुअल सर्कुलेशन को लागू करने में समस्याएँ भी हैं. एक तो इसके लिए चीन को आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक ट्रांसफोर्मेशन करना होगा. दूसरा इंटरनल सर्कुलेशन को सफल बनाने के लिए इंटरनेशनल सर्कुलेशन को कम महत्व देना होगा. दोनों एक साथ नहीं चल सकते.

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रॉयटर्स के मुताबिक़, दक्षिण पश्चिमी चीन में बाढ़ की वजह से उत्पादन पर असर पड़ा और अगस्त में चीनी उद्योगों की गतिविधियाँ धीमी रहीं. लेकिन सर्विस सेक्टर में मज़बूती ने चीनी की रिकवरी की उम्मीदों को बनाए रखा.

चीन के आधिकारिक मैन्युफ़ैक्चरिंग परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (पीएमआई) ने सोमवार को अगस्त के लिए अपने आँकड़े जारी किए. जिनमें कुछ गिरावट ज़रूर दर्ज की गई है. जुलाई के 51.1 से गिरकर अगस्त में ये आँकड़ा 51 पर पहुँच गया. हालांकि ये 50 प्वॉइंट मार्क के ऊपर ही रहा, जो ग्रोथ को कॉन्ट्रैक्शन से अलग करता है.

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ख़राब अर्थव्यवस्था वाले देशों में जान बचाना भी मुश्किल हो रहा है.

रॉयटर्स के मुताबिक़, दक्षिणपश्चिम चीन में बाढ़ की वजह से फ़ैक्टरियों का उत्पादन प्रभावित हुआ है. लेकिन सर्विस सेक्टर में मज़बूती आई है.

चीन के आधिकारिक जीडीपी आँकड़े दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था की सेहत की जानकारी देते हैं, लेकिन कई बाहरी विशेषज्ञों ने चीन की रिपोर्टों की सत्यता पर लंबे समय तक संदेह व्यक्त किया है.

हालाँकि विश्व बैंक के अर्थशास्त्रियों समेत कई अन्य ने चीन के लिए अपने अनुमान को बढ़ा दिया है और माना जा रहा है कि चीन इस साल बढ़ने वाली एक मात्र बड़ी अर्थव्यवस्था होगी.

अमरीका के और क़रीब पहुँची चीनी अर्थव्यवस्था

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बात सरहद पार

दो देश,दो शख़्सियतें और ढेर सारी बातें. आज़ादी और बँटवारे के 75 साल. सीमा पार संवाद.

बात सरहद पार

समाप्त

हाल में 24 अगस्त को अमरीका के प्रमुख अख़बार द वॉल स्ट्रीट जनरल में एक लेख छपा था, जिसमें लिखा गया था कि जिस वक़्त दुनिया कोरोना वायरस को नियंत्रित करने के लिए संघर्ष कर रही है, उस वक़्त चीन की अर्थव्यवस्था सामान्य होने की राह पर है.

लेख में ये भी लिखा गया है कि पहले नंबर की अमरीका की अर्थव्यवस्था और दूसरे नंबर की चीन की अर्थव्यवस्था में जो गैप है, वो भी कम हो रहा है. अनुमान है कि अमरीका की अर्थव्यवस्था 2020 में सिकुड़कर 8.0% तक आ सकती है.

फ़ाइनेंशियल सर्विसेस ग्रुप के बिल एडम ने एक रिपोर्ट में कहा था कि "महामारी विनर और लूज़र बना रही है."

हालाँकि चीन सांख्यिकीय ब्यूरो ने ख़तरों की बात भी मानी है.

ब्यूरो ने एक प्रेस रिलीज़ में कहा कि विश्व में महामारी लगातार फैल रही है. इस महामारी का वैश्विक अर्थव्यवस्था पर बड़ा असर हो रहा है. बाहरी जोखिम और चुनौतियों के चलते देश की आर्थिक रिकवरी पर अब भी दबाव में है.

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