ग्रीस: शरणार्थी शिविर में लगी आग, 13,000 लोगों के लिए ठिकाना खोज रही सरकार

मोरिया में प्रवासी शिविर

इमेज स्रोत, REUTERS/Alkis Konstantinidis

ग्रीस के लेसबॉस द्वीप पर बने प्रवासी शिविर में आग लगने के बाद सरकार अब इन कैंपों में रहने वाले हज़ारों प्रवासियों के लिए रहने का ठिकाना खोज रही है.

मंगलवार को लेसबॉस के मोरिया कैम्प में आग लग गई थी जिससे कैम्प का बड़ा हिस्सा तबाह हो गया था.

इसके बाद बुधवार को लगी एक और आग ने रही सही कसर पूरी कर दी और पहले हुए हादसे में बचे प्रवासियों के टेंटों को नष्ट कर दिया.

ग्रीस के अधिकारियों के अनुसार इस शिविर में क़रीब 13,000 प्रवासी रहते थे, जिन्हें अब अस्थाई रूप से आसपास के बंदरगाहों पर खड़े जहाज़ों में या फिर टेंटों में रखा जा रहा है. लेसबॉस से प्रवासियों के 400 बच्चों को ग्रीस भी लाया गया है.

हालांकि प्रवासी मामलों के देश के मंत्री नॉटिस मिताराची ने बीबीसी को बताया है सरकार मोरिया कैम्प के नज़दीक ही प्रवासियों के लिए रहने की आपातकालीन व्यवस्था कर रही है लेकिन हो सकता है कि दो हज़ार प्रवासियों की व्यवस्था करने में मुश्किल हो.

इमेज स्रोत, EPA/ORESTIS PANAGIOTOU

नॉटिस मिताराची ने कहा, "रात तक या सवेरे तक सभी लोगों के लिए टेंट की व्यवस्था कर दी जाएगी. जो लोग और परिवार कमज़ोर स्थिति में हैं उन्हें मेटिलीन बंदरगाह के पास जह़ाजों पर रखा जाएगा."

उनका कहना है कि आग लगने के हादसे में अब तक किसी के हताहत होने की ख़बर नहीं है और कुछ लोगों ने मोरिया कैम्प के नज़दीक सुरक्षित स्थानों पर लौटने लगे हैं.

इमेज स्रोत, REUTERS/Alkis Konstantinidis

मोरिया कैम्प में क्या हुआ?

स्थानीय अग्निशमन अधिकारी कॉन्सटैटिनोज़ थियोफिलोपोलस ने स्थानीय टेलीविज़न चैनल ईआरटी को बताया है कि कैम्प में आग लगने के तीन अलग-अलग हादसे हुए हैं. तेज़ हवा के कारण आग तेज़ी से फैली और बुधवार सवेरे तक ही आग को बुझाया जा सका.

उनका कहना है कि आग बुझाने के लिए अग्निशमन विभाग के 20 कार्यकर्ताओं, 10 गाड़ियों समेत एक हेलीकॉप्टर को भेजा गया था. आग बुझाने की कोशिशों का कुछ प्रवासियों ने विरोध भी किया था.

मोरिया कैम्प में आग लगने की घटना से पहले 35 लोगों के कोरोना पॉज़िटिव होने की ख़बर आई थी. इससे पहले सोमालिया से आए एक प्रवासी के कोरोना पॉज़िटिव पाए जाने के बाद ग्रीस के अधिकारियों ने उन्हें क्वारंटीन में रहने की सलाह दी थी.

मिताराची कहते हैं, "क्वारंटीन के नियम लागू करने के बाद प्रवासियों के खेमे में आग लग गई थी."

इमेज स्रोत, REUTERS/Alkis Konstantinidis

नॉटिस मिताराची कहते हैं कि कुछ संक्रमित लोगों को जब अपने परिवारों के साथ अन्य लोगों से अलग क्वारंटीन में रहने के लिए कहा गया था तो उन्होंने इससे मना कर दिया था.

मिताराची ने आग लगने के संबंध में प्रवासियों की भूमिका के बारे में कुछ नहीं कहा है. हालांकि कुछ प्रवासियों ने बीबीसी को बताया कि कैम्प में प्रवासियों और ग्रीस के सुरक्षाबलों के बीच झड़प हुई जिसके बाद आग लग गई थी.

वहीं कुछ लोगों का ये भी मानना है कि कोरोना संक्रमण की ख़बर आने के बाद कुछ 'देश के कुछ धुर-दक्षिणपंथी' लोगों ने आग लगाने की घटना को अंजाम दिया है. उनका कहना है कि आग लगाने के लिए गैस कनस्तरों का इस्तेमाल किया गया है.

मेटिलीन के मेयर स्ट्रैटिस कायटेलिस ने कहा है, "फिलहाल स्थिति बेहद जटिल है क्योंकि जो लोग बाहर हैं उनमें से कई कोरोना पॉज़िटिव भी हो सकते हैं."

इमेज स्रोत, REUTERS/Alkis Konstantinidis

घटना पर क्या है प्रतिक्रिया?

प्रवासी शिविर में आग लगने के बाद ग्रीस सरकार ने आपातकाल घोषित कर दिया है और घटना का जायज़ा लेने के लिए कई मंत्री लेसबॉस जा चुके हैं.

ग्रीस के प्रधानमंत्री किरीयाकॉस मित्सोताकिस ने कहा है कि "मोरिया में फिलहाल जो स्थिति है उसे बिगड़ने नहीं दिया जा सकता. ये स्थिति सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए ख़तरा तो है ही बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी ख़तरा है."

मामले में यूरोपीय संघ ने ग्रीस की मदद की पेशकश की है. यूरोपीय कमीशन की अध्यक्ष उर्सुला फ़ॉन डी लेयन ने कहा है कि उनकी प्राथमिकता वो लोग हैं जो फिलहाल खुले में रहने को मजबूर हैं.

वहीं जर्मनी के विदेश मंत्री हीको मास ने आग को "मानवता के लिए विपत्ति" करार दिया है और कहा है कि यूरोपीय संघ में शामिल जो देश प्रवासियों को स्वीकार करने की स्थिति में हों वो उनके रहने का ठिकाना करें.

जर्मनी के राज्य राइन-वेस्टफालिया ने प्रधानमंत्री आर्मिन लाचेट ने मदद की पेशकश की है और कहा है कि वो "एक हज़ार प्रवासियों को लेने को" तैयार हैं.

इमेज स्रोत, REUTERS/Alkis Konstantinidis

मोरिया कैम्प

लेसबॉस की राजधानी मेटिलीन के उत्तर पूर्व में मोरिया शराणार्थी शिविर मौजूद है. बीते सालों में यहां आने वाले प्रवासियों की संख्या बढ़ी है.

इन्फोमाइग्रेन्ट्स के अनुसार इस कैम्प में रहने वालों में 70 फीसदी लोग अफ़ग़ानिस्तान से हैं. प्रवासियों को रखने के लिए पास में कारा तेपे शारणार्थी कैम्प बनाया गया है लेकिन प्रवासियों की संख्या देखते हुए यहां भी जगह कम पड़ रही है.

शरणार्थियों को स्वीकार करने की देशों की प्रक्रिया धीमी गति से आगे बढ़ती है जबकि कैम्पों में आने वाली प्रवासियों की संख्या उस हिसाब से नहीं है, ऐसे में यहां उनकी संख्या साल दर साल बढ़ती जा रही है.

यूरोपीय संघ ने प्रवासियों को अलग-अलग सदस्य देशों में बसाने को लेकर उनसे बात की है लेकिन कई देशों ने उसके इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया था.

इमेज स्रोत, REUTERS/Alkis Konstantinidis

अप्रैल में ह्युमन राइट्स वॉच ने कहा था कि लोगों से खचाखच भरे इस शिविरों को कोरोना महामारी अपनी चपेट में ले सकती है और इससे निपटने के लिए ग्रीस सरकार ने कारगर कदम नहीं उठाए हैं.

प्रवासियों को रखने के लिए ग्रीस सरकार की योजना बंद दरवाज़े वाले डिटेंशन सेंटर बनाने की है. लेकिन फरवरी में इस दिशा में काम शुरू करने के लिए लेसबॉस में जब अधिकारी सामान ले कर पहुंचे तो प्रवासियों ने उनका विरोध किया था.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)