अमरीकी राष्ट्रपति चुनाव: ट्रंप और बाइडेन के दावों की फ़ैक्ट चेकिंग

ट्रंप और बाइडन

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राष्ट्रपति ट्रंप और डेमोक्रेटिक पार्टी के उनके प्रतिद्वंद्वी जो बाइडन ने मंगलवार को राष्ट्रपति चुनाव के लिए होने वाले डिबेट में हिस्सा लिया.

छह नवंबर को होने वाले चुनाव से पहले दोनों के बीच तीन बहस होने वालीं हैं. मंगलवार को पहली बहस हुई, अभी दो और बहस होनी बाक़ी हैं.

नब्बे मिनट तक चली गर्मागर्म बहस में आर्थिक स्थिति से लेकर कोरोना तक तक़रीबन सभी मामलों की चर्चा हुई और दोनों ने एक दूसरे पर जमकर हमले किए.

लेकिन इस बहस के दौरान किसने क्या कहा, और उनके दावे कितने सही थे और कितने ग़लत. आइए करते हैं उनकी फ़ैक्ट चेकिंग.

ट्रंप: हमने इतिहास में सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनाई

फ़ैसला: ट्रंप का यह दावा सही नहीं है. अमरीका के इतिहास में ऐसा कई बार हुआ है जब उनकी अर्थव्यवस्था अभी से ज़्यादा मज़बूत थी.

कोरोना वायरस के फैलने से पहले राष्ट्रपति ट्रंप ने दावा किया था कि उन्होंने ऐतिहासिक आर्थिक विकास हासिल किया है. यह सही है कि कोरोना के पहले अमरीकी अर्थव्यवस्था सही दिशा में जा रही थी, सच्चाई ये है कि ओबामा में जिसकी शुरुआत हुई थी ट्रंप के समय वो रुझान जारी था. लेकिन इससे पहले कई बार अमरीकी अर्थव्यवस्था इससे ज़्यादा मज़बूत रही है.

बाइडन: हमलोग जनसंख्या के एतबार से दुनिया के चार फ़ीसद हैं, लेकिन कोरोना से मरने वालों में अमरीकी 20 फ़ीसद हैं.

फ़ैसला: यह लगभग सही है. लेकिन अगर कोरोना से मरने वालों को पर कैपिटा के हिसाब से देखा जाए तो कई दूसरे देशों में इस महामारी ने अमरीका की तुलना में ज़्यादा तबाही मचाई है.

बाइडन ने कोरोना वायरस से निपटने के मामले में ट्रंप प्रशासन की आलोचना की है. आँकड़ों के अनुसार देखा जाए तो बाइडन का दावा सही है. अमरीकी आबादी 32 करोड़ है जो कि दुनिया की कुल आबादी सात अरब 70 करोड़ की लगभग चार फ़ीसद है.

अमरीका में कोरोना से अब तक 205,942 लोग मारे जा चुके हैं, जबकि पूरी दुनिया में अबतक दस लाख से ज़्यादा लोग कोरोना के शिकार हुए हैं. इस तरह से देखा जाए तो कोरोना से मरने वालों में अमरीकी क़रीब 20 फ़ीसद हैं. हालांकि यह भी सही है कि कई दूसरे देशों में जिस तरह से आँकड़े पेश किए जा रहे हैं उनमें बहुत फ़़र्क़ है.

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ट्रंप: पोस्टल बैलट को बढ़ाने से ऐसा फ़र्ज़ीवाड़ा होगा जो आपने पहले कभी नहीं देखा होगा

फ़ैसला: पोस्टल बैलट को लेकर जितने भी अध्ययन हुए हैं उनमें ऐसा कोई सुबूत नहीं मिला है कि पोस्टल बैलट में बड़े पैमाने पर कोई गड़बड़ी होती है. हालांकि कुछ एक घटनाएं ऐसी हुईं हैं जिनमें पोस्टल बैलट में गड़बड़ी की बात सामने आई थी.

इस साल होने वाले राष्ट्रपति चुनाव में कोरोना महामारी के कारण उम्मीद है कि बहुत सारे लोग अपना वोट डालने के लिए पोस्टल बैलट का इस्तेमाल करेंगे.

लेकिन राष्ट्रपति ट्रंप ने कई बार इस बात की चेतावनी दी है कि पोस्टल बैलट से बड़े पैमाने पर धांधली होगी.

हाल ही में नॉर्थ कैरोलाइना और न्यू जर्सी में पोस्टल बैलट में कुछ गड़गड़ी हुई थी.

सितंबर में अमरीकी न्याय विभाग ने पेनसिल्वेनिया की एक घटना के बारे में बयान जारी कर कहा था, "नौ मिलिट्री बैलट को अयोग्य क़रार दिया गया था और उनमें से सात वोट ट्रंप के पक्ष में डाले गए थे."

लेकिन ऐसी कुछ मिसालों के बावजूद कई सारे अध्ययन किए गए हैं और उनमें पोस्टल बैलट में बड़े पैमाने पर धांधली के कोई सुबूत नहीं मिले हैं.

साल 2017 में ब्रेनन सेंटर फ़ॉर जस्टिस ने अपने शोध में पाया था कि अमरीकी में फ़र्ज़ी वोटिंग की दर 0.00004 फ़ीसद से लेकर 0.0009 फ़ीसद है.

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बाइडन: क़रीब 10 करोड़ अमरीकी लोगों को पहले से कोई न कोई बीमारी है

फ़ैसला: इसका कोई निश्चित जवाब नहीं है. दोनों उम्मीदवारों में इस बात को लेकर बहस हुई कि अमरीका में कितने लोग हैं जिन्हें पहले से कोई न कोई बीमारी है जिससे कि प्राइवेट मेडिकल इंश्योरेंस करने वाले उन अमरीकियों को मेडिकल इंश्योरेंस नहीं देंगे.

बाइडन के अनुसार ऐसे 10 करोड़ अमरीकी हैं जिसे ट्रंप ने ख़ारिज कर दिया.

लेकिन अगर 10 करोड़ नहीं हैं तो आख़िर कितने हैं, इसका भी कोई निश्चित जवाब नहीं है.

अमरीकी स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार पाँच करोड़ से 13 करोड़ तक ऐसे लोग हैं जो बुज़ुर्ग नहीं है और उन्हें कोई न कोई बीमारी है.

दूसरे संगठन अलग आँकड़े देते हैं. सेंटर फ़ॉर अमेरिकन प्रोग्रेस के अनुसार 65 साल से कम के क़रीब साढ़े 13 करोड़ ऐसे लोग हैं जिन्हें पहले से कोई न कोई स्वास्थ्य संबंधी मसला है.

ट्रंप: हमलोग कोरोना की वैक्सीन से बस कुछ हफ़्ते ही दूर हैं

फ़ैसला: अमरीका के वैक्सीन प्रोग्राम के मुख्य वैज्ञानिक सलाहकार के अनुसार अक्तूबर के अंत तक वैक्सीन तैयार हो जाने की बहुत ही कम संभावना है.

मॉनसेफ़ सलाउनी ने सितंबर के शुरू में ही यह बात कह दी थी. अमरीका के शीर्ष कोरोना विशेषज्ञ डॉक्टर एंथनी फ़ाउची का कहना है कि नवंबर या दिसंबर में ही पता चल सकेगा कि कोरोना की एक सुरक्षित और प्रभावी वैक्सीन अमरीका को मिल सकेगी या नहीं.

उनके अुसार अप्रैल 2021 तक अमरीका के सभी लोगों के लिए पर्याप्त मात्रा में वैक्सीन की डोज़ मिल सकेगी.

बाइडन: निर्माण उद्योग कोरोना महामारी के पहले से ही गर्त में है

फ़ैसला: आँकड़ों के अनुसार यह सही नहीं है. बाइडन ने कहा कि कोरोना वायरस के फैलने से पहले से ही अमरीका के निर्माण उद्योग में पूरी तरह गिरावट देखा जा रहा था.

कोरोना का इस सेक्टर पर ज़रूर प्रभाव पड़ा है. अगस्त, 2020 के आँकड़ों के अनुसार अमरीका के निर्मााण उद्योग में दो लाख 37 हज़ार कम नौकरियाँ थीं, साल 2017 की तुलना में जब ट्रंप ने सत्ता संभाली थी.

लेकिन कोरोना महामारी से पहले ट्रंप ने अपने कार्यकाल के पहले तीन सालों में निर्माण उद्योग में क़रीब पाँच लाख नौकरियाँ पैदा करने में सफलता पाई थी.

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ट्रंप: बाइडन ने एक बार काले अमरीकी को 'सुपर प्रिडेटर्स' यानी 'ख़तरनाक दरिंदे' कहा था

फ़ैसला: यह सही नहीं है. बाइडन ने 'प्रिडेटर्स' शब्द का इस्तमाल ज़रूर किया था लेकिन यह उन्होंने काले अमरीकियों के लिए नहीं किया था. साल 1993 में बाइडन ने अमरीकी संसद में अपराध से जुड़े एक महत्वपूर्ण बिल पर वोटिंग से ठीक पहले एक भाषण के दौरान 'हमारी सड़कों पर घूम रहे दरिंदों' के बारे में चेतावनी दी थी.

उस बिल में काले अमरीकियों का कोई ज़िक्र नहीं था लेकिन यह भी सच है कि उस बिल की बाद में बहुत आलोचना हुई थी क्योंकि उसके क़ानून के तहत कई लोगों को लंबे समय तक जेल में रखा गया था और उनसे सबसे ज़्यादा प्रभावित काले अमरीकी लोग थे.

हिलेरी क्लिंटन ने 1996 में इस शब्द का इस्तमाल किया था जब उन्होंने उस विवादास्पद बिल का समर्थन किया था.

हिलेरी ने कहा था, "हमें इन लोगों से निपटने की ज़रूरत है. वो अब केवल बच्चों के किसी गैंग का हिस्सा नहीं हैं बल्कि वो बड़े ड्रग माफ़िया से जुड़े हुए हैं. ऐसा करने वाले अक्सर वो बच्चे हैं जिन्हें 'सुपर प्रिडेटर्स' यानी 'ख़तरनाक दरिंदे' कहा जाता है, जिनकी न कोई अन्तरात्मा होती है और न ही हमदर्दी."

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बाइडन: ट्रंप ने किसी के लिए भी दवाओं की क़ीमत कम नहीं की है

फ़ैसला: प्रेस्क्रिपशन दवाओं की औसत मासिक क़ीमत में अगस्त 2019 तक कमी आई थी, उसके बाद दाम फिर बढ़ने लगे.

अमरीका में रोज़मर्रा के सामानों की क़ीमत पर नज़र रखने वाली संस्था ब्यूरो ऑफ़ लेबर स्टैटिसटिक्स कन्ज़्यूमर प्राइस इंडेक्स(सीपीआई) के अनुसार अगस्त 2019 तक प्रेस्क्रिपशन दवाओं की औसत मासिक क़ीमत में 0.3 प्रतिशत की कमी आई थी.

साल 1973 के बाद पहली बार ऐसा हुआ था जब पूरे 12 महीने तक दवाओं की क़ीमत में कमी आई थी. अगले साल क़ीमत में 1.5 प्रतिशत का इज़ाफ़ा हो गया था लेकिन ट्रंप के कार्यकाल में क़ीमत में औसत बढ़ोत्तरी ओबामा के कार्यकाल की तुलना में कम हुई थी.

सीपीआई दवाओं की क़ीमत को मापने का कोई बहुत भरोसेमंद तरीक़ा नहीं है क्योंकि इसमें वही दवाएं शामिल हैं जो ज़्यादातर इस्तमाल की जाती हैं और जो आम तौर पर सस्ती होती हैं. इनमें वो दवाएं शामिल नहीं होती हैं जो कम लिखी जाती हैं और जो ज़्यादा महंगी भी होती हैं और जिनकी क़ीमत भी ज़्यादा बढ़ती है.

ट्रंप: हंटर बाइडन को मिलिट्री से निकाल बाहर किया गया था. उन्हें कोकिन के इस्तेमाल के कारण बेइज़्ज़त करके निकाला गया था

फ़ैसला: जो बाइडन के बेटे हंटर बाइडन को एक ड्रग टेस्ट में फ़ेल हो जाने के कारण नौसेना से निकाल दिया गया था, लेकिन उन्हें बेइज़्ज़त करके नहीं निकाला गया था.

राष्ट्रपति ट्रंप ने हंटर का नाम उस समय घसीटा जब वो जो बाइडन के बड़े बेटे ब्यू बाइडन के बारे में बात कर रहे थे. ब्यू बाइडन अमरीकी सेना में काम करते थे और साल 2015 में कैंसर से उनकी मौत हो गई थी.

ट्रंप ने कहा था, "मैं ब्यू को नहीं जानता. मैं हंटर को जानता हूं. उन्हें कोकिन लेने के लिए मिलिट्री से बेइज़्ज़त करके निकाल दिया गया था."

जो बाइडन ने कहा कि यह सच नहीं है कि उनके बेटे को इस तरह से निकाला गया था.

हंटर बाइडन को साल 2014 में अमरीकी नौसेना से निकाला गया था और उस समय मीडिया ने कहा था कि नौसेना की ड्रग जाँच में पाया गया था कि उन्होंने कोकिन ली है.

लेकिन उन्हें बेइज्ज़त करके नहीं निकाला गया था जो कि अमरीकी मिलिट्री में किसी को दी जाने वाली सबसे बड़ी सज़ा है

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