चीन ने ट्रंप के विदेश मंत्री रहे माइक पोम्पियो पर लगाया प्रतिबंध

माइक पोम्पियो

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डोनाल्ड ट्रंप के अमेरिकी राष्ट्रपति पद के कार्यकाल के आख़िरी दिन उनके विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने चीन के वीगर मुसलमानों पर टिप्पणी की. इसके बाद चीन ने पोम्पियो के ख़िलाफ़ कई प्रतिबंधों की घोषणा की है.

चीन के विदेश मंत्रालय ने बयान जारी करते हुए कहा है कि बीते कुछ सालों से अमेरिका के कुछ चीन विरोधी राजनेता अपने स्वार्थी राजनीतिक हितों और पूर्वाग्रहों के कारण चीन के ख़िलाफ़ नफ़रत फैला रहे हैं.

चीन के बयान में कहा गया है कि इन राजनेताओं के बयान चीनी और अमेरिकी लोगों के हितों में नहीं हैं और यह सुनियोजित हैं जो बेतरतीब तरीक़े से चीन के आंतरिक मामलों में दख़ल देते हैं और यह चीन के हितों को नज़रअंदाज़ करते हैं, चीन के लोगों को नाराज़ करते हैं और चीन-अमेरिका रिश्तों को बाधित करते हैं.

बयान में कहा गया है, "चीनी सरकार चीन की राष्ट्रीय संप्रभुता, सुरक्षा और विकास के हितों को लेकर दृढ़ संकल्प है. चीन ने फ़ैसला किया है कि वह उन 28 लोगों पर प्रतिबंध लगा रही है जिन्होंने बेहद गंभीरता से चीन की संप्रभुता का उल्लंघन किया है और चीन से संबंधित मुद्दों पर अमेरिका के ऐसे क़दमों के लिए मुख्य रूप से ज़िम्मेदार हैं."

चीन में घुसने पर होगा प्रतिबंध

चीन ने प्रतिबंधित किए गए उन लोगों के नामों को भी सार्वजनिक किया है. इनमें माइकल आर. पोम्पियो. पीटर के. नेवेरो, रॉबर्ट सी. ओब्रायन. डेविड आर. स्टिलवेल, मैथ्यू पॉटिंगर, एलेक्स एम. अज़र, कीथ जे. क्रेच, केली डी.के. क्राफ़्ट के अलावा ट्रंप प्रशासन में रहे जॉन बॉल्टन और स्टीफ़न बेनन भी शामिल हैं.

चीन ने अपने बयान में कहा है कि 'इन लोगों के और इनके परिवार के सदस्यों के चीन की मुख्य भूमि, हॉन्गकॉन्ग और मकाउ ऑफ़ चाइना में आने पर प्रतिबंध होगा और इनसे जुड़े लोगों और इनसे जुड़ी कंपनियों-संस्थानों पर भी चीन में व्यापार करने पर प्रतिबंध होगा.'

इससे पहले दिन में चीनी विदेश मंत्रालय ने ट्वीट करके कहा था कि पोम्पियो का बयान चीन के 1.4 अरब लोगों का अपमान है जिनमें 2.5 करोड़ शिंजियांग प्रांत के लोग, अमेरिकी लोगों की बुद्धिमता और अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी शामिल हैं.

इसमें लिखा था कि 'उन्होंने (पोम्पियो) बुनियादी नैतिक मानक और मानवीय विवेक के साथ विश्वासघात किया है और उसे चुनौती दी है.'

चीनी विदेश मंत्रालय ने ट्वीट किया कि 'पोम्पियो और उनके झूठ को इतिहास के कूड़ेदान में जगह मिलेगी.'

क्या है मामला

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दो देश,दो शख़्सियतें और ढेर सारी बातें. आज़ादी और बँटवारे के 75 साल. सीमा पार संवाद.

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अमेरिका के पूर्व विदेश मंत्री माइक पॉम्पियो ने मंगलवार को कहा था कि चीन ने वीगर मुसलमानों का दमन कर जनसंहार किया है.

माइक पॉम्पियो ने अपने बयान में कहा था, ''मेरा मानना है कि चीन का यह जनसंहार अब भी जारी है. हमलोग देख रहे हैं कि चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की सरकार सुनियोजित तरीक़े से वीगरों को तबाह कर रही है.''

पॉम्पियो ने ट्रंप प्रशासन के आख़िरी दिन ये बात कही. हालांकि यह बयान चीन पर दबाव डालने के लिए है और इससे उस पर कोई स्वतः जुर्माना नहीं लगेगा.

मंगलवार को बाइडन सरकार में विदेश मंत्री बनने जा रहे एंटोनी ब्लिंकन से पॉम्पियो के बयान के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि वो भी इस बात को मानते हैं.

बाइडन की टीम ने पिछले साल अगस्त में वीगरों के मामले में चीन पर इसी तरह का आरोप लगाया था.

बाइडन की टीम ने कहा था कि चीन की निरंकुश सरकार ने वीगरों का दमन जिस तरह से किया है उसकी व्याख्या नहीं की जा सकती.

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