अफ़ग़ानिस्तानः लड़कियों के गाने पर रोक के फ़ैसले की होगी जांच

अफ़ग़ानिस्तान

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बड़ी उम्र की लड़कियों को सार्वजनिक तौर पर गाना गाने से रोकने के फ़ैसले की सोशल मीडिया पर जमकर आलोचना हुई है

अफ़ग़ानिस्तान के शिक्षा मंत्री ने कहा है कि हाल में राजधानी काबुल में शिक्षा निदेशक की ओर से आए उस बयान की जांच की जा रही है जिसमें उन्होंने कहा था कि 12 साल से ज्यादा उम्र की लड़कियों के सार्वजनिक रूप से गाने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है.

इस प्रतिबंध की सोशल मीडिया पर जमकर आलोचना की जा रही है. वहीं लड़कियों ने हैशटैग #IAmMySong के साथ अपने गानों वाले वीडियो क्लिप सोशल मीडिया पर शेयर किए हैं.

यह मामला तालिबान के साथ संभावित शांति समझौते के परिणाम को लेकर पैदा हुई आशंकाओं के बीच आया है.

आज से लगभग दो दशक पहले तालिबानी शासन के दौरान लड़कियों की शिक्षा और संगीत की ज्यादातर विधाओं पर रोक लगी हुई थी.

काबुल में शिक्षा निदेशक के बयान में 12 वर्ष और उससे ज़्यादा उम्र की लड़कियों के स्कूली कार्यक्रमों में गाने पर रोक लगाई गई है. साथ ही बड़ी उम्र की लड़कियों के पुरुष संगीत शिक्षकों से सीखने पर भी रोक लगाई गई है.

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अफ़ग़ानिस्तान में #WhereIsMyName आंदोलन खड़ा हुआ है.

सोशल मीडिया

शिक्षा मंत्री ने कहा है कि यह आदेश उनके रुख को ज़ाहिर नहीं करता है.

उन्होंने ये भी कहा है कि इस मामले पर ग़ौर किया जाएगा और ज़रूरत पड़ने पर अनुशासनात्मक कदम उठाए जा सकते हैं.

इस प्रतिबंध की घोषणा कई दिनों पहले हुई थी. सोशल मीडिया पर इसकी जमकर निंदा हुई है.

साहित्यकारों और आंदोलनकारियों का तर्क है कि यह फैसला शैक्षिक अधिकारों के मामले में पीछे ले जाने वाला कदम है.

अफ़ग़ानिस्तान की श्रेष्ठ लेखिकाओं में से एक और कवयित्री शफीका खपलवाक ने ट्वीट किया है, "खुदा हमें माफ करें! मनुष्य इतना क्रूर हो सकता है कि वह किसी बच्चे को भी जेंडर आधारित नज़रिए से देख सकता है."

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अफ़ग़ानिस्तान: संगीत के ज़रिए सुकून देती लड़कियां

तालिबानी शासन के दिनों वाली ज़िंदगी

वहीं, कुछ महिलाओं ने इस आदेश की तुलना 2001 में सत्ता से बेदखल किए गए तालिबानी शासन के दिनों वाली ज़िंदगी से की है, जब लड़कियों के स्कूल जाने और संगीत की ज्यादातर विधाओं पर रोक लगी थी.

पिछले 40 सालों से अफ़ग़ान मानवाधिकार कार्यकर्ता के रूप में काम कर रहे सीमा समर ने समाचार एजेंसी एसोसिएटेड प्रेस को बताया, "यह गणतंत्र के भीतर तालिबानीकरण का प्रयास है."

संवाददाताओं के अनुसार, अफ़ग़ान सरकार फिलहाल तालिबान के साथ शांति समझौता करने को लेकर काफी दबाव में है.

वहीं, कई अफगान महिलाएं चाहती हैं कि उन्हें हिंसा से छुटकारा मिले, लेकिन वे भविष्य में मिलने वाले अपने अधिकारों को लेकर भी चिंतित हैं.

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