भारत-पाकिस्तान: रिश्ते सुधारने के लिए दोनों देश बढ़ा रहे हैं बड़े कदम: पाकिस्तान से उर्दू प्रेस रिव्यू

  • इक़बाल अहमद
  • बीबीसी संवाददाता
नरेंद्र मोदी, इमरान ख़ान

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पाकिस्तान से छपने वाले उर्दू अख़बारों में इस हफ़्ते विपक्षी पार्टियों के बीच मतभेद उभरने, भारत-पाकिस्तान संबंधों और पाकिस्तान में पेट्रोलियम संकट से जुड़ी ख़बरें सबसे ज़्यादा सुर्ख़ियों में रहीं.

अख़बार दुनिया के अनुसार भारत और पाकिस्तान के बीच राजनयिक संबंधों की बहाली के लिए कोशिशें तेज़ हो गईं हैं. अख़बार के अनुसार दोनों देशों ने उच्चायुक्तों की तैनाती पर काम शुरू कर दिया है और जल्द ही दोनों देशों के बीच संबंधों को बढ़ाया जाएगा.

अख़बार का दावा है कि अत्यंत भरोसेमंद सूत्रों ने उन्हें बताया है कि भारत सरकार की तरफ़ से भारत प्रशासित कश्मीर में उठाए गए क़दम के बाद पाकिस्तान ने भारत के साथ संबंधों को कम कर दिया था और उसके बाद दोनों देशों के बीच संबंध और भी ख़राब होते चले गए थे.

लेकिन मिलिट्री ऑपरेशन के डायरेक्टर जनरल के बीच हुई बातचीत के बाद दोनों देशों के बीच संबंधों की बहाली के लिए काम शुरू हो गया है. अख़बार के अनुसार उनके सूत्र का कहना है कि दोनों तरफ़ से बैकडोर चैनल से बातचीत जारी है. आने वाले दिनों में दोनों देशों में उच्चायुक्त को तैनात कर दिया जाएगा.

इसी साल इस्लामाबाद में सार्क देशों के प्रमुखों की बैठक होने वाली है जिसमें भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाग लेने की पूरी संभावन जताई जा रही है.

अख़बार नवा-ए-वक़्त के अनुसार पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता ने बताया है कि पुंछ क्रॉसिंग प्वाइंट पर भारत और पाकिस्तान के ब्रिगेड कमांडर्स के स्तर पर अलग फ़्लैग मीटिंग हुई है.

इस बैठक में लाइन ऑफ़ कंट्रोल (एलओसी) पर तयशुदा बिंदुओं पर अमल हो रहा है या नहीं इसका जायज़ा लिया गया. इससे पहले दोनों देशों की सेना के डीजीएमओ के बीच पिछले महीने हॉटलाइन पर बातचीत हुई थी जिसमें दोनों तरफ़ से एलओसी पर फ़ायरिंग बंद करने का फ़ैसला किया गया था.

इस बैठक के बारे में पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता मेजर जनरल बाबर इफ़्तिख़ार ने कहा था, "हर कोई शांति चाहता है. फ़ायरिंग बंद रखना इसका पहला क़दम है. एलओसी पर पाँच सौ मीटर के अंदर कोई नया रक्षात्मक निर्माण नहीं होगा और ना ही किसी पोस्ट को सीधे तौर पर निशाना बनाया जाएगा."

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मुस्लिम लीग (नवाज़) और पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी समेत 11 विपक्षी पार्टियों का समूह पाकिस्तान डेमोक्रेटिक मूवमेंट (पीडीएम) पिछले कई महीनों से इमरान ख़ान की सरकार के लिए परेशानी का कारण बना हुआ है.

पीडीएम के बैनर तले पाकिस्तान के कई शहरों में इमरान ख़ान के ख़िलाफ़ कई बड़ी रैलियां हुई हैं जिनमें हज़ारों की संख्या में लोग शामिल हुए थे. हालांकि सरकार हमेशा कहती रही थी कि पीडीएम एक मतलबी गठबंधन है और मुस्लिम लीग और पीपीपी कभी भी ज़्यादा दिनों तक एक साथ मिलकर काम नहीं कर सकती है.

विपक्षी गठबंधन सरकार के इन बयानों को अब तक ख़ारिज करता रहा है लेकिन इस बार पीडीएम में मतभेद साफ़ दिखने लगे हैं और कारण बना है पूर्व प्रधानमंत्री और पीपीपी के वरिष्ठ नेता यूसुफ़ रज़ा गिलानी का सिनेट में नेता प्रतिपक्ष बनना.

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अख़बार जंग ने लिखा है कि यूसुफ़ रज़ा गिलानी सिनेट के नेता प्रतिपक्ष बन गए जिससे सियासत में भूचाल आ गया है. सिनेट में नेता प्रतिपक्ष के लिए मुस्लिम लीग (नवाज़) के आज़म नज़ीर को 21 सांसदों का समर्थन था जबकि गिलानी को 31 सांसदों का समर्थन मिला.

गिलानी की जीत तो हो गई लेकिन इससे विपक्षी गठबंधन में दरारें पड़ गईं हैं. मुस्लिम लीग के जनरल सेक्रेटरी अहसन इक़बाल ने कहा कि पीपीपी के इस क़दम से पीडीएम को धक्का लगा है. अहसन इक़बाल ने कहा कि अगर पीपीपी को नेता प्रतिपक्ष की कुर्सी चाहिए थी तो वो नवाज़ शरीफ़ को इस बारे में बता देते तो वो ख़ुशी से उन्हें यह पोस्ट दे देते.

अख़बार एक्सप्रेस के अनुसार मुस्लिम लीग की उपाध्यक्ष मरियम नवाज़ ने कहा कि पहली दफ़ा देखा है कि नेता प्रतिपक्ष सरकार से मिलकर बना है. मरियम ने कहा, "एक तरफ़ लोग संविधान और क़ानून की ख़ातिर संघर्ष कर रहे हैं और दूसरी तरफ़ लोग छोटे-छोटे फ़ायदे के लिए उसूलों की क़ुर्बानी दे रहे हैं."

गिलानी को बलूचिस्तान अवामी पार्टी (बाप) के सासंदों का समर्थन मिला और बाप को सेना के क़रीब माना जाता है. इस पर तंज़ करते हुए मरियम ने कहा, अफ़सोस है कि पीपीपी ने छोटे से ओहदे के लिए आंदोलन को नुक़सान पहुँचाया. इसी छोटे से फ़ायदे के लिए बीएपी से वोट ले लिया. आप को बाप के लोगों ने 'बाप' के कहने पर वोट दिया.

लेकिन पीपीपी की शेरी रहमान ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष की सीट पर उनकी पार्टी का हक़ था और इससे पीडीएम की जीत हुई है.

गिलानी ने भी अपना बचाव करते हुए कहा कि पीपीपी को सरकारी विपक्ष कहना सही नहीं है. उन्होंने कहा कि पीडीएम के अध्यक्ष मौलाना फ़ज़लुर्रहमान ने आसिफ़ ज़रदारी से संपर्क किया था. गिलानी ने कहा कि पीडीएम को एकजुट रहना चाहिए और वो सब साथ हैं और आगे भी साथ-साथ चलेंगे.

इमरान ख़ान के एक मंत्री ग़ुलाम सरवर ख़ान ने कहा है कि सिनेट के नेता प्रतिपक्ष चुनाव में सरकार और पीपीपी में कोई डील नहीं हुई है.

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पेट्रोल संकट, प्रधानमंत्री के विशेषसहायक हटाए गए

अख़बार दुनिया के अनुसार पाकिस्तान में इन दिनों पेट्रोल का संकट पैदा हो गया है और प्रधानमंत्री ने सख़्त कार्रवाई करते हुए पेट्रोल के मामले में अपने विशेष सहायक नदीम बाबर को हटा दिया है और पेट्रोलियम सचिव का ट्रांसफ़र कर दिया गया है.

इस मामले में केंद्रीय योजना मंत्री असद उमर ने कहा कि सरकार ने एक जाँच बिठा दी है और 90 दिनों में अपनी रिपोर्ट देने के लिए कहा गया है. असद उमर के अनुसार जो भी इस मामले में मुजरिम होगा उसके लिए हथकड़ी और जेल है.

असद उमर ने कहा कि पाकिस्तान में पेट्रोल संकट पहली बार पैदा नहीं हुआ है लेकिन इस बार प्रधानमंत्री ने बिल्कुल स्पष्ट कर दिया है कि जो भी इसमें किसी भी तरह शरीक होगा उसे बख़्शा नहीं जाएगा.

उन्होंने यह भी कहा कि विशेष सहायक और पेट्रोलियम सचिव को हटाने का बिल्कुल मतलब नहीं कि उन्होंने कुछ ग़लत किया है या फिर उनपर भ्रष्टाचार का कोई आरोप है.

उनके अनुसार उन्हें सिर्फ़ इसलिए हटाया गया है कि जाँच पर वो किसी तरह का दबाव नहीं बना सकें और जाँच कमेटी पूरी आज़ादी और निष्पक्षता से अपना काम कर सके.

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