बंगाल में बीजेपी जीती तो शेख़ हसीना की चुनौतियाँ बढ़ेंगी: पीएम मोदी के दौरे पर बांग्लादेशी मीडिया

  • गुरप्रीत सैनी
  • बीबीसी संवाददाता
नरेंद्र मोदी

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बांग्लादेश के दो दिवसीय दौरे के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वापस भारत लौट तो आए हैं, लेकिन वहां के अख़बारों और न्यूज़ वेबसाइट पर रविवार को भी छाए रहे.

'द डेली स्टार' न्यूज़ वेबसाइट पर सबसे पहला लेख प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दौरे से ही जुड़ा है. इसका शीर्षक है - 'कनेक्टिविटी बियॉन्ड बांग्लादेश, इंडिया'.

इसमें कहा गया है कि द्विपक्षीय बातचीत के दौरान बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख़ हसीना और उनके भारतीय समकक्ष नरेंद्र मोदी ने लंबित मसलों को निपटाने का संकल्प लिया और दोनों देशों के संबंधों को और मज़बूत करने, पूरे दक्षिण एशिया में शांति और स्थितरता स्थापित करने की प्रतिबद्धता को नया आयाम दिया.

साथ ही दोनों नेताओं ने व्यापार के विस्तार के लिए क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को और बेहतर बनाने पर ज़ोर दिया. वहीं, शेख़ हसीना ने तीस्ता जल बंटवारे से जुड़े समझौते पर हस्ताक्षर करने की ज़रूरत को दोहराया.

जवाब में नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत इस समझौते पर हस्ताक्षर करने के लिए प्रतिबद्ध है और इस ओर प्रयास जारी हैं. पीएम मोदी के इस दौरे के दौरान कई समझौते भी हुए.

'द डेली स्टार' वही न्यूज़ वेबसाइट है जिसमें प्रधानमंत्री मोदी ने अपने बांग्लादेश दौरे को लेकर लेख लिखा था. इस लेख का शीर्षक था- इमैजेनिंग डिफ़्रेंट साउथ एशिया विद बंगबंधु.

बांग्लादेश की मीडिया में रविवार को भी प्रधानमंत्री मोदी के दौरे से जुड़ी कई सुर्खियाँ नज़र आईं.

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इसके अलावा प्रधानमंत्री मोदी ने वहाँ के मंदिरों समेत जिन जगहों का दौरा किया, उनसे जुड़ी ख़बरें भी बांग्लादेश के मीडिया में नज़र आती रहीं.

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COVER STORY: बांग्लादेश में पीएम मोदी

पीएम मोदी के दौरे पर हिंसक प्रदर्शन की ख़बरें

प्रधानमंत्री मोदी के बांग्लादेश दौरे के विरोध में ढाका समेत दूसरे हिस्सों में प्रदर्शन हुए.

इस दौरान पुलिस के साथ हुई हिंसा में बांग्लादेश के चटगांव में विरोध प्रदर्शन हुए जिसमें कम चार लोगों की मौत हुई है.

ढाका में भी शुक्रवार को जुमे की नमाज़ के बाद राजधानी ढाका के बैतुल मुकर्रम इलाक़े में विरोध प्रदर्शन हुए थे. इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हुई जिसमें कई पत्रकार भी घायल हुए हैं.

ढाका के अख़बारों ने पुलिस के हवाले से रिपोर्ट किया कि प्रदर्शनों के दौरान कुछ लोगों ने हथाज़री पुलिस थाने पर पथराव भी किया.

हिंसक प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर के लिए पुलिस ने हवा में गोलियां चलाईं जिसमें कई लोग घायल हुए हैं.

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'बंगाल में बीजेपी जीती तो हसीना के लिए चुनौतियाँ बढ़ेंगी'

'ढाका ट्रिब्यून' में नई दिल्ली स्थित इंस्टिट्यूट ऑफ़ सोशल साइंसेज़ के सीनियर फ़ेलो पार्थ एस घोष का नज़रिया लेख छपा है. इस लेख में कहा गया है कि अगर बीजेपी पश्चिम बंगाल में जीत जाती है तो शेख़ हसीना के लिए राजनीतिक चुनौतियां कई गुना बढ़ जाएंगी.

इस लेख में कहा गया है कि मोदी का 'हिंदुत्व' और शेख़ हसीना की 'धर्मनिपेक्षता' मौलिक रूप से एक-दूसरे से उलट हैं.

लेख के मुताबिक़, 27 मार्च से शुरू हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के लिए बीजेपी के स्टार प्रचारक मोदी हिंदू-मुस्लिम विभाजन की बात कर रहे हैं, जो राज्य की राजनीति में पहले कभी नहीं देखा गया.

इसमें लिखा है,"मोदी के नेतृत्व वाली बीजेपी के 2014 में सत्ता में आने के बाद से हिंदुत्व ने बंगाल की राजनीति में एंट्री ले ली. हाल में बीजेपी ने बंगाल की राजनीति में मज़बूत मौजूदगी दर्ज कराई और बीते लोकसभा चुनाव में 42 सीटों में से 18 अपने नाम कर ली."

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बांग्लादेश में पीएम मोदी ने की इंदिरा गांधी की तारीफ़

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बात सरहद पार

दो देश,दो शख़्सियतें और ढेर सारी बातें. आज़ादी और बँटवारे के 75 साल. सीमा पार संवाद.

बात सरहद पार

समाप्त

इस लेख में कहा गया है कि भारत के पड़ोसी देश बांग्लादेश को पश्चिम बंगाल के आठों चरणों की वोटिंग और फिर दो मई के नतीजों को लेकर सोचना पड़ेगा.

पार्था एस घोष लेख में याद करते हैं विभाजन के बाद जब भारत के अन्य हिस्से हिंदू-मुसलमान दंगों से जूझ रहे थे तब बंगाल शांति का प्रतीक बना हुआ था.

वो लिखते हैं, "शेख़ हसीना और नरेंद्र मोदी के लिए साफ़ तौर पर अवसर एक से हैं, लेकिन गहराई में जाकर देखें तो गंभीर विरोधाभास उभरते हैं. बांग्लादेश भारत से ख़ुश है क्योंकि उसे आर्थिक फायदा हो रहा है. भारत के साथ उसके निर्यात में 300% बढ़ोतरी दर्ज की गई है. भारत भी ख़ुश है क्योंकि बांग्लादेश उत्तरपूर्व स्थित उग्रवादियों को अपनी ज़मीन इस्तेमाल करने देने से रोक रहा है लेकिन संगम के इन बिंदुओं से परे एक विशाल और ख़तरनाक समुद्र है."

"अगर बीजेपी पश्चिम बंगाल की सत्ता हासिल कर लेती है तो हसीना के लिए राजनीतिक चुनौतियां कई गुना बढ़ जाएंगी. हसीना-मोदी के संयुक्त बयान की अच्छी-अच्छी बातों का बहुत कम महत्व रह जाएगा."

"रिश्ते बिगड़ सकते हैं क्योंकि ना तो मोदी और ना ही शाह दक्षिण एशिया की क्षेत्रीय मानसिकता को समझते हैं. उनके लिए विदेश नीति एक तरह से घरेलू राजनीति ही है. हम सभी जानते हैं कि वो घरेलू राजनीति कैसी है."

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पीएम मोदी के 'सत्याग्रह' वाले दावे पर आरटीआई दाख़िल

'ढाका ट्रिब्यून' ने प्रधानमंत्री मोदी के बांग्लादेश की आज़ादी के लिए सत्याग्रह करने के दावे से जुड़ी एक दिलचस्प ख़बर को भी जगह दी है.

ख़बर में बताया गया है कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के एक संयोजक ने आरटीआई दाख़िल कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बांग्लादेश की आज़ादी के समर्थन में गिरफ़्तारी देने और जेल जाने के दावे से जुड़ी जानकारी मांगी है.

ख़बर के मुताबिक़, आईएनसी के सोशल मीडिया विभाग के संयोजक सरल पटेल ने ट्वीट कर बताया है कि उन्होंने शुक्रवार को भारतीय प्रधानमंत्री के कार्यालय में आरटीआई आवेदन दिया है.

सरल पटेल ने ट्वीट में लिखा, "मैं जानने के लिए उत्सुक हूं कि किस भारतीय क़ानून के तहत उन्हें गिरफ़्तार किया गया था और उन्हें किस जेल में रखा गया था. आप उत्सुक नहीं हैं?"

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को देश की स्वतंत्रता की 50वीं वर्षगांठ पर आयोजित कार्यक्रम में कहा था कि उन्होंने और उनके कई साथियों ने बांग्लादेश के लोगों की आज़ादी के लिए 'सत्याग्रह' किया था.

'प्रोथोम अलो' की अंग्रेज़ी की वेबसाइट पर एक लेख में लिखा गया है कि मोदी और हसीना के नेतृत्व में दोनों देशों के रिश्तों ने तेज़ी से प्रगति की है, लेकिन अब भी व्यापार की अपार संभावनाओं को टटोलने की आवश्यकता है.

वर्तमान में बांग्लादेश के साथ व्यापार भारत के व्यापार का सिर्फ एक प्रतिशत है और बांग्लादेश के व्यापार का मात्र 10 प्रतिशत.

लेख के मुताबिक़ दोनों देशों के बीच की अड़चनों में धीरे-धीरे कमी और कनेक्टिविटी में सुधार नए अवसर पैदा कर रहा है समझौतों और प्रोजेक्ट को वक़्त पर लागू करने से दोनों अर्थव्यवस्थाओं को जबरदस्त तेज़ी मिलेगी.

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योगी आदित्यनाथ बंगाल में रैली कर रहे हैं तो लोग क्या बोल रहे हैं?

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