म्यांमार: ब्यूटी क्वीन जो सेना के विरोध का नया चेहरा बनीं

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मिस ग्रैंड म्यांमार हैन ले

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ऐसा कम ही देखा जाता है कि सौन्दर्य प्रतियोगिता में हिस्सा लेने वाली महिलाओं के बयान अख़बारों की सुर्खियां बनें.

लेकिन जब मिस ग्रैंड म्यांमार हैन ले ने बीते हफ़्ते देश में सेना के कथित अत्याचारों के बारे में भाषण दिया तो उनकी इस स्पीच ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा.

थाईलैंड में हुए मिस ग्रैंड इंटरनेशनल 2020 समारोह में हैन ले ने कहा, "आज मेरे देश म्यांमार में कई लोग मारे जा रहे हैं. कृपया हमारी मदद करें. हमें अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अभी मदद चहिए."

इस समारोह से क़रीब एक महीने पहले 22 साल की हैन ले म्यांमार के सबसे बड़े शहर यंगून की सड़कों पर सैन्य तख़्तापलट का विरोध कर रही थीं.

दो महीने पहले म्यांमार की सेना ने तख़्तापलट कर देश की सर्वोच्च नेता आंग सान सू ची समेत कई नेताओं को गिरफ़्तार कर लिया था और सत्ता अपने हाथ में ले ली थी.

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विरोध प्रदर्शनों के दौरान हैन ले

म्यांमार में जारी विरोध प्रदर्शन

बाते साल 8 नवंबर को आए चुनावी नतीजों में आंग सान सू ची की नेशनल लीग फॉर डेमोक्रेसी पार्टी ने 83 फीसदी सीटें जीत ली थीं. इस चुनाव को कई लोगों को आंग सान सू ची सरकार के जनमत संग्रह के रूप में देखा. साल 2011 में सैन्य शासन ख़त्म होने के बाद से ये दूसरा चुनाव था.

सेना के तख़्तापलट के विरोध में हज़ारों लोग देश की सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन करने लगे. प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए सेना ने उन पर पहले पानी की बौछारें कीं. इसके बावजूद विरोध प्रदर्शन नहीं थमे. एक सप्ताह बाद सेना और पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर पहले रबर की गोलियां चलाईं और फिर असली गोलियां चलाई गईं.

बीता शनिवार म्यांमार में जारी विरोध प्रदर्शनों का सबसे बुरा दिन था जब एक दिन में सौ से अधिक प्रदर्शनकारियों की मौत हो गई.

म्यांमार में चल रही गतिविधियों पर नज़र रखने वाले एक स्थानीय समूह का कहना है कि बीते दो महीने से जारी इन विरोध प्रदर्शनों में अब तक पांच सौ से ज़्यादा लोगों की मौत हो चुकी है. वहीं सेव द चिल्ड्रेन का कहना है कि मारे जाने वालों में 43 बच्चे भी शामिल थे.

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'मुझे मेरे परिवार की चिंता है'

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हैन ले यंगून युनिवर्सिटी में मनोविज्ञान की छात्रा हैं. उन्होंने फ़ैसला किया है कि वो अपने देश के बारे में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बात करेंगी. इसके लिए उन्होंने सौन्दर्य प्रतियोगिता का मंच चुना.

बैंकॉक से फ़ोन पर दिए एक साक्षात्कार में हैन ले ने बीबीसी को बताया, "म्यांमार में पत्रकारों को हिरासत में लिया गया है... इसलिए मैंने फ़ैसला किया कि जो हो रहा है, मैं उसके विरोध में आवाज़ उठाऊंगी."

हालांकि हैन ले कहती हैं कि दो मिनट की अपनी स्पीच के लिए वो देश की सेना के निशाने पर आ सकती हैं इसलिए वो अभी तीन महीनों तक थाईलैंड में ही रहेंगी. उनका कहना है कि थाईलैंड आने से पहले वो इस बारे में सचेत थीं कि वो ख़ुद को ख़तरे में डाल रही हैं और उन्हें कुछ वक्त देश से बाहर रहना पड़ सकता है.

वो कहती हैं, "मुझे मेरे और अपने परिवार की सुरक्षा के बारे में चिंता है. मैंने सेना और देश की मौजूदा स्थिति के बारे में काफी कुछ कहा है. म्यांमार में सेना के बारे में बात करने के बारे में सभी को अपनी सीमा पता है. मेरे दोस्तों ने मुझसे कहा कि मैं म्यांमार न लौटूं."

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COVER STORY: गृहयुद्ध के कगार पर म्यांमार?

लेकिन हैन ले की चिंताएं बिना बेवजह नहीं हैं. बीते हफ़्ते सुरक्षाबलों ने 18 सेलिब्रिटी, सोशल मीडिया इफ्लूएंसर और दो पत्रकारों की गिरफ्तारी के लिए अरेस्ट वॉरंट जारी किया था. 'सेना के तख़्तापलट के ख़िलाफ़ या सेना के काम का अपमान करने के ख़िलाफ़' कॉन्टेंट पोस्ट करने के लिए ये अरेस्ट वॉरंट जारी किए गए थे.

जिन लोगों के ख़िलाफ़ ये वॉरंट जारी हुआ था, उन सभी ने सैन्य तख़्तापलट के ख़िलाफ़ लिखा था.

हैन ले ने कहा है कि स्पीच के बाद से न तो सेना ने और न ही किसी और सरकारी अधिकारी ने उनसे संपर्क क्या है. हालांकि उनका कहना है कि उनके सोशल मीडिया अकाउंट पर उन्हें धमकियों भरे कमेंट मिल रहे हैं. उन्होंने कहा, "सोशल मीडिया पर लोग मुझे धमकियां दे रहे हैं. लोग कह रहे हैं कि म्यांमार मे जेल की सलाखें मेरा इंतज़ार कर रही हैं."

हैन ले का कहना है कि इन धमकियों के पीछे कौन है, इस बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं है. वो ये भी कहती हैं कि सोशल मीडिया पर उन्हें कई ऐसे कमेंट भी मिल रहे हैं जो उनकी स्पीच का समर्थन कर रहे हैं.

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'आवाज़ उठाना मेरा कर्तव्य था'

हैन ले ने बताया कि तख़्तापलट के बाद वाले हफ़्ते में उनके साथ विरोध प्रदर्शनों में शामिल कई छात्र फिलहाल जेलों में हैं. कार्यकर्ताओं के समूह 'असिस्टेंस असोसिएशन फ़ॉर पॉलिटिकल प्रिज़नर' का कहना है कि सैन्य तख़्तापलट के बाद कम से कम 2,500 लोगों को गिरफ्तार किया गया है.

हैन ले बताया कि उनके एक मित्र की मौत भी हो गई है. वो कहती हैं, "वो तो विरोध प्रदर्शनों में शामिल तक नहीं था. वो कॉफ़ी के लिए शाम को एक रेस्तरां गया था लेकिन उसे गोली मार दी गई."

हैन ले ने कहा है कि फिलहाल उनका परिवार सुरक्षित है लेकिन हाल में दिनों में म्यांमार में इंटरनेट कनेक्टिविटी अच्छी न होने के कारण उन्हें अपने परिजनों से संपर्क करने में मुश्किलें पेश आ रही हैं. उन्होंने बीबीसी से गुज़ारिश की कि उनके परिजनों की सुरक्षा के लिए शहर का नाम न छापा जाए.

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नीले मास्क में बेसबॉल कैप पहने हैन ले

म्यांमार की सेना की आलोचना

सौन्दर्य प्रतियोगिता में हिस्सा लेने वाले अक़सर राजनीतिक टीका-टिप्पणी से बचते हैं.

लेकिन हैन ले ने इस मंच से न केवल सार्वजनिक तौर पर राजनीतिक बयान दिया है बल्कि सीधे-सीधे म्यांमार की सेना की आलोचना भी की है. साथ ही उन्होंने "विन द रिवोल्यूशन" (क्रांति को जीतने के लिए) प्रतियोगिता के आधिकारिक चैनल पर फैन्स के साथ इंटरव्यू की गुज़ारिश भी की है.

प्रतियोगिता से पहले मिस ग्रैंड कम्बोडिया लीव चिली ने अपने फैन्स से कहा था कि वो राजनीति से दूर रहें.

लेकिन हैन ले का मानना है कि देश के हालात के बारे में आवाज़ उठाना उनका "कर्तव्य" है. वो आंग सान सू ची को अपने "सबसे बड़ी प्रेरणा" मानती हैं.

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थ्रीं फिंगर सैल्यूट बनाती हुई हैन ले, इस तरह का सैल्यूट एशिया में सैन्य सत्ता के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाने की प्रतीक बन चुका है

बीते हफ़्ते म्यांमार की सेना ने आंग सान सू ची पर देश के ऑफ़िशियल सीक्रेट्स एक्ट यानी आधिकारिक गुप्त अधिनियम का उल्लंघन करने का आरोप लगाया था. इस आरोप के तहत उन्हें कम से कम 14 साल की सज़ा सुनाई जा सकती है.

हैन ले कहती हैं कि पहले उनकी चाहत थी कि वो ग्रैजुएशन की पढ़ाई पूरी करने के बाद फ्लाइट अटेंड्न्ट बनने के लिए ट्रेनिंग करें, लेकिन अब उन्हें अपने भविष्य को लेकर कोई रास्ता नहीं दिख रहा. वो कहती हैं कि कुछ लोगों ने उसके कहा है कि वो सक्रिय राजनीति में कदम रखें लेकिन उन्हें लगता है कि वो राजनीति के क्षेत्र में कुछ नहीं कर पाएंगी.

वो कहती हैं कि फिलहाल के लिए वो अपने देश के हालात के बारे में आवाज़ उठाती रहेंगी.

वो कहती हैं, "ये मानवता के ख़िलाफ़ अपराध है और इसलिए हम चाहते हैं कि इस मामले में संयुक्त राष्ट्र हस्तक्षेप करे. हमें अपने नेता वापिस चाहिए और हमें असल मायने में गणतंत्र चाहिए."

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