अमेरिका ने की चीन पर कार्रवाई, सात सुपरकम्प्यूटर ग्रुप को किया ब्लैकलिस्ट

जो बाइडन

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अमेरिका ने चीन के सात सुपरकम्प्यूटर समूह को ब्लैकलिस्ट कर दिया है. अमेरिका का आरोप है कि ये समूह चीन की सेना के लिए सुपरकम्प्यूटर बनाते हैं.

बाइडन प्रशासन की ओर से पहली बार कोई ऐसा क़दम उठाया गया है जिससे चीन के लिए अमेरिकी तकनीक को प्राप्त करना और मुश्किल हो जाएगा.

गुरुवार को तीन कंपनियों और चीन के नेशनल सुपरकम्प्यूटिंग सेंटर की चार शाखाओं को अमेरिका ने ब्लैकलिस्ट करने का फ़ैसला लिया.

इससे अमेरिकी कंपनियां बिना सरकारी इजाज़त के चीनी समूहों को तकनीक निर्यात नहीं कर सकेंगी.

अमेरिका के वाणिज्य विभाग का कहना है कि ये कंपनियां जो सुपर कम्प्यूटर बना रहीं हैं वो चीन की सेना इस्तेमाल करती है और इसकी मदद से विनाशकारी हथियार विकसित किए जा रहे हैं.

जिन समूहों पर ये प्रतिबंध लगाया गया है वह चीन के सुपरकम्प्यूटिंग डेवेलपमेंट प्रोजेक्ट का प्रतिनिधित्व करते हैं और साथ ही चीन के'चिप-आत्मनिर्भर' योजना में प्रमुख भूमिका निभाते हैं.

अमेरिकी वाणिज्य सचिव जीना रायमोंडो ने कहा कि बाइडन प्रशासन 'हर संभव सीमा तक कोशिश करके चीन को सैन्य आधुनिकिकरण के लिए अमेरिकी तकनीक के इस्तेमाल से रोकेगा.'

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इससे पहले ट्रंप प्रशासन ने भी दर्जनों चीनी कंपनियों पर प्रतिबंध लगाया था क्योंकि इन कंपनियों पर अमेरिकी तकनीक को चीन की सेना के लिए इस्तेमाल करने का शक था. इसमें चीन की बड़ी फ़ोन बनाने वाली कंपनी ख़्वावे का नाम भी शामिल था.

बाइडन प्रशासन की हालिया कार्रवाई के बाद अब इन सात चीनी कंपनियों के समूह को अमेरिकी तकनीक पाने के लिए लाइसेंस लेना होगा.

यहां तक की अगर इन कंपनियों को अमेरिकी चिप कंपनी इंटेल से भी तकनीक लेनी है तो भी इसके लिए पहले अनुमति लेनी होगी.

हालांकि इस ब्लैकलिस्ट के तहत अमेरिका में आधारित कंपनियों पर चीनी कंपनियों को सेवाएं और उत्पाद देने से रोका गया है. लेकिन वो कंपनियां जिनका उत्पादन अमेरिका से बाहर होता है वो कंपनिया चीन के साथ लेनदेन जारी रखेंगी.

ऐसी ही एक कंपनी है टीएसएमसी जो ताइवान की कंपनी है और दुनिया के सबसे बड़े सेमीकंडक्टर का उत्पादन करने वाली कंपनियों में शुमार है.

सुपरकम्प्यूटर क्या होता है?

सुपर-कम्प्यूटर, साधारण कम्प्यूटर की तुलना में काफ़ी तेज़ काम करता है और एक सेकेंड में अरबों की गितनी करने में सक्षम होता है.

सुपरकम्प्यूटर हज़ारों जुड़े हुए प्रोसेसर से बने होते हैं और इनका इस्तेमाल मौसम के पूर्वानुमान, जलवायु के रुझान, परमाणु परीक्षणों और फार्मास्युटिकल रिसर्च जैसे कामों के लिए किया जाता है.

उच्च-स्तरीय हथियारों को बनाने में भी इसका इस्तेमाल किया जाता है. जैसे- हाइपरसोनिक मिसाइल

रायोमोंडो कहती हैं, ''सुपरकम्प्यूटिंग लगभग सभी तरह के आधुनिक हथियार और राष्ट्रीय सुरक्षा सिस्टम में इस्तेमाल होता है. जैसे परमाणु हथियार और हाइपरसोनिक हथियार बनाने में.''

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'चीन इंतज़ार नहीं कर रहा'

अमेरिका के लिए सबसे बड़ी परेशानी ये हो चुकी है कि चीन अमेरिका के तकनीक में सेंध लगा कर उसकी मदद से अपनी सेना और अमेरिकी सेना के बीच की दूरी को कम करता जा रहा है.

बाइडन प्रशासन वर्तमान समय में चीन से जुड़ी ट्रंप प्रशासन की दर्जनों कार्रवाइयों की समीक्षा कर रहा है, जिसमें वो आदेश भी शामिल है जिसके तहत अमेरिकियों को उन चीनी कंपनियों में निवेश करने से रोका गया है जो किसी तरह उनकी सेना से जुड़ी हैं.

एक भाषण के दौरान बाइडन ने बुधवार को कहा था, "आपको लगता है कि चीन अपने डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर में, शोध या विकास के क्षेत्र में निवेश का इंतज़ार कर रहा है? मैं आपको दावे के साथ बता रहा हूं कि वो इसका इंतज़ार नहीं कर रहे. चीन ही नहीं पूरी दुनिया भविष्य के निवेश के मामले में हमसे आगे निकल रही है.''

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