इसराइल और फ़लस्तीनियों के संघर्ष विराम पर मुस्लिम देश क्या बोले?

फ़लस्तीन

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दुनिया भर में इसराइल और फ़लस्तीन के बीच हिंसक संघर्ष को रोकने के लिए प्रदर्शन हुए

इसराइल और फ़लस्तीनियों के बीच 11 दिन तक चले हिंसक संघर्ष के रुकने पर बड़े मुस्लिम देशों ने अलग-अलग तरह से प्रतिक्रिया दी है.

शुक्रवार को दोनों पक्षों के बीच संघर्ष विराम की घोषणा की गई थी. दोनों ने ही संघर्ष विराम को इस 'टकराव में अपनी जीत' बताया.

ख़बरों के अनुसार, संघर्ष-विराम के लागू होते ही बड़ी संख्या में फ़लस्तीनी लोग ग़ज़ा में सड़कों पर उतरकर जश्न मनाने लगे थे.

इस बीच हमास ने यह चेतावनी भी दी कि उसके हाथ अभी ट्रिगर से हटे नहीं हैं; यानी वो इसराइली हमले की स्थिति में जवाब देने को तैयार है.

दोनों पक्षों ने 11 दिन की लड़ाई के बाद आपसी सहमति से संघर्ष-विराम का निर्णय लिया.

इस दौरान फ़लस्तीनियों के ज़्यादा लोग मारे गये और संपत्ति का भी उन्हें ही ज़्यादा नुक़सान हुआ.

बताया गया कि इसराइली कैबिनेट ने आपसी सहमति और बिना शर्त के युद्ध-विराम के फ़ैसले पर मुहर लगा दी थी.

हमास के एक अधिकारी ने भी शुक्रवार को इसकी पुष्टि की थी कि ये सुलह आपसी रज़ामंदी से और एक साथ हुई है.

ग़ज़ा में लड़ाई 10 मई को शुरू हुई थी. इससे पहले इसराइल और फ़लस्तीनी चरमपंथियों के बीच पूर्वी यरुशलम को लेकर कई हफ़्ते से तनाव था.

दोनों पक्षों में लड़ाई होने के बाद, अंतरराष्ट्रीय समुदाय दोनों में सुलह कराने की कोशिश कर रहा था. ख़ासकर मुस्लिम देश इसराइल के ख़िलाफ़ एक मोर्चा बनाने को लेकर काफ़ी सक्रिय दिख रहे थे.

युद्ध विराम की घोषणा के बाद इस्लामिक देशों ने क्या कहा?

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बदलती राय से कमज़ोर पड़ेगा इसराइल: इमरान ख़ान

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने कहा है कि "फ़लस्तीनियों के मुद्दे पर दुनिया की बदलती राय ही शक्तिशाली देशों को इसराइल से अपना समर्थन वापस लेने को मजबूर करेगी."

इमरान ख़ान ने कहा कि "दुनिया भर में फ़लस्तीनियों के मुद्दे पर लोगों की सोच बदल रही है जो कि एक अच्छा संकेत है, और वो दिन दूर नहीं जब फ़लस्तीनियों को उनके अधिकार मिलेंगे."

शुक्रवार को युद्ध-विराम की घोषणा के बाद, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने फ़लस्तीनियों के समर्थन में एक बयान जारी किया था.

उन्होंने कहा, "अब से पहले, मैंने कभी भी पश्चिमी मीडिया और राजनेताओं को इसराइल के ज़ुल्म के ख़िलाफ़ एक तरह बोलते नहीं देखा था. सोशल मीडिया इस बदलाव की सबसे बड़ी वजह है जिसने इसराइलियों की हक़ीक़त को दुनिया के सामने खोलकर रख दिया."

"जब से इसराइल बना, तभी से पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर फ़लस्तीनियों का समर्थन किया है."

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शाह महमूद क़ुरैशी

इमरान ख़ान ने अपने विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी की भी यह कहते हुए तारीफ़ की है कि उन्होंने संयुक्त राष्ट्र समेत अन्य मंचों पर इसराइल के अत्याचार के ख़िलाफ़ बहुत सही समय पर आवाज़ उठाई.

इमरान ख़ान ने बताया कि उन्होंने इस मुद्दे पर सऊदी अरब, तुर्की और फ़लस्तीनी नेताओं से बात की और उन्हें विश्वास दिलाया कि पाकिस्तान फ़लस्तीनी लोगों और उनके अधिकारों के लिए हमेशा साथ खड़ा रहेगा.

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दुनिया को बताएंगे कि इसराइल कितना बड़ा आतंकी मुल्क़ है: अर्दोआन

तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप अर्दोआन ने कहा है कि "वो दुनिया को दिखाएंगे कि इसराइल कितना बड़ा आतंकी मुल्क़ है."

प्रेस से बात करते हुए अर्दोआन ने कहा कि "हमारे विदेश मंत्री और उनके समकक्ष, जिनके साथ हम सहयोग से कार्य करते हैं, उन्होंने गुरुवार को हमारे एक सांसद और यूएनजीए के अध्यक्ष वोल्कन बोज़किर की अध्यक्षता में एक सफ़ल सत्र आयोजित किया.''

''वहाँ उन्होंने बताया कि कैसे इसराइल फ़लस्तीनियों के हक़ मार रहा है, कैसे उसने ग़लत तरीक़े से उनकी ज़मीन पर कब्ज़ा जमाया हुआ है. ये सब हम दुनिया को बतायेंगे. हम रुकेंगे नहीं. हम दुनिया को मानचित्र दिखाकर यह साबित करेंगे कि इसराइल कितना बड़ा आतंकी मुल्क़ है, क्योंकि पूरी दुनिया को इसका पता चलना चाहिए."

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अरब, फ़लस्तीनी और इसराइलियों की अगली पीढ़ी के लिए शांति ज़रूरी: यूएई

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बात सरहद पार

दो देश,दो शख़्सियतें और ढेर सारी बातें. आज़ादी और बँटवारे के 75 साल. सीमा पार संवाद.

बात सरहद पार

समाप्त

इसराइल और फ़लस्तीनियों के बीच संघर्ष विराम की ख़बर आने के बाद, संयुक्त अरब अमीरात के विदेश मंत्रालय द्वारा संयुक्त राष्ट्र में एक बयान दिया गया.

इसमें संयुक्त अरब अमीरात ने कहा है कि "यूएई इसराइल और फ़लस्तीनियों के बीच बढ़ते तनाव और हिंसा को लेकर बहुत चिंतित था. इसमें जो लोग मारे गए, उनके परिवारों के साथ हमारी पूरी संवेदना है. इस हिंसक संघर्ष को रुकवाने के लिए संयुक्त राष्ट्र ने बार-बार जो शांति की अपील की, उसके लिए हम संगठन का शुक्रिया अदा करते हैं.''

''हम मानते हैं कि अंतरराष्ट्रीय दबाव की वजह से इस हिंसक संघर्ष को रोकने में मदद मिली. बातचीत से ही इस मसले को हल किया जा सकता है ताकि मध्य-पूर्व में शांति रहे. इसराइल ने सारे अंतरराष्ट्रीय क़ानूनों को तोड़ते हुए फ़लस्तीनियों पर हमले किये. यह अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकारों के ख़िलाफ़ था."

संयुक्त अरब अमीरात ने कहा है कि वो मध्य-पूर्व में शांति के लिए होने वाली हर कोशिश का समर्थन करेगा.

संयुक्त अरब अमीरात ने यह भी कहा कि वो फ़लस्तीनियों, अरब और इसराइलियों की आने वाली पीढ़ियों को एक शांत माहौल देने के लिए ना सिर्फ़ क्षेत्रीय, बल्कि अंतरराष्ट्रीय सहयोगियों के साथ काम करने को तैयार है.

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शेख मोहम्मद बिन अब्दुल रहमान अल-थानी

क़तर ने इसराइल-फ़लस्तीनी संघर्ष-विराम का स्वागत किया

क़तर के विदेश मंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुल रहमान अल-थानी ने इसराइल और फ़लस्तीनियों के बीच युद्ध-विराम का स्वागत किया है.

उन्होंने कहा कि आम लोगों की सुरक्षा के लिए जंग पर रोक ज़रूरी है.

फ़लस्तीनियों के मुद्दे पर उन्होंने एक कॉर्डिनेशन बैठक की जिसमें संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने भी शिरकत की.

शेख मोहम्मद ने कहा कि फ़लस्तीनियों के कब्ज़े वाले इलाक़े में बेगुनाह लोगों के घरों पर बम बरसाये गए और निहत्थे लोगों को मरने के लिए छोड़ दिया गया जो कि चिंताजनक है.

क़तर ने ग़ज़ा में हवाई हमले करने के लिए इसराइल की कड़े शब्दों में आलोचना की.

क़तर ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के बारे में भी कहा है कि इस हिंसक संघर्ष के दौरान संगठन की निष्क्रियता इस अंतरराष्ट्रीय संस्था की विश्वसनीयता पर कई सवाल खड़े करती है.

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सऊदी अरब फ़लस्तीनियों के साथ: किंग सलमान

सऊदी के किंग सलमान बिन अब्दुल अज़ीज़ अल-सऊद ने फ़लस्तीनियों के नेता महमूद अब्बास को यह भरोसा दिलाया है कि सऊदी अरब फ़लस्तीनी लोगों और उनके संघर्ष के साथ खड़ा है.

शुक्रवार को किंग सलमान ने अब्बास से फ़ोन पर बात की जिसकी जानकारी सऊदी अरब की सरकारी समाचार एजेंसी एसपीए ने अपनी रिपोर्ट में दी है.

रिपोर्ट के अनुसार, किंग सलमान ने सऊदी अरब के विदेश मंत्री प्रिंस फ़ैसल बिन फ़हरान को निर्देश दिया है कि वो अंतरराष्ट्रीय मंचों पर फ़लस्तीनियों की स्थिति को मज़बूत करने की तमाम कोशिशें करते रहें.

सऊदी प्रेस एजेंसी (एसपीए) ने लिखा है कि "किंग सलमान ने फ़लस्तीनियों को यह विश्वास दिलाने की कोशिश की है कि उनकी सरकार इसराइली हमलों को रोकने के लिए हर संभव कोशिश करेगी. साथ ही वे (किंग सलमान) फ़लस्तीनी लोगों की सुरक्षा और क्षेत्र में शांति की कामना करते हैं."

किंग सलमान ने इसराइली हवाई हमलों की निंदा की जिसमें सैकड़ों बेगुनाह लोग घायल हुए और कई लोग मारे गये.

शुक्रवार को सऊदी अरब ने इसराइल और फ़लस्तीनियों के बीच युद्ध-विराम की घोषणा का स्वागत किया था. साथ ही इसमें मिस्र की भूमिका और अंतरराष्ट्रीय दबाव को अहम बताया था.

सऊदी अरब के विदेश मंत्री ने शुक्रवार को एक बयान में कहा, "हम मिस्र द्वारा किये गये प्रयासों की प्रशंसा करते हैं. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी जो कोशिशें हुईं, उससे ही ग़ज़ा में शांति हो पायी है. हम मानते हैं कि फ़लस्तीनियों को उनका अलग देश मिलना चाहिए."

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इसराइल पर मुक़दमा चले: ख़ामेनेई

ईरान के सर्वोच्च नेता आयातुल्लाह अली ख़ामेनेई ने सभी मुस्लिम देशों से फ़लस्तीनियों को सैन्य और आर्थिक रूप से समर्थन देने के अलावा ग़ज़ा के पुनर्निर्माण में उनकी मदद करने का आह्वान किया है.

ख़ामेनेई ने शुक्रवार को, इसराइल और फ़लस्तीनियों के बीच 11 दिन तक चले हिंसक संघर्ष के थमने के बाद यह बयान दिया.

इसराइल के साथ हिंसक संघर्ष के दौरान ईरान ने खुलकर फ़लस्तीनियों का समर्थन किया.

ईरान ग़ज़ा-वेस्ट बैंक क्षेत्र में सक्रिय इस्लामिक चरमपंथी समूह हमास का भी समर्थन करता है.

हमास के अलावा, ईरान ने कब्ज़े वाले वेस्ट बैंक में फ़लस्तीनी आबादी के नेता मोहम्मद अब्बास का भी समर्थन किया है.

आयातुल्लाह अली ख़ामेनेई ने अपने ताज़ा बयान में कहा कि "मुस्लिम देशों को बड़ी ईमानदारी से फ़लस्तीनियों की सैन्य और वित्तीय सहायता करनी चाहिए, ताकि वो ग़ज़ा के बुनियादी ढांचे को फिर से खड़ा कर सकें."

आयातुल्लाह अली ख़ामेनेई ने दुनिया के सभी मुसलमानों से यह माँग की है कि वो अपनी-अपनी सरकारों से फ़लस्तीनियों का समर्थन करने की अपील करें.

ख़ामेनेई ने कहा कि "इसराइली शासन के सभी 'प्रभावशाली तत्वों' और दोषी प्रधानमंत्री नेतन्याहू पर अंतरराष्ट्रीय और स्वतंत्र अदालतों द्वारा मुक़दमा चलाया जाना चाहिए."

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फ़लस्तीनियों की ऐतिहासिक जीत: ईरान के विदेश मंत्री

इसराइल और फ़लस्तीनियों के बीच युद्ध-विराम से पहले ख़ामेनेई ने कहा था कि "यहूदी सिर्फ़ ताक़त की भाषा समझते हैं. इसलिए फ़लस्तीनियों को अपनी शक्ति और प्रतिरोध बढ़ाना चाहिए ताकि अपराधियों को आत्म-समर्पण करने और उनके क्रूर कृत्यों को रोकने के लिए मजबूर किया जा सके."

ख़ामेनेई से पहले ईरान के विदेश मंत्री ने कहा था कि फ़लस्तीनियों ने इसराइल पर एक 'ऐतिहासिक जीत' हासिल की है.

ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता सईद ख़ातिबज़ादेह ने इस संबंध में एक ट्वीट भी किया जिसमें उन्होंने लिखा, "हमारे फ़लस्तीनी भाई-बहनों को इस ऐतिहासिक जीत की बधाई. आपके प्रतिरोध ने हमलावर को पीछे हटने पर मजबूर कर दिया."

ईरान के रिवॉल्युशनरी गार्ड्स ने भी एक बयान में कहा कि "फ़लस्तीनियों का संघर्ष पत्थरों के इस्तेमाल से शक्तिशाली और सटीक मिसाइलों के प्रयोग तक चला गया है. ऐसे में इसराइल को भविष्य में कब्ज़े वाले क्षेत्रों के भीतर और ज़्यादा घातक वार सहना पड़ सकता है."

इस बीच ईरान ने एक देसी लड़ाकू ड्रोन का भी प्रदर्शन किया जिसके बारे में कहा जा रहा है कि वो दो हज़ार किलोमीटर तक मार कर सकता है. ईरान के सरकारी मीडिया के अनुसार, ईरान ने फ़लस्तीनियों के संघर्ष के सम्मान में इस नये ड्रोन का नाम 'ग़ज़ा' रखा है.

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