रूस और इस्लामिक देशों को लेकर बोले तुर्की के राष्ट्रपति अर्दोआन

तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप अर्दोआन

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तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप अर्दोआन

तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप अर्दोआन ने कहा है कि वो आर्थिक मोर्चे पर रूस और इस्लामिक देशों के साथ अपने संबंधों को और मज़बूत बनाने की दिशा में काम कर रहा है.

इसी महीने तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप अर्दोआन ने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से भी फ़ोन पर बात की थी जो द्विपक्षीय और क्षेत्रीय मसलों पर आधारित थी. उस दौरान अर्दोआन ने जिनपिंग से कहा था कि तुर्की और चीन के बीच वाणिज्यिक और राजनयिक संबंधों को लेकर बहुत संभावनाएं हैं.

तुर्की के सरकारी प्रसारक टीआरटी वर्ल्ड के मुताबिक़ अब राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप अर्दोआन ने कहा है कि वे रूस और इस्लामिक देशों के साथ आर्थिक, वाणिज्यिक, रक्षा, पर्यटन और निवेश सहयोग में तरक्की को काफ़ी महत्व देते हैं क्योंकि यह दोनों ही देशों के लिए फ़ायदेमंद है.

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अर्दोआन ने ये बात 12वें कज़ान शिखर सम्मेलन के दौरान कही. अर्दोआन ने कहा कि पहली तिमाही में आए देश से निर्यात और विकास के आंकड़े 2021 में तुर्की को मिल रही लगातार सफलता को दर्शा रहे हैं.

अर्दोआन ने कहा, "हम इस गति को बरकरार रखेंगे जो हमने व्यापार, निवेश, उद्योग और लॉजिस्टिक के क्षेत्र में कोरोना महामारी के दौरान अवसरों के खुले दरवाज़े के ज़रिए सबसे प्रभावी तरीक़े से प्राप्त किया है."

अर्दोआन ने कहा, "जहां एक तरफ़ हम भूगोल के हिसाब से सबसे नज़दीकी पड़ोसी से शुरू कर अपने पड़ोसियों के साथ रिश्ते में और मज़बूती ला रहे हैं तो वहीं दूसरी तरफ़ हम इस्लामिक देशों के बीच व्यापार और निवेश के अवसरों को बढ़ाने का प्रयास भी कर रहे हैं."

इस दौरान उन्होंने बताया, "आर्थिक और वाणिज्यिक सहयोग के लिए इस्लामिक सहयोग संगठन (ओआईसी) में उठाए गए क़दमों के अलावा हमने हाल ही में हलाल फूड के स्टैंडर्ड और सर्टिफिकेशन को लेकर अपनी गतिविधियों में भी तेज़ी लाई है."

अर्दोआन ने कहा कि महामारी के दौरान के आर्थिक आँकड़े बताते हैं कि नकारात्मक आर्थिक माहौल और सप्लाई-लॉजिस्टिक चेन में गतिरोध के बावजूद तुर्की में 2020 में 1.8 फ़ीसद की विकास दर देखी गई.

उन्होंने ज़ोर दिया कि तुर्की हलाल फूड के मामले को अपने एजेंडे में शामिल करना जारी रखेगा. इसके बारे में उन्होंने कहा कि इसमें बहुत अधिक आर्थिक क्षमता है और इसे संस्थागत रूप प्रदान करने और मानकीकरण में उनके देश ने बहुत प्रयास किए हैं.

अर्दोआन ने उम्मीद जताई कि कज़ान शिखर सम्मेलन देश के इन प्रयासों में सकारात्मक योगदान देगा.

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बढ़ती महंगाई

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एक ओर अर्दोआन देश से निर्यात और विकास के आँकड़े पर वाहवाही लूटने का प्रयास कर रहे हैं वहीं देश के सामने एक बार फिर आर्थिक संकट के आसार दिख रहे हैं.

देश के केंद्रीय बैंक के गवर्नर को लगातार बदलते रहने की वजह से अंतरराष्ट्रीय निवेशक तुर्की को लेकर असमंजस की स्थिति में हैं. अर्दोआन बीते दो सालों में केंद्रीय बैंक के गवर्नर को चार बार बदल चुके हैं.

2023 में देश में चुनाव होने हैं. उसी साल ऑटोमन साम्राज्य के ख़ात्मे के साथ आधुनिक गणतंत्र बने तुर्की को 100 साल पूरे होने वाले हैं. देश की मुद्रा लीरा पर दिखने वाले मुस्तफ़ा कमाल अतातुर्क तब देश के पहले राष्ट्रपति बने थे.

लेकिन लगभग 100 वर्ष के बाद देश के वर्तमान राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप अर्दोआन के सामने एक बड़ा आर्थिक संकट मुंह बाए खड़ा है.

इस साल गर्मियों में अर्दोआन ने अपने केंद्रीय बैंक के गवर्नर से ब्याज़ दरों में कटौती करने को कहा था. उन्होंने कहा था कि वे जुलाई, अगस्त में ब्याज़ दरों में कटौती देखना चाहते हैं.

लेकिन तुर्की की सरकारी सांख्यिकीय संस्थान ने बताया कि देश में महंगाई का हाल अब तक के सबसे ख़राब पूर्वानुमानों से भी बदतर है.

उसने बताया कि जून में मुद्रास्फीति बढ़कर 17.5 फ़ीसद हो गई है. यह केंद्रीय बैंक के मुद्रास्फ़ीति के लक्ष्य 5 फ़ीसद के तीन गुने से भी अधिक है.

इसका मतलब साफ़ था कि ब्याज़ दरों में कटौती के लिए अर्दोआन को फ़िलहाल इंतज़ार करना होगा. केंद्रीय बैंक के पास ब्याज़ दरों को अपरिवर्तित रखने के अलावा कोई और विकल्प नहीं था. जो स्थिति दिख रही है उससे जानकारों को अगस्त में भी ब्याज़ दरों के अपरिवर्तित रहने की उम्मीद है.

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लीरा में गिरावट

पाँच साल पहले तख़्तापलट की नाकाम कोशिशों के समय 15 जुलाई 2016 को लीरा में बड़ी गिरावट दर्ज की गई. तब एक डॉलर क़रीब तीन लीरा के बराबर हो गया था.

साल 2018 में तुर्की ने एक बड़े आर्थिक संकट का सामना किया. तब तुर्की की मुद्रा लीरा में अप्रत्याशित गिरावट देखने को मिली. स्पेन, फ़्रांस, अमेरिका, इटली, जापान के बैंकों ने तुर्की को बेतहाशा कर्ज़ दिया था. कर्ज़ की बेतहाशा मार से तुर्की की अर्थव्यवस्था लड़खड़ा गई.

अगस्त 2018 में जब अमेरिका ने स्टील और एल्युमिनियम पर आयात कर को बढ़ाकर दोगुना कर दिया तो लीरा में डॉलर के मुकाबले 16 फ़ीसद की गिरावट दर्ज की गई.

बीते दो वर्षों से लगातार डगमगाती लीरा तब तक कुल 40 फ़ीसद की गिरावट झेल चुका था. उस वर्ष सितंबर के महीने में एक डॉलर 6.54 लीरा के बराबर पहुंच गया.

तब से अर्दोआन लगातार अपनी आर्थिक नीति में बदलाव करते रहे लेकिन अर्थव्यवस्था में गिरावट ही देखी गई.

अपनी ग़ैर-पारंपरिक आर्थिक नीतियों के बीच उन्होंने इस साल 22 मार्च को तीसरी बार सेंट्रल बैंक के गवर्नर को इसलिए बदल दिया क्योंकि उन्होंने ब्याज़ दरों में बढ़ोतरी की थी जो बढ़ती महंगाई को संभालने के लिए ज़रूरी था. लेकिन अर्दोआन ब्याज़ दरों में कटौती चाहते थे.

ये वो वक़्त था जब एक डॉलर की कीमत 9 लीरा के बराबर पहुँच गई थी.

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सुधार के संकेत

इस साल जनवरी से ही लगातार गिरावट देखने को मिला लेकिन कोरोना महामारी के दौरान इसमें सुधार के संकेत मिले.

तुर्की में मई के महीने के पहले 15 दिन कोरोना वायरस महामारी की वजह से लॉकडाउन था. लेकिन उस दौरान क़ीमतें उस हिसाब से नहीं बढ़ रही थीं. आर्थिक विशेषज्ञों ने तब कहा था कि लॉकडाउन के दौरान कुछ उत्पादों की बिक्री पर प्रतिबंध से क़ीमतों के बढ़ने पर लगाम लगा था.

जुलाई के महीने में पहली बार इस साल लीरा में मज़बूती दिखी. इस महीने लीरा में तीन फ़ीसद की मज़बूती आई.

केंद्रीय बैंक के मुताबिक़ निर्यात में मज़बूत वृद्धि की प्रवृति और पर्यटन गतिविधियों को प्रोत्साहित करने वाले वैक्सीनेशन कार्यक्रम में प्रगति के कारण चालू खाते में अधिक मुद्रा जमा होने की उम्मीद है.

इस बीच कोरोना क्वारंटीन मुक्त ट्रैवल, सस्ती क़ीमतें, संस्कृति, प्रकृति, खान-पान और मौसम के वजह से पर्यटकों के बीच इस्तांबुल खाड़ी के अन्य देशों के मुक़ाबले पसंदीदा जगह बना है.

तुर्की का पर्यटन क्षेत्र वहाँ की अर्थव्यवस्था में 12 फ़ीसद का योगदान देता है और वर्तमान व्यापार असंतुलन को दूर करने के लिए राजस्व का एक प्रमुख स्रोत है.

लिहाजा अर्दोआन देश की अर्थव्यवस्था को सुधारने के लिए निर्यात के साथ साथ टूरिज़म सेक्टर पर निर्भर कर रहे हैं. 12 जून से ही तुर्की ने विदेशी पर्यटकों के लिए अपने देश के दरवाज़े खोल दिए हैं.

ट्रेडिंग इकोनॉमिक्स के मुताबिक़ पर्यटन के लिए खोले जाने के बाद तुर्की में जून के महीने में ही 20 लाख से अधिक विदेशी टूरिस्ट आए. इसमें बीते वर्ष की तुलना में 853.4 फ़ीसद का इज़ाफ़ा देखने को मिला. हालांकि यह बढ़ोतरी दो वर्ष पहले की तुलना में आधे से भी कम है. लेकिन आर्थिक संकट के कगार पर खड़े तुर्की के लिए यह राहत का संकेत भी है.

लिहाजा देश की अर्थव्यवस्था में सुधार लाने के इरादे से अर्दोआन की नज़र रूस, जर्मनी और इस्लामिक देशों से आने वाले विदेशी टूरिस्ट की संख्या बढ़ाने पर टिकी होगी क्योंकि इन देशों से ही सबसे अधिक पर्यटक देश में आते हैं.

अब जबकि लीरा की स्थिति में सुधार देखने को मिल रहा है और पर्यटकों की संख्या भी बढ़ रही है तो आर्थिक विश्लेषकों की मानें तो तुर्की को अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के विश्वास को बहाल करना होगा. साल की शुरुआत से ही जानकार ये कहते रहे हैं कि तुर्की की अस्थिर अर्थव्यवस्था में विदेशी निवेशक अपना विश्वास खो रहे हैं.

उनका कहना है कि देश में निवेश आएगा तो आर्थिक विकास बढ़ेगा और इसके परिणामस्वरूप लीरा की स्थिति और मज़बूत होगी.

कॉपी- अभिजीत श्रीवास्तव

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