फलस्तीन को पूर्ण सदस्यता दिए जाने की मांग

 शुक्रवार, 28 सितंबर, 2012 को 03:43 IST तक के समाचार

महमूद अब्बास ने फलस्तीन को संयुक्त राष्ट्र में पूर्ण मान्यता देने की मांग दोहराई है

फलस्तीनी नेता महमूद अब्बास ने संयुक्त राष्ट्र से लगातार दूसरे साल एक बार फिर अपील की है कि फलस्तीन को विश्व संस्था में पूर्ण सदस्य का दर्जा दिया जाए.

लेकिन उन्होंने कहा कि इस बीच वह कोशिश कर रहे हैं कि फलस्तीन को गैर-राज्य का दर्जा हासिल हो जाए.

शुक्रवार को संयुक्त राष्ट्र महा सभा के 67वें अधिवेशन को संबोधित करते हुए महमूद अब्बास ने कहा, “हम फलस्तीन को संयुक्त राष्ट्र के पूर्ण सदस्य का दर्जा दिए जाने के लिए कोशिशें जारी रखेंगे और इसी के तहत हम महा सभा के सामने फलस्तीन को गैर-सदस्य राज्य के तौर पर मान्यता दिए जाने संबंधी एक प्रस्ताव रखेंगे. और हमें पूरा भरोसा है कि उसको भरपूर समर्थन मिलेगा. हम यह इसराइल के खिलाफ़ नहीं बल्कि फलस्तीन को मान्यता दिए जाने के लिए कर रहे हैं जो हमारा हक है.”

"हम फलस्तीन को संयुक्त राष्ट्र के पूर्ण सदस्य का दर्जा दिए जाने के लिए कोशिशें जारी रखेंगे और इसी के तहत हम महा सभा के सामने फलस्तीन को गैर-सदस्य राज्य के तौर पर मान्यता दिए जाने संबंधी एक प्रस्ताव रखेंगे. हम यह इसरायल के खिलाफ़ नहीं बल्कि फलस्तीन को मान्यता दिए जाने के लिए कर रहे हैं जो हमारा हक है."

महमूद अब्बास, फलस्तीन के राष्ट्रपति

फलस्तीनी नेता का कहना था कि फलस्तीन को पूर्ण सदस्य का दर्जा न दिए जाने के लिए पिछले साल कुछ देशों ने मुहिम चलाई और वह फ़लस्तीन की दर्ख्वास्त को नाकाम करने में सफ़ल हो गए.

लेकिन उनका कहना था कि पिछले साल ही फलस्तीन को यूनेस्को की सदस्यता के लिए विश्व के देशों ने भरपूर समर्थन दिया और पिछले एक साल से फलस्तीन उस संस्था में पूरी निष्ठा और ज़िम्मेदारी के साथ अपना योगदान दे रहा है.

यहूदी बस्तियां

महमूद अब्बास ने विस्तार से बयान किया कि किस तरह इसराइल द्वारा नई यहूदी बस्तियां बसाने का काम जारी रखकर फलस्तीनी लोगों की ज़मीनों पर कब्ज़ा किया जा रहा है.

उन्होंने कहा कि फलस्तीनी लोगों पर लगातार हमले किए जा रहे हैं.

उनका कहना था कि इसराइल नहीं चाहता कि फलस्तीनी लोगों को उनका अपना देश हासिल हो.

फ़लस्तीनी नेता के भाषण के बाद इसराइली प्रधानमंत्री बेन्यामिन नेतान्याहू ने महा सभा को संबोधित करते हुए कहा कि फलस्तीनियों को इसराइल के साथ बातचीत करके ही देश हासिल हो सकता है.

बेन्यामिन नेतान्याहू ने कहा, “मैं फलस्तीनी नेताओं से कहना चाहता हूं कि संयुक्त राष्ट्र में आरोप लगाने वाले भाषणों के ज़रिए हमारे बीच समस्याएं सुलझेंगी नहीं. या देश की स्थापना के एकतरफ़ा एलान से भी हल निकलने वाला नहीं है. बल्कि हमें एक साथ बैठकर बातचीत करना चाहिए जिससे कुछ हल निकले और एक सेना-रहित फलस्तीनी देश एक और सिर्फ़ एक यहूदी देश को मान्यता दे.”

बेन्यामिन नेतान्याहू का कहना है कि फलस्तीन का मुद्दा बातचीत के जरिए ही सुलझ सकता है

लेकिन इसराइली प्रधानमंत्री का अधिकतर भाषण ईरान पर ही केंद्रित था.

ईरान के परमाणु कार्यक्रम को विश्व के लिए खतरा बताते हुए बेन्यामिन नेतान्याहू ने कहा कि अगर ईरान को परमाणु हथियार हासिल हो गए तो कोई भी सुरक्षित नहीं बचेगा.

इसराइली नेता का कहना था कि ईरान से इसराइल को अस्तित्व का खतरा है.

उन्होंने कहा कि हर हाल में ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना होगा. और इसके लिए जल्दी कुछ करना होगा क्यूंकि पिछले साल ही ईरान ने यूरेनियम का संवर्धन और तेज़ कर दिया है.

बेन्यामिन नेतान्याहू का कहना था, “इरान के परमाणु कार्यक्रम के लिए एक लाल रेखा खींचनी ज़रूरी है क्योंकि उसी से ईरान पीछे हटेगा.”

इस खतरे को दर्शाने के लिए इसराइली नेता ने महा सभा में बैठे विश्व भर के नेताओं के सामने एक डायग्राम पेश किया जिससे यह दर्शा सकें कि उनके मुताबिक किस प्रकार ईरान तेज़ी से परमाणु हथियार हासिल करने के करीब है और कब उसे रोकना होगा.

"अगर ईरान को परमाणु हथयार हासिल हो गए तो कोई भी सुरक्षित नहीं बचेगा."

बेन्यामिन नेतान्याहू, इसरायल के प्रधानमंत्री

नेतान्याहू का कहना है कि ईरान अगले साल तक परमाणु हथियार हासिल कर लेगा.

इसराइल अमरीका से मांग करता रहा है कि सैन्य कार्रवाई के लिए एक समय सीमा तय की जानी चाहिए.

लेकिन अमरीका और इसराइल के बीच इस बात पर मतभेद हैं. अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा का मानना है कि अभी कूटनीति और शांतिपूर्ण तरीके से इस मुददे का हल निकाला जा सकता है.

अमरीका ने ईरान के खिलाफ़ कड़े आर्थिक और वित्तीय प्रतिबंध लगा रखे हैं और अमरीकी प्रशासन का कहना है कि वह प्रतिबंध असर भी कर रहे हैं.

लेकिन ईरान इंकार करता है कि वह परमाणु हथियार हासिल करना चाहता है. ईरान का कहना है कि परमाणु कार्यक्रम सिर्फ़ शांतिपूर्ण प्रयोग के लिए चलाया जा रहा है.

माना जाता है कि इसराइल के पास करीब 200 परमाणु बम मौजूद हैं.

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