स्वात: पहली बार देखी बिजली की रोशनी

  • 27 सितंबर 2012
बिजली
Image caption पाकिस्तान में बिजली की किल्लत एक बड़ी समस्या है.

चरमपंथियों की ‘सुरक्षित पनाहगाह’ के तौर पर बदनाम स्वात घाटी का बुयून गांव रोशनी से चमक रहा है. पाकिस्तान बनने के 65 साल बाद इस गांव ने पहली बार बिजली की रोशनी देखी है.

कालाम इलाके में पहाड़ की चोटी पर बसे बूयूंन गांव में पानी से बिजली बनाई जा रही है.

खास बात ये है कि इस गांव में पहुंची बिजली पर लोड शेडिंग का भी असर नहीं होगा जिससे पूरा पाकिस्तान परेशान है.

रोशन हुई जिंदगी

गांव में रोशनी आने से स्थानीय लोग बहुत खुश हैं. स्थानीय विकास संगठन के अध्यक्ष हजरत मोहम्मद बताते हैं, “बहुत खुशी महसूस हुई. हमने ये रोशनी कभी देखी नहीं थी. न हमारे बुजुर्गों ने देखी और न ही हमारे नौजवानों ने.”

स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकार ने उनके इलाके के विकास के लिए कुछ नहीं किया है.

एक युवक सरदार हुसैन कहते हैं, “65 साल हो गए सरकार ने हमारी किसी मांग को पूरा नहीं किया. स्कूल खाली पड़े हैं. बाकी बुनियादी सुविधाएं भी यहां नहीं हैं. यहां बिजली भी नहीं है. ये कालाम इलाका पाकिस्तान से बाहर का इलाका तो नहीं है, जो सरकार हमें लगातार नजरअंदाज करती जा रही है.”

बुयूंन में बिजली के सपने को अर्धसरकारी संगठन सरहद रुरल सपोर्ट (एसआरएसपी) प्रोग्राम को साकार किया है.

पर्यटन पर मार

बुयून गांव में तो बिजली पहुंच गई है लेकिन आपपास ऐसे बहुत से गांव मौजूद हैं जहां बिजली अब भी एक सपना है.

Image caption स्वात घाटी के बहुत से इलाके अब भी बिजली से महरूम हैं.

पाकिस्तान में 2010 में आई विनाशाकारी बाढ़ से इस इलाके में भारी तबाही हुई थी. कई सालसे कालाआम में बिजली की बुनियादी सुविधा मौजूद नहीं हैं. इसकी सबसे ज्यादा मार स्थानीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ कहे जाने वाले पर्यटन क्षेत्र पर पड़ रहा है.

बॉटलिंग एसोशिएशन कालाम के अध्यक्ष डॉक्टर अब्दुल वुदूद कहते हैं, “हम संसद में बैठे अपने राजनेताओं से पूछ रहे हैं कि हमने कौन सा गुनाह किया है, क्या हम यहां किसी दूसरे देश से आए हैं, हमारा पाकिस्तान में हिस्सा है या नहीं. तीन साल से हमारा कारोबार ठप पड़ा है. क्यों आज तक हमारी बिजली बहाल नहीं की गई है.”

वैसे बिजली हो या न हो, लेकिन शांति पूर्ण हालात ने ही इस साल बहुत से सैलानियों ने स्वात का रुख किया है.

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