विमान में बच्चा: मज़ा या सज़ा

Image caption एयर एशिया एयरलाइन बच्चों के शोरगुल से मुक्त हवाई सेवा देने की योजना बना रही है

ऐसा आपके साथ भी हुआ होगा. आप किसी विमान या ट्रेन में सफर कर रहे हों और आपकी आसपास की सीट पर कोई ऐसा व्यक्ति सफर कर रहा हो जिनके साथ छोटे बच्चे हों, ऐसे बच्चें जो ज़ोर-ज़ोर से रो रहे हो, चिल्ला रहे हों.

ऐसे में आपके सफर का मज़ा किरकिरा होता है और सुकून भी जाता रहता है. इस समस्या का आखिर क्या समाधान हो सकता है? इस समस्या के समाधान के तौर पर एक एयरलाइन का कहना है कि उसकी उड़ानों में बच्चे नहीं होंगे.

अक्सर ऐसा होता है जब विमान 35,000 फुट की ऊंचाईं पर पहुंचता है तो छोटे बच्चे ज़ोर-ज़ोर से रोने लगते हैं.

विमान में यात्रा कर रहे लोग कड़ी सुरक्षा जांच और तमाम दूसरी वजहों से पहले से ही परेशान होते हैं, ऐसे में बच्चे का रोना-चीखना उनके तनाव को और बढ़ा देता है.

समस्या और समाधान

बच्चा जब रोता है तो उसके माता-पिता भी परेशान हो जाते हैं और इससे दूसरों को हो रही असुविधा की वजह से उन्हें शर्मसार भी होना पड़ता है.

इन तमाम बातों को ध्यान में रखते हुए एक एयरलाइन ने कुछ ऐसी पेशकश की है, जिसे वो समाधान की संज्ञा देती है.

सस्ती हवाई सेवा एयर एशिया का कहना है कि वो अगले वर्ष फरवरी से ऐसी उड़ान शुरू करेगी जिसमें यात्रियों को बच्चों की मौजूदगी से होने वाली परेशानी से दो-चार नहीं होना पड़ेगा.

एयर एशिया का कहना है कि उसकी उड़ानों में इकॉनोमी क्लास में सात कतारें ऐसी होंगी, जहां कोई बच्चा नहीं होगा और ये व्यवस्था बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के होगी.

एयर एशिया दरअसल मलेशिया एयरलाइंस का अनुसरण कर रही है जिसने अप्रैल में घोषणा की थी कि वो कुआलालम्पुर से लंदन जाने वाले अपने विमानों में बच्चों वाले परिवारों की संख्या सीमित कर देगी.

बच्चों के रोने-चिल्लाने की वजह से परेशान होने वाले अन्य मुसाफिरों के लिए ये एक बड़ी राहत होगी.

पर क्या जो लोग बच्चों को साथ लेकर सफर करते हैं, उन्हें ये बात पसंद आएगी, क्या वे खुद को दोयम दर्जे के मुसाफिर महसूस नहीं करेंगे.

ममी ट्रेवल्स नामक ब्लॉग लिखने वाली कैथी विन्सटन की दस महीने की एक बिटिया है और वे उसके साथ स्पेन की यात्रा पर जाने का विचार कर रही हैं.

उनका मानना है कि बच्चों के साथ सफर कर रहे लोगों के लिए विमान में एक अलग जगह निर्धारित होने से उन्हें नाक-भौं सिकोड़ रहे उन लोगों का कम से कम मुंह तो नहीं देखना पड़ेगा जो बच्चों के रोने पर चिड़चिड़ा जाते हैं.

'इंडिपेन्डेंट' के ट्रेवल एडिटर साइमन कैल्डर कहते हैं कि बच्चों के साथ सफर कर रहे लोगों के साथ इस तरह का भेदभाव नहीं किया जाना चाहिए.

वे कहते हैं, ''मुझे लगता है कि लोगों को सहनशील बनने की जरूरत है. विमान में जिन लोगों को बच्चों की मौजूदगी से दिक्कत होती है, उन्हें इससे उबरने की जरूरत है. यदि उन्हें ये पसंद नहीं है तो वे अपने कानों में इयर-प्लग लगा लें. ये 21वीं सदी है जहां लोगों के पास आई-पॉड्स हैं.''

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