जहां पति मांगते हैं पत्नी से जेबखर्च

येन

योशिहिरो नोजावा हर महीने की 15 तारीख़ का बेसब्री से इंतज़ार करते रहते हैं. इस दिन उन्हें वेतन मिलता है और पत्नी से महीने का जेबखर्च भी. बहुत सारे भारतीय मर्दों की तरह नोजावा हर महीने अपना पूरा वेतन अपनी पत्नी मासामी के हाथों में सौंप देते हैं.

उसके बाद मासामी उन्हें क़रीब 20400 भरतीय रुपयों के बराबर 30000 जापानी येन देती हैं. किसी आम भारतीय मध्यमवर्गीय मर्द को यह रकम काफ़ी लग सकती है लेकिन दुनिया के सबसे महंगे शहर टोक्यो में यह जेबखर्च बस ठीक ठाक काम ही चला सकता है.

गृह मंत्री या वित्त मंत्री

नोजावा कहते हैं कि महीने के अंतिम पांच दिन उनके लिए बड़े ही कठिन होते हैं. उनकी पत्नी उन्हें घर से खाना बना कर देती हैं और उनकी शाहखर्ची उन्हें केवल सिगरेट तक ही ले जा सकती है.

नोजावा के दो बच्चे हैं, छह साल का रीनो और आठ साल का रेन. नोजावा की पत्नी मासामी ने बच्चों के होने के बाद नौकरी छोड़ दी और अब पूरा घर केवल नोजावा की कमाई पर चलता है.

एक शोध संस्था सॉफ्टब्रेन फील्ड के एक शोध के अनुसार 74 फीसदी जापानी घरों में बजट महिलायें ही चलाती हैं. नोजावा की तरह ही ताईसाकू कोबू का मासिक जेबखर्च उनकी पत्नी यूरिको ने पिछले 15 सालों से 50,000 येन या क़रीब 34000 भारतीय रुपयों पर रोक रखा है.

ताईसाकू कोबू हर साल अपना जेबखर्च बढवाने की कोशिश करते हैं और हर साल परास्त हो जाते हैं. कोबू कहते हैं "जब भी मैं जेबखर्च बढ़ाने की बात कहता हूँ मेरी पत्नी कागज़ पर पाईचार्ट बना कर मुझे कुल कमाई का पूरा हिसाब समझा देती हैं और मैं चुप हो जाता हूँ." यूरिको कहती हैं " सबसे ज़्यादा ख़र्च होता है घर के लिए गए ऋण और करों पर. उसके बाद हमारे लिए काफ़ी बचत करना ज़रूरी है क्योंकि हमारे बच्चे नहीं है और बुढ़ापे में यह पैसा हमारे काम आएगा."

ताईसाकू कोबू बताते हैं " मैंने अपनी कार, बाइक या हर वो शौक छोड़ दिया जो महँगा था."

घटते बजट

जापान के शिनसे बैंक के अनुसार जापान में औसत मासिक जेबखर्च क़रीब 27000 रुपयों के बराबर है जबकि 1990 में यह क़रीब 52000 रुपयों के बराबर था. और उस ज़माने की कीमतों के हिसाब से यह रकम और भी ज़्यादा थी.

लेकिन तब से जापानी अर्थव्यवस्था उन स्तरों को नहीं छू पाई है.

आम तौर पर एक आदमी औसतन 500 येन से ज़्यादा एक दिन के दोपहर के खाने पर ख़र्च नहीं कर सकता और इतने पैसे में शहर के व्यस्त महंगे बाजारों में एक कटोरा ढंग का नूडल भी नहीं खरीदा का सकता.

यूँ तो जापान में ज़्यादातर चीज़ें पुरुषों की पहुँच से बाहर होती जा रही हैं लेकिन उनके पास गम गलत करने के लिए शराब अब भी है.

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