अमरीका में भी पैसे दें, कतार कूद जाएँ

 रविवार, 7 अक्तूबर, 2012 को 16:07 IST तक के समाचार

पैसे देकर कतार में आगे जाने की नई संस्कृति को लेकर अमरीका में बहस छिड़ गई है

आप लंबी क़तार में लगे हों और समय के अभाव या किसी अन्य वजह से यदि अतिरिक्त पैसे देकर आप सबसे आगे पहुँच जाएँ तो...

यदि ये कहानी भारत के बारे में हो तो आश्चर्य की बात नहीं, क्योंकि दक्षिण एशिया के कई देशों में ऐसा अक्सर होता है. लेकिन यदि ये पश्चिमी देशों विशेष तौर पर अपनी लोकतांत्रिक परंपरा पर गर्व करने वाले अमरीका जैसे देश में हो तो हैरानी जरूर होगी.

ऐसा इसलिए क्योंकि अमरीकी और पाश्चात्य संस्कृति में इस बात का बड़ा महत्व है लाइन में खड़ा हर व्यक्ति बराबर है, चाहे वह कोई भी क्यों न हो.

अमरीका में अब इस संस्कृति में बदलाव आ रहा है और लाइन में सबसे पीछे खड़े होने के बावजूद लोग पैसा देकर सबसे आगे आ सकते हैं.

प्रयॉरिटी क्यू

अमरीका में आजकल लोग एक नई तरह की क़तार में खड़े हो रहे हैं जिसे प्रयॉरिटी क्यू कहा जाता है. यहां कुछ लोग पीछे खड़े होने के बावजूद पैसा देकर आगे निकल जाते हैं.

अमरीकी हवाई अड्डों पर तो प्रयॉरिटी क्यू की संस्कृति हर जगह देखने को मिल जाती है. प्रवेश खिड़कियों पर, सुरक्षा जांच में और यहां तक कि जहाज पर चढ़ने के लिए भी लोग इस सुविधा का फायदा उठा रहे हैं.

बहुत सी हवाई जहाज कंपनियां तो अपने यात्रियों को जहाज में इसी आधार पर प्रवेश कराती हैं कि किसने कितना पैसा दिया है.

यूरोप में रॉयनएयर जैसी सस्ती हवाई सेवाएं इसी वजह से अलोकप्रिय होने के बावजूद बहुत सफल हैं. लोगों को इस बात से शिकायत हो सकती है कि उन्हें पहले जगह पाने या फिर मनचाही सीट पाने के लिए ज्यादा पैसा देना पड़ रहा है, लेकिन कम कीमत वाली टिकट की वजह से लोग ऐसी हवाई कंपनियों में टिकट बुक कराना फायदेमंद समझते हैं और कराते भी हैं.

अमरीकी जीवन शैली में प्रयॉरिटी क्यू राजमार्गों से लेकर पार्कों तक में कई जगह देखे जा सकते हैं.

अटलांटा स्थित वॉटर पार्क में प्रयॉरिटी क्यू सिस्टम साल 2011 में लागू किया गया.

"मैं अपनी बेटी को कार से बस स्टॉप पर छोड आता था और लेन बदलकर वापस आ जाता था. और इस तरह से मैं महज 30-40 मिनट में अपने काम पर वापस आ जाता था."

क्रिस हेली, अमरीकी नागरिक

यहां कुछ लोग झूलों का लुत्फ उठाने के लिए लंबी क़तारों में खड़े रहते हैं. जबकि ज्यादा पैसे देकर हरी और सुनहरी रिस्ट बैंड खरीदने वाले लोग इस दौरान या तो तालाब में तैराकी करते हैं या फिर खाते-पीते रहते हैं.

राजमार्ग

साल 2011 में अटलांटा राज्य में राजमार्गों पर भी उन चालकों के लिए प्रयॉरिटी लेन की व्यवस्था कर दी जिनके पास पीच पास होते थे. इस पास को खरीदने वाले चालक सुविधानुसार अपनी लेन बदल सकते हैं.

बहुत से लोगों ने इस व्यवस्था की आलोचना की है और उनका कहना है कि ये व्यवस्था अमीर लोगों को फायदा पहुंचाने के लिए की गई है.

इस व्यवस्था के बाद रातोंरात जो चालक सड़क पर स्वच्छंद चलते थे अब उन्हें भारी ट्रैफिक का सामना करना पड़ रहा है, सिवाए उनके जो पैसा देते हैं.

क्रिस हेली अपने ब्लॉग पर लिखते हैं, “मैं अपनी बेटी को कार से बस स्टॉप पर छोड आता था और लेन बदलकर वापस आ जाता था. और इस तरह से मैं महज 30-40 मिनट में अपने काम पर वापस आ जाता था.”

वो आगे कहते हैं कि अब उन्हें इसमें करीब डेढ़ घंटे लग जाते हैं, “मैं हर महीने 120 डॉलर नहीं खर्च कर सकता, इसलिए अब मैं बेटी को बस स्टॉप तक छोड़ने ही नहीं जाऊंगा.”

आलोचना

जॉर्जिया राज्य के सीनेटर कर्ट थॉम्पसन इस व्यवस्था को गैर-अमरीकी कहते हैं, “मेरी निगाह में ये द्वेष की राजनीति है. ये उन लोगों को एक-दूसरे से अलग करती है जिनके पास पैसा है और जिनके पास नहीं है.”

सड़कों पर प्रयॉरिटी लेन ने जहां लोगों का गुस्सा भड़काया है वहीं अमरीकी कॉलेजों में प्रयॉरिटी क्यू व्यवस्था काफी विवादास्पद भी हो गई है.

पाश्चात्य संस्कृति में कतार में खड़े होने की व्यवस्था पर वहां के लोगों को गर्व रहता है

कैलिफोर्निया के सांटा मोनिका कॉलेज में इतनी भीड़ होती है कि छात्र फर्श पर बैठकर और खड़े होकर पढ़ते हैं.

कॉलेज के अध्यक्ष चुई त्सांग कहते हैं, “हमारी कक्षाएं पूरी तरह से भरी होती हैं. ये हमारे लिए गर्व की बात है कि लोग यहां पढ़ने के लिए इस तरह से दीवाने हैं.”

वो कहते हैं कि लोगों की पहुंच बढ़ाने के लिए वो एक योजना लेकर आए हैं.

इस योजना के तहत यदि कोई विद्यार्थी चार गुना ज्यादा फीस देता है तो कक्षा में उसकी सीट पक्की हो जाएगी.

लेकिन इस व्यवस्था से बहुत से लोग नाखुश भी हैं.

अमरीकी लोगों का बाजार व्यवस्था में बहुत ज्यादा यकीन है. और चूंकि प्रयॉरिटी क्यू व्यवस्था राजस्व बढ़ाने में कारगर साबित हो रही, इसलिए इसमें कोई आश्चर्य नहीं कि इसे सार्वजनिक क्षेत्र में भी लागू कर दिया जाए.

लेकिन सवाल ये भी उठता है कि क्या ये व्यवस्था निष्पक्ष और समान अवसर की वकालत करने वाले परंपरागत अमरीकी मूल्यों से मेल खाती है.

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