अतीत की कड़ियाँ जोड़ेगी 'दादी'

हूइज द दादी वेबसाइट

अपने बीते हुए कल और अपने वंश के बारे में कौन नहीं जानना चाहता. लेकिन कई बार हालात ऐसे हो जाते हैं कि इससे जुड़ना मुश्किल हो जाता है.

इसी मुश्किल को आसान करने के लिए लंदन के दो लोगों ने एक नई सोशल एंसेस्ट्री वेबसाइट विकसित की है. ये वेबसाइट दक्षिण एशियाई लोगों को अपने अतीत से जोड़ने की कोशिश है.

इस वेबसाइट की कर्ता-धर्ता साइमा मीर बताती हैं, "मेरी दादी को अल्जाइमर हो गया और वो जो कहानियाँ मुझे सुनाया करती थी, वो एकाएक बंद हो गई. जब मैंने अपने पारिवारिक इतिहास को जानने की कोशिश की, तो मुझे महसूस हुआ कि हमारे परिवार में जन्म, मृत्यु और विवाह का रिकॉर्ड ही नहीं रखा जाता."

इससे ही प्रेरणा लेकर इन लोगों ने ये वेबसाइट शुरू की. साइमा मीर के अलावा एलेक्स स्ट्रीट इस वेबसाइट से जुड़े हैं. उन्होंने इस वेबसाइट का तकनीकी पक्ष संभाला है और इसे तैयार किया है.

इस वेबसाइट का काम मुश्किल भरा है. क्योंकि ये दक्षिण एशियाई लोगों और दक्षिण एशियाई धरोहर से जुड़े लोगों की वंशावली का काम कर रही है.

विचार

इस वेबसाइट का नाम है हू'ज़ द दादी (who's the Daadi). इस वेबसाइट पर तस्वीरें होंगीं, नाम होंगे, महत्वपूर्ण तारीख़ें होंगी और स्थान होंगे.

इन आँकड़ों के आधार पर ये वेबसाइट वंश वृक्ष तैयार करेगी. साइमा मीर बताती हैं, "मैं अपने पिताजी की पुरानी तस्वीरें देख रही थी. वे अपने साफ-सुथरे सूट में कराची के अलग-अलग हिस्सों में नज़र आ रहे थे. मुझे महसूस हुआ कि मेरे कई मित्रों के पास भी ऐसी तस्वीरें होंगी. तभी मेरे मन में ये विचार आया कि क्यों ने इन सभी तस्वीरों को साथ लाया जाए."

एलेक्स स्ट्रीट बताते हैं, "हमने फेसबुक का अपना संस्करण बनाया है. लेकिन ये सोशल नेटवर्किंग की बजाए सामाजिक वंशावली के उद्देश्य से है."

इस वेबसाइट का लक्ष्य परिवारों और दोस्तों को जोड़ने का है, जो दुनियाभर में फैले हैं. ऐसा वर्ष 1947 में भारत के विभाजन जैसे कारणों और फिर कमाई के लिए विदेश जाने की वजह से है.

उद्देश्य

Image caption साइमा मीर के पिता रज़ा मीर की ये तस्वीर 1970 के दशक की है

साइमा मीर भी उन लाखों परिवारों में से हैं, जो मूल रूप से पाकिस्तान, भारत और बांग्लादेश से हैं और जो अब लंदन जैसे शहरों में बस गए हैं.

वो बताती हैं, "हमारी साइट का 50 प्रतिशत ट्रैफिक कराची और दिल्ली से आता है और बाक़ी का 50 प्रतिशत ब्रिटेन से. हमारा उद्देश्य यही है कि दक्षिण एशिया से संबंध रखने वाला हर कोई इस साइट का इस्तेमाल करे."

जब वेबसाइट पर ज़्यादा से ज़्यादा लोग आने लगेंगे और आँकड़े इकट्ठा होने लगेंगे, तो यूजर्स के अपना सरनेम, ख़ास शहर का नाम और पता डालने पर उन्हें कई रोचक जानकारियाँ हासिल हो सकेंगी और लोग एक-दूसरे से जुड़ सकेंगे.

साइमा मीर का कहना है कि विभाजन के कारण कई परिवारों को अलग होना पड़ा और प्रियजनों से दूर जाना पड़ा. उनका कहना है कि इस वेबसाइट का उद्देश्य ऐसे लोगों को भी जोड़ना है, जो एक ही इलाक़े या एक ही गाँव से आते हैं लेकिन वहाँ से निकल आने के कारण एक-दूसरे को जानते नहीं.

उन्होंने उम्मीद जताई कि ये 'दादी' इन कड़ियों को और मज़बूत बनाएगी.

संबंधित समाचार