जब कान में फुसफुसाए महिंदा राजपक्षे...

 सोमवार, 8 अक्तूबर, 2012 को 07:54 IST तक के समाचार
महिंदा राजपक्षे

राजपक्षे ने टी-20 क्रिकेट प्रतियोगिता कवर करने विदेशी पत्रकारों को भोज के लिए आमंत्रित किया.

बीस से भी ज़्यादा दिन हो गए श्रीलंका की धरती पर पहुंचे और शायद ही कोई ऐसा दिन हो जब किसी न किसी से राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे के बारे में चर्चा न हुई हो, या किसी नुक्कड़, चौराहे पर उनकी तस्वीर न दिखी हो.

जिज्ञासा इस कदर बढ़ चुकी थी कि रोज़ यही सोचता था की आखिर उनमें ऐसा क्या ख़ास है जो हर व्यक्ति के पास उनके बारे कोई ना कोई राय है.

मौके ने दस्तक दी और मैं पहुंच गया सीधे महिंदा राजपक्षे के सरकारी निवास 'टेंपल ट्रीस' पर उनसे रुबरू होने.

हुआ यूं कि श्रीलंकाई राष्ट्रपति ने करीब बीस ऐसे अंतरराष्ट्रीय पत्रकारों को खाने का न्योता भेजा था जो श्रीलंका में हो रहे टी- 20 क्रिकेट विश्वकप को कवर करने पहुंचे थे.

हमें एक बस द्वारा उनके घर के दरवाज़े तक पहुंचाया गया और उसके बाद भरपूर तलाशी ली गई. कैमरा तो दूर की बात है मोबाइल तक बाहर ही रखवा लिया गया.

अंदर पहुंचे तो एक बड़े लॉन में भोजन और खान-पान का आयोजन किया गया था.

मुलाकात

स्वागत सत्कार के लिए तीन खूबसूरत युवतियां श्रीलंका की पारंपरिक साड़ियों में थाल लिए खड़ी थीं. दुनिया की कुछ चुनिंदा वाइन भी मेहमानों को परोसी जा रही थी.

थोड़ी हैरानी भी हुई क्योंकि जो सुना और देखा था उसके मुताबिक मौजूदा श्रीलंका सरकार शराब की खरीद-फरोख्त़ को बहुत ज़्यादा प्रोत्साहन नहीं देती.

बहराल, करीब बीस मिनट बाद राष्ट्रपति राजपक्षे बाहर आए और सभी पत्रकारों से हंसते हुए मिले. सभी ने अपना परिचय दिया और उन्होंने सभी का हालचाल पूछा.

जब राजपक्षे मेरे पास से गुज़रे तो मैंने तपाक से कहा, ''मैं बीबीसी हिंदी सेवा में काम करता हूं और और दिल्ली से आया हूँ. ये सुनकर वे थोड़ा ठहर गए और धीरे से बोले, "कुछ दिन पहले भारत से लौटा हूँ और मुझे भारत बेहद पसंद है."

"जब राजपक्षे मेरे पास से गुज़रे तो मैंने तपाक से कहा, ''मैं बीबीसी हिंदी सेवा में काम करता हूं और और दिल्ली से आया हूँ. ये सुनकर वे थोड़ा ठहर गए और धीरे से बोले, "कुछ दिन पहले भारत से लौटा हूँ और मुझे भारत बेहद पसंद है."

नितिन श्रीवास्तव, बीबीसी संवाददाता

उन्होंने हाल ही में बीबीसी टेलीविज़न को दिए गए अपने साक्षात्कार के बारे में भी बताया और कहा, "उम्मीद है कि आपको श्रीलंका पसंद आया होगा."

मैंने उनसे कह तो दिया है कि पसंद आया है. लेकिन मन में अभी भी वो तमाम बातें दौड़ रही हैं जो यहां के लोगों से जानी-सुनी.

श्रीलंका के आम लोगों की राय यही है कि राजपक्षे सरकार ने विकास तो बहुत कराया है लेकिन ज़रा सख्ती से. उन्हें लगता है कि इस सरकार के आने के बाद से श्रीलंका में महंगाई इतनी बढ़ गई है कि मध्यम वर्ग के लोगों का गुज़ारा मुश्किल हो गया है.

आम नागरिकों को इस बात पर हैरानी है कि शहरी विकास मंत्रालय मौजूदा सरकार में रक्षा विभाग के हिस्सा क्यों बन गया है ?

उन्हें लगता है कि श्रीलंका भारत से दूर होता जा रहा है और चीन के नज़दीक.

मैंने पिछले बीस दिनों में यहां जितने भी अखब़ार देखे या पढ़े हैं, ऐसा शायद ही हुआ हो कि किसी दिन राजपक्षे परिवार के किसी सदस्य की तस्वीर पहले या दूसरे पन्ने पर ना छपी हो.

मन में इसी तरह के कई सवाल लिए मैं श्रीलंका से भारत लौटने की फ्लाइट का इंतज़ार कर रहा हूं.

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