चीन: बो शिलाई की बर्ख़ास्तगी रोकने की अपील

 सोमवार, 22 अक्तूबर, 2012 को 20:04 IST तक के समाचार
बो शिलाई (फ़ाइल फ़ोटो)

बो शिलाई को मार्च के बाद से नहीं देखा गया है.

चीन के वामपंथियों के एक समूह ने संयुक्त रूप से एक सार्वजनिक ख़त लिखकर चीनी संसद से अपील की है कि वे भ्रष्टाचार का आरोप झेल रहे चीनी नेता बो शिलाई को बर्ख़ास्त न करें.

चीन के 300 से ज़्यादा शिक्षाविद और कम्युनिस्ट पार्टी के पूर्व वरिष्ठ अधिकारियों ने ख़त पर दस्तख़त किए हैं और उसे वामपंथी चीनी वेबसाइट रेड चीन पर डाला गया है.

ख़त में कहा गया है कि बो शिलाई पर कार्रवाई का़नूनी रूप से कई प्रश्न उठाते हैं और ये राजनीति से प्रेरित है.

चीन के वामपंथियों की तादाद तो बहुत कम है लेकिन वे बहुत मुखर हैं और बो शिलाई की नीतियां उन्हें बहुत पसंद थीं.

संसद से अगर उनको बर्ख़ास्त कर दिया जाता है तो वो अभियोग न चलाए जाने के विशेषाधिकार से भी वंचित हो जाएंगे. और उनके ख़िलाफ़ मुक़दमा चलाया जा सकता है.

बो शिलाई की पत्नी गू काईलाई को इसी साल के शुरू में एक ब्रितानी उद्योपति नील हेवुड की हत्या का दोषी पाते हुए मौत की सज़ा सुनाई गई थी.

सवाल

"बो शिलाई को किस आधार पर पार्टी से बर्ख़ास्त किया गया है. कृपया उन तथ्यों और सबूतों की जांच करवाएँ और उन्हें सार्वजनिक करें ताकि बो शिलाई का़नूनी रूप से अपना बचाव कर सकें"

ख़त में उठाए गए सवाल

बो शिलाई के समर्थन में लिखे गए ख़त में पूछा गया है, ''बो शिलाई को किस आधार पर पार्टी से बर्ख़ास्त किया गया है. कृपया उन तथ्यों और सबूतों की जांच करवाएँ और उन्हें सार्वजनिक करें ताकि बो शिलाई का़नूनी रूप से अपना बचाव कर सकें.''

ख़त पर हस्ताक्षर करने वालों में नेशनल ब्यूरो ऑफ़ स्टैटिस्टिक्स के पूर्व निदेशक लि शेंगरूई, पेकिंग विश्वविद्यालय में क़ानून पढ़ाने वाले एक प्रोफ़ेसर, स्थानीय निकाए के सदस्य और कई सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हैं.

लेकिन बहुत सारे चीनी रेड चीन वेबसाइट को नहीं खोल सकते और इस ख़त के बारे में सरकारी मीडिया में भी कोई ख़बर नहीं है.

बीजिंग स्थित बीबीसी संवाददाता मार्टिन पेशन्स का कहना है कि इस ख़त से पता चलता है कि बो शिलाई के मुद्दे पर चीन के कम्युनिस्ट पार्टी में गंभीर मतभेद हैं.

इसी साल मार्च में स्कैंडल के उजागर होने के बाद ख़बर आई कि उनकी जांच हो रही है और उसके बाद से सार्वजनिक तौर पर उन्हें नहीं देखा गया है.

अप्रैल में उन्हें पार्टी के पद से हटा दिया गया और फिर सितंबर में पार्टी से निकाल दिया गया.

सरकारी मीडिया के अनुसार बो शिलाई पर भ्रष्टाचार, अपने सत्ता का दुरूपयोग और घूस लेने के आरोप हैं.

लेकिन बो शिलाई के समर्थकों का मानना है कि बो शिलाई के राजनीतिक विरोधियों ने उनके राजनीतिक करियर को समाप्त करने के लिए इस स्कैंडल का सहारा लिया है.

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