विदेश नीति पर क्या कहते हैं ओबामा और रोमनी

मंगलवार को टेलीविजन पर हुई तीसरे और अंतिम दौर की बहस मुख्य रूप से विदेश नीति पर केंद्रित थी. डेढ़ घंटे तक चली इस बहस में राष्ट्रपति पद के दोनों उम्मीदवारों ने पाकिस्तान, अफगानिस्तान, ईरान, सीरिया, मिस्र जैसे देशों पर दोनों नेताओं ने अपने-अपने तर्क रखे.

चीन

  • मिट रोमनी- चीन के बारे में मिट रोमनी का कहना था कि चीन एक बड़ी अर्थव्यवस्था है, और उसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. उन्होंने सवाल किया कि क्या हम चीन के सहयोगी नहीं हो सकते? हमें उसके साथ मिलकर काम करना चाहिए. उनका कहना था कि अमरीका को चीन के साथ व्यापारिक संबंधों को मजबूत बनाना चाहिए.
  • बराक ओबामा- ओबामा का कहना था कि चीन पर कड़े रुख को लेकर रोमनी मेरी आलोचना करते रहे हैं, लेकिन अब वो खुद उसे मुद्रा के साथ चालाकी करने वाला यानी करेंसी मैनिपुलेटर कह रहे हैं. ओबामा ने कहा कि चीन यदि नियमों के दायरे में रहता है तो वो हमारा सहयोगी हो सकता है.

ईरान

  • बराक ओबामा- ईरान के मामले पर ओबामा का कहना था कि जब उन्होंने सत्ता सँभाली उस वक्त दुनिया बंटी हुई थी. ईरान फिर से आक्रामक हो रहा था. बराक ओबामा ने साफ़ कहा कि जब तक वो अमरीका के राष्ट्रपति हैं ईरान को परमाणु हथियारों का विकास नहीं करने देंगे.
  • मिट रोमनी-लेकिन रोमनी का कहना था कि ईरान उसके बाद भी मजबूत हुआ है और हमें अगले चार साल में उसे परमाणु शक्ति संपन्न होने से रोकना होगा. उनका कहना था कि ईरान पर हमला अंतिम उपाय होगा लेकिन ईरान के परमाणु कार्यक्रम जारी रखने को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता. रोमनी ने परमाणु शक्ति संपन्न ईरान को दुनिया के लिए सबसे बड़ा खतरा बताया.

पाकिस्तान

Image caption अमरीका में छह नवंबर को राष्ट्रपति पद के चुनाव होने हैं
  • मिट रोमनी- पाकिस्तान में ड्रोन हमलों के बारे में रोमनी ने कहा कि वो ड्रोन हमलों का पूरी तरह से समर्थन करते हैं. लेकिन पाकिस्तान को अमरीकी सहयोग वहां के नागरिक समाज की मजबूती के लिए होना चाहिए. रोमनी का कहना था कि पाकिस्तान को उसके हाल पर नहीं छोड़ा जा सकता. पाकिस्तान का असफल देश बनना, अफगानिस्तान और अमरीका के लिए बड़ा खतरा होगा.
  • बराक ओबामा- पाकिस्तान को सहयोग करने के बारे में ओबामा का कहना था कि ओसामा बिन लादेन को पाने के लिए वास्तव में ज़मीन आसमान एक करने की ज़रूरत थी और ऐसा हमने किया भी.

मिस्र

  • मिट रोमनी- मध्य पूर्व के मामलों में रोमनी ने ओबामा पर खूब प्रहार किया. उन्होंने अरब देशों में होने वाली तमाम घटनाओं के लिए ओबामा को दोषी ठहराया. मिस्र के बारे में उन्होंने कहा कि होस्नी मुबारक को सत्ता से हटाने में मैंने ओबामा का सहयोग किया, लेकिन ब्रदरहुड के सत्ता में आने के लिए ओबामा को जिम्मेदार ठहराया. उनका कहना था कि ओबामा को इस घटना को रोकने की कोशिश करनी चाहिए थी.
  • बराक ओबामा- मिस्र में सत्ता परिवर्तन पर उन्होंने कहा कि अमरीका ने वही किया जो उसे करना चाहिए था. मिस्र और मध्य पूर्व के अन्य देशों के बारे में किए गए रोमनी के सवालों के जवाब में ओबामा ने कहा कि वो इस बात से ख़ुश हैं कि रोमनी अल-क़ायदा को एक ख़तरा मानते हैं क्योंकि वे पहले कह चुके हैं कि रूस अमरीका के लिए सबसे बड़ा ख़तरा है न कि अल-क़ायदा.

सीरिया

  • बराक ओबामा- सीरिया के मुद्दे पर ओबामा ने अपने पक्ष का बचाव किया और कहा कि उनका रुख सधा हुआ है और सही दिशा में है.
  • मिट रोमनी- लेकिन रोमनी का कहना था कि इस मामले में हमें और आगे जाना होगा. रोमनी का कहना था कि यदि वो राष्ट्रपति बनते हैं तो सीरियाई विद्रोहियों को हथियार देकर उनकी मदद करेंगे.

लीबिया

  • मिट रोमनी- रोमनी ने लीबिया के मामले में भी ओबामा की नीतियों को आड़े हाथों लिया. उनका कहना था कि उनकी गलत नीतियों की वजह से ही बेनगाजी में अमरीकी वाणिज्य दूतावास पर हमला हुआ.
  • बराक ओबामा- बेनगाजी में अमरीकी वाणिज्य दूतावास पर हुए हमले पर ओबामा ने अफ़सोस जताया और कहा कि इस घटना के बाद हमें लीबिया के बारे में फिर से सोचना होगा. ओबामा ने ज़ोर देकर कहा कि उनके नेतृत्व में ओसामा बिन लादेन को मारा गया और इराक़ में युद्ध समाप्त हुआ. उनका कहना था कि अल-कायदा अमरीका अथवा उसके सहयोगी देशों पर हमलों के बारे में सोच भी नहीं सकता.

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