अब भारत में मैनचेस्टर यूनाइटेड

  • 28 अक्तूबर 2012
मैनचेस्टर में भारतीय खिलाड़ी

भारत से ब्रिटेन गए प्रणव मैनचेस्टर यूनाइटेड के फुटबॉल खिलाड़ी बनना चाहते हैं. प्रणव नौ से सत्रह साल के दुनियाभर से चुने गए उन 29 खिलाड़ियों में शामिल हैं जिन्हें अपने-अपने देश में खेल के हुनर का लोहा मनवाने के बाद आखिरी प्रशिक्षण के लिए मैनचेस्टर बुलाया गया.

अपनी खुशी का इज़हार करते हुए प्रणव कहते हैं, "मुझे यहां सबकुछ बहुत अच्छा लग रहा है क्योंकि मैं यहां बेहतर जगलिंग सीख पा रहा हूं. मुझे लगता है कि मैं अच्छा खेल रहा हूं. ये मुश्किल है लेकिन फिर भी मुझे लगता है कि मैंने ठीक से किया है. मैंने यहां तेज़ ड्रिबलिंग और गेंद पर नियंत्रण करना सीख रहा हूं."

प्रशिक्षण

दुनियाभर से चुने गए खिलाड़ियों को मैनचेस्टर यूनाइटेड के मशहूर क्लिफ़ सेंटर में प्रशिक्षण दी जाती है.

यहां एक विशाल कृत्रिम मैदान है जिसमें खिलाड़ियों के पुतले और गोलपोस्ट बने हैं.

ये वो जगह है जहां दुनिया के मशहूर खिलाड़ी चार्लटन, बेखम और कैन्टोना ने खेल के हुनर सीखे थे. भारत से गए अमर भी उन्हीं के नक्शेक़दम पर चलना चाहते हैं.

वो कहते हैं, "मैंने गेंद उछाल कर पास दिया, छोटा पास दिया उसके बाद ड्रिबलिंग किया और गेंद पर नियंत्रण बनाने की कोशिश की. हालांकि आज मेरा खेल उतना अच्छा नहीं रहा. लेकिन ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि शायद मैं नर्वस था."

यहां ज़ोर इस बात पर रहता है कि बच्चे फुटबॉल का कुछ शानदार अनुभव हासिल कर सकें.

यहां मक़सद दूसरे रायन गिग्स या रूनी की तलाश करना नहीं होता है.

मुंबई

मुंबई में मैनचेस्टर यूनाइटेड के सॉकर स्कूल की स्थापना जनवरी महीने में कूपरेज में की गई थी. फीफ़ा के संरक्षण में चलाए जा रहे इस स्कूल में आठ से 18 साल के 1500 बच्चों ने अब तक ट्रेनिंग ली है.

मैनचेस्टर यूनाइटेड के कोच माइक बेनेट मुंबई में ही रहते हैं और मानते हैं कि यहां प्रशिक्षण पानेवाले बच्चों को फुटबॉल का एक बड़ा प्लैटफॉर्म मिलता है.

"मैनचेस्टर यूनाइटेड की सोच है खुद में यक़ीन करना, अपनी टीम और खुद के लिए कड़ी मेहनत करना.यहां बच्चे जमकर मेहनत कर रहे हैं और खेल के बारे में उनकी समझ भी बेहतर होती जा रही है लेकिन अभी कुछ और कोचिंग की ज़रूरत है."

आर्थिक पहलू

Image caption भारतीय बच्चों को मैनचेस्टर में अपने चहेते खिलाड़ियों को देखने का मौका मिलता है

मैनचेस्टर यूनाएटेड के सॉकर स्कूल व्यवसायिक उपक्रम भी हैं. जो लोग विदेशों से यहां आते हैं उन्हें हवाई जहाज़ का किराया खुद देना होता है और बाकी के खर्च में से भी कुछ का भुगतान उन्हें करना पड़ता है.

मैनचेस्टर यूनाइटेड की विदेशों में शाखाओं के प्रबंधन से जुड़े टोनी ब्रायन कहते हैं, "हम जानते हैं ये खिलाड़ी यहां मैनचेस्टर यूनाइटेड के रूनी, गिग्स जैसे खिलाड़ियों से मिल सकेंगे, उनका ऑटोग्राफ़ ले सकेंगे. टीम के मैनेजर अपने व्यस्त कार्यक्रम में से समय निकालकर इन बच्चों से बात करते हैं और ये जानने की कोशिश करते हैं कि वो किस देश से आए हैं, उनके साथ हंसी मज़ाक करते हैं और इसका अंदाज़ा आप इन बच्चों के खिले हुए चेहरे को देखकर लगा सकते हैं."

टोनी ब्रायन की ज़िम्मेदारी ये तय करने की है कि यूनाइटेड का अंतरराष्ट्रीय सॉकर स्कूल कहां स्थापित हो. भारत में कहीं और शाखा खोलने की योजना के बारे में उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र के पुणे और वासी इलाकों में प्रशिक्षण केंद्र पहले से ही चल रहे हैं. जब उन्हें ये लगेगा कि इन केंद्रों में वाकई अच्छा काम हो रहा है तब ही कहीं और केंद्र स्थापित करने के बारे में सोचेंगे.

भारत से जो बच्चे चुनकर ब्रिटेन गए उनमें से किसी ने कोई बड़ी प्रतियोगिता नहीं जीती लेकिन ये ज़रूर हुआ कि ओल्ड ट्रैफर्ड की जनता के सामने प्रीमियर लीग में अपना हुनर दिखाने का उन्हें मौक़ा मिल गया.

इस नए अनुभव से बेहद खुश प्रणय ने कहा कि अब उनकी प्राथमिकता खेल पर और ध्यान देने और आत्मविश्वास बढ़ाने की होगी.

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