बंदूक, पैसा और अफीम का मिश्रण

संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के मुताबिक बर्मा में अफीम की खेती को कम करने के उपायों के बावजूद लगातार छठे साल अफ़ीम की खेती बढ़ी है.

संयुक्त राष्ट्र के ड्रग्स और अपराध विभाग (यूएनओडीसी) के मुताबिक इस साल बर्मा में अफ़ीम की खेती में 17 फ़ीसदी की बढ़ोत्तरी दर्ज़ हुई है. पिछले साल देश भर में 40 हज़ार हेक्टेयर भूमि पर अफ़ीम की खेती हो रही थी, जो इस साल बढ़कर 51 हज़ार हेक्टेयर हो गई है.

बर्मा अफ़गानिस्तान के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा अफ़ीम उत्पादक देश है. देश के कुल अफ़ीम उत्पादन का ज़्यादातर हिस्सा शान और काचिन प्रांत में उपजता है. ये दोनों वैसे इलाके हैं जहां पिछले काफी समय से सेना और कट्टरपंथी समूह के बीच झड़प चल रही है.

बर्मा सरकार के आंकड़ों के मुताबिक रिपोर्ट यह भी बताती है कि इस साल देश भर में करीब 24 हज़ार हेक्टेयर अफ़ीम के खेतों को नष्ट किया गया जो बीते साल से चार गुना ज़्यादा है.

बंदूक, पैसा और ड्रग्स

यूएनओडीसी के दक्षिण पूर्व एशिया के प्रतिनिधि गैरी लुइस ने बताया, “बर्मा में ज़मीनी हालात बेहद खराब हैं. अफ़ीम की खेती वाले इलाकों में बंदूक, पैसा और ड्रग्स का ख़तरनाक मिश्रण देखने को मिल रहा है.”

सेना और विरोधी लड़ाके किसानों से रिश्वत लेकर इन्हें खेती करने की अनुमति देते हैं. दूसरी ओर किसानों का कहना है कि अस्थिरता के इस माहौल में उनके लिए अफ़ीम की खेती फ़ायदे का सौदा है. अफ़ीम से हेरोइन बनाई जाती है, जिसका ड्रग्स के तौर पर इस्तेमाल होता है.

दक्षिण पूर्व एशिया अफ़ीम सर्वे 2012 के मुताबिक दुनिया के कुल अफ़ीम उत्पादन का एक चौथाई हिस्सा बर्मा में उपजता है.

उधर लाओस में पिछले पांच साल ( 2007-2012) के दौरान अफ़ीम की खेती चार गुना बढ़कर 6300 हेक्टेयर तक पहुंच गई है.

मौजूदा स्थिति 1998 से 2006 के बीच के नतीज़ों के एकदम उलट है, तब बर्मा और लाओस में अफ़ीम की खेती में 83 फ़ीसदी की कमी हुई थी.

मांग

Image caption बर्मा की थिन सेन सरकार ने हालात में सुधार के लिए कई कदम उठाए हैं.

बर्मा की अधिकांश अफीम से हेरोइन बनायी जाती है. करीब आधा उत्पादन चीन के बाज़ार में जाता है, जबकि आधा दक्षिण पूर्व एशिया के बाज़ार में बेचा जाता है.

रिपोर्ट के मुताबिक एशिया में हेरोइन की लगातार बढ़ रही मांग के चलते अफ़ीम की खेती बढ़ी है.

बावजूद इसके बर्मा के लिए एक अच्छी ख़बर है. यूएनओडीसी प्रतिनिधि लुइस का कहना है कि समस्या का हल निकालने की कोशिशें तेज हुई हैं.

सुधार के लिए राष्ट्रपति थिन सीन की सरकार ने कई कदम उठाए हैं.

संघर्षविराम और राजनीतिक जागरुकता के चलते संयुक्त राष्ट्र जैसी एजेंसियों के लिए देश के अंदर पहुंच बनाना संभव हो पाया है.

पिछले कई दशकों से बर्मा, थाईलैंड और लाओस अफीम और ड्रग्स के लिहाज से दुनिया भर में गोल्डन त्रिकोण के रूप में कुख्यात रहे हैं.

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