क्या चीन का हश्र जापान जैसा होगा?

 बुधवार, 7 नवंबर, 2012 को 09:09 IST तक के समाचार
चीन जापान अर्थव्यवस्था

अस्सी के दशक के अंतिम वर्षों में जापानी अर्थव्यवस्था की दुनिया भर में ज़बर्दस्त धाक थी.

डॉलर के मुकाबले जापान में उत्पादन कई गुना बढ़ गया था और ऐसा लगता था कि उन्नत तकनीक के मामले में जापान ने अमरीका को पछाड़ दिया है.

कुछ पर्यवेक्षकों ने तो यहां तक कहना शुरू कर दिया था कि ये महज कुछ दशकों की बात है जब जापान दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था और तीसरा सुपरपॉवर बन जाएगा.

लेकिन ऐसा कुछ हुआ नहीं. इसके बजाय 1990 में जापान के स्टॉक मार्केट और प्रॉपर्टी मार्केट दोनों धराशायी हो गए. दो दशक के बाद भी अर्थव्यवस्था में कोई बदलाव नहीं हुआ है.

हाल के दिनों में चीन की अर्थव्यवस्था में आए अप्रत्याशित उछाल ने जापान के उन दिनों की यादों को ताजा कर दिया है.

और कई जानकार तो इसकी तुलना सीधे तौर पर जापानी अर्थव्यवस्था से करने लगे हैं और ये भविष्यवाणी कर रहे हैं कि अब ये पतन की ओर बढ़ रही है. लेकिन इन दावों में कितनी सच्चाई है?

इस तुलनात्मक अध्ययन से क्या पता लगता है?

1990 का जापान

2012 का चीन

आबादी

12.5 करोड़

1 अरब 34 करोड़

अर्थव्यवस्था का आकार

3.1 अरब डॉलर या अमरीकी जीडीपी का 54 फीसदी 7.3 खरब डॉलर या अमरीकी जीडीपी का 48 फीसदी

औसत वृद्धि दर

पिछले 35 सालों में 6.5 फीसदी पिछले 35 सालों में 9.9 फीसदी

अर्थव्यवस्था


अस्सी के दशक में जापान ने तब तक का सबसे छोटा टीवी सेट तैयार किया.

1998 में टाइम पत्रिका ने एक लेख छापा था जिसका शीर्षक था-“जापान, सबसे धनी से सबसे शक्तिशाली देश की ओर.”

पत्रिका ने जापान का उल्लेख अमरीका के लिए सबसे बड़ी एशियाई चुनौती के तौर पर किया था.

चीन ने दुनिया का सबसे बड़ा सौर ऊर्जा तंत्र तैयार किया है.

अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष ने भविष्यवाणी की है कि साल 2016 तक चीन दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाला देश बन जाएगा.

संपत्ति

अचल संपत्तियों की कीमतों में आई अचानक गिरावट ने जापान की अर्थव्यवस्था को खासा नुकसान पहुँचाया. खासकर उन लोगों के लिए ये विनाशकारी साबित हुआ जिन्होंने प्रॉपर्टी की कीमतों में उछाल के समय कर्ज लेकर संपत्ति खरीदी थी.

2003 से 2011 के बीच चीन में प्रॉपर्टी की कीमतों में तीन गुनी उछाल आई है. शंघाई जैसे शहरों में तो ये उछाल चार गुना तक दर्ज की गई है.

निर्माण कार्य में चीन में काफी तेजी दर्ज की जा रही है. लेकिन 2011 के बाद से इन कीमतों में काफी स्थिरता देखने को मिल रही है.

आधारभूत ढाँचा

1988 में दुनिया की सबसे लंबी सुरंग, 54 किमी. और करीब चार किमी. लंबा सबसे लंबा सस्पेंशन ब्रिज बनाया गया. पहली बार 1959 में बुलेट ट्रेन बनाई.

दुनिया के तीन सबसे लंबे समुद्री पुल और दस में से छह सबसे लंबे कंटेनर बंदरगाह बनाने का रिकॉर्ड. 2008 से 2011 के बीच 10 हजार किमी लंबी हाई स्पीड रेल ट्रैक का निर्माण किया.

निर्यात

अस्सी के दशक में निर्यात के क्षेत्र में जापान की सफलता ने कई पश्चिमी देशों को हैरत में डाल दिया था.

चीन में बनी चीजों का केवल 34 फीसदी ही चीन में इस्तेमाल हो रहा है, बाकी निर्यात हो रहा है.

वैश्विक अर्थव्यवस्था

नब्बे के दशक में दुनिया भर की अर्थव्यवस्था में तेजी का दौर था, जाहिर है जापानी निर्यातकों को भी इसका लाभ मिला. लेकिन उसके बाद स्थितियां बदल गईं और कर्ज को वसूलने के कारण इसका अर्थव्यवस्था पर बुरा प्रभाव पड़ा.

चीन के लिए वैश्विक अर्थव्यवस्था का माहौल बहुत अच्छा नहीं है. उसके निर्यात के प्रमुख बाजार, जैसे- अमरीका, यूरोप और जापान में राजनीतिक तौर पर इसके खिलाफ माहौल है.

वृद्धि क्षमता

अमरीकी लोगों की तुलना में जापानी नागरिकों की आर्थिक क्षमता 83 फीसदी थी.

चीन अभी भी एक बहुत ही गरीब देश है. चीनी लोगों की आर्थिक क्षमता अमरीकियों की तुलना में महज 17 फीसदी ही है.

जनसंख्या

रिटायर्ड लोगों के काम में बने रहने का जापान को काफी फायदा हुआ. कुल जनसंख्या में ऐसे लोग 12 से 23 फीसदी थे जिन्होंने अर्थव्यवस्था को आगे बढा़ने में काफी योगदान दिया.

चीन में एक बच्चा नीति की वजह से उसकी जनसंख्या भी उस स्तर पर पहुंच रही है जहां नब्बे के दशक में जापान की थी.

सरकार

जापान में लोकतंत्र है. लेकिन द्वितीय विश्व युद्ध के बाद ज्यादातर एक ही पार्टी ने शासन किया है. लेकिन हाल के दिनों में दो-पार्टी सिस्टम के लिए देश में अच्छा खासा माहौल बन रहा है.

चीन में सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी किसी विपक्ष या अपनी आलोचना को बर्दाश्त नहीं करती.

बचत

जापान के लोग उतनी बचत नहीं करते जितनी बचत चीन के लोग करते हैं.

चीन के लोग अपनी आमदनी का 25 प्रतिशत बचा लेते हैं.

क़र्ज़

देश की अर्थव्यवस्था की गति बरकरार रखने के लिए जापान को अपने सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी का 230 प्रतिशत तक कर्ज लेना पड़ा.

चीन की अर्थव्यवस्था में भी कर्ज की बड़ी भूमिका है लेकिन पता नहीं चल पाता कि उसने कितना कर्ज लिया है.

बूढ़ी आबादी

बूढ़े हो चुके कर्मचारी अपने भविष्य के लिए बचत करते हैं जिससे देश की अर्थव्यवस्था में बड़ा योगदान मिलता है. देश की आबादी में ऐसे लोगों की संख्या 23 प्रतिशत है.

एक बच्चे की नीति की बदौलत चीन की आबादी का बड़ा हिस्सा कामकाजी है. चीन की मौजूदा आबादी की संरचना वैसी ही है जैसी 1990 में जापान की थी.

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