भारत सहित दुनिया भर से बधाइयाँ

बराक ओबामा की जीत का जश्न
Image caption अमरीकी चुनाव पर दुनिया भर की नज़रें लगी हुई थीं

बराक ओबामा के दूसरी बार राष्ट्रपति चुने जाने का भारत सहित पूरी दुनिया ने स्वागत किया है.

भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अमरीका के राष्ट्रपति बराक ओबामा के दोबारा राष्ट्रपति चुने जाने पर बधाई दी है.

वहीं उद्योग समूह फिक्की ने कहा है कि ओबामा का दूसरी बार राष्ट्रपति चुना जाना भारत और अमरीका के बीच सामरिक और आर्थिक सहयोग के लिए अच्छा है.

स्वागत

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री डेविड कैमरन ने बराक ओबामा को बधाई देते हुए कहा कि वे अपने दोस्त की जीत पर बेहद खुश हैं.

Image caption बराक ओबामा के कार्यकाल में भारत के रिश्ते मज़बूत हुए हैं

यूरोपीय संघ के अध्यक्ष हरमन वैन रैम्पॉय ने कहा है कि वे ओबामा के दोबारा राष्ट्रपति चुने जाने से बेहद ख़ुश हैं.

इसराइल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने बराक ओबामा को बधाई दी है. उन्होंने कहा, इसराइल और अमरीका के बीच रणनीतिक साझेदारी पहले से भी ज़्यादा मज़बूत है. इसराइल के हितों के लिए मैं राष्ट्रपति ओबामा के साथ काम करता रहूँगा.

भारत में फिक्की के अध्यक्ष आरवी कनोरिया ने कहा कि ओबामा को मिला दूसरा कार्यकाल भारत-अमरीका की सामरिक और आर्थिक साझेदारी के लिए अच्छा है. ये साझेदारी को बनाने में ओबामा प्रशासन ने खासी मेहनत की है.

कनोरिया का कहना है कि उच्च शिक्षा, रक्षा मामलों, कृषि और परमाणु सहयोग में राष्ट्रपति ओबामा की दूरदर्शिता को फिक्की सलाम करती है.

रूस के राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन ने भी बराक ओबामा की दूसरी जीत का स्वागत किया है.

पुतिन ने ओबामा की दूसरी जीत को 'बेहद सकारात्मक' बताया है. उधर रूसी प्रधानमंत्री दमित्री मदवेदेव ने ओबामा को विश्वसनीय और समझदार सहयोगी करार दिया है.

मदवेदेव ने कहा, "मैं खुश हूं कि सबसे शक्तिशाली देश के प्रमुख वो नहीं हैं जो रूस को अपना सबसे बड़ा दुश्मन मानते हों."

रूसी विदेश मंत्री सेरगे लेवरॉ ने कहा है कि हम लोग आने वाले दिनों में सहयोग के लिए तैयार हैं और दूसरा पक्ष जितना खुला संबंध रखना चाहे हम उसके लिए तैयार हैं.

चीन और ईरान का सवाल

चीन और ईरान ये दो देश हैं जिनसे अमरीका के रिश्ते सहज नहीं रहे हैं. बराक ओबामा की दूसरी जीत पर ये सवाल अहम है कि इन दोनों देशों की क्या प्रतिक्रिया होगी.

बीजिंग में बीबीसी संवाददाता मार्टिन पेशेंस का कहना है कि अमरीका में राष्ट्रपति ओबामा की जीत चीन में नेतृत्व बदलाव से एक दिन पहले हुई है.

चीन में नेताओं का ध्यान घरेलू स्थिति पर ही है. वैसे चीन और अमरीका के बीच रिश्ते पिछले कुछ सालों में तनावपूर्ण रहे हैं. ओबामा के दोबारा चुने जाने के बाद व्हाइट हाउस में कोई बदलाव नहीं आएगा. लेकिन चीन में बदलाव होगा. इसका मतलब है कि अमरीका को नए चीनी नेताओं को समझना परखना पड़ेगा.

वहीं ईरान के बारे में तेहरान से बीबीसी संवाददाता मोहसिन असगरी का कहना है, "बहुत से लोगों को ईरान में चिंता थी कि अगर रिपब्लिकन पार्टी का उम्मीदवार जीतता है तो इसका मतलब यु्द्ध हो सकता है. जबकि ओबामा की जीत का मतलब है कि लोगों की ज़िंदगी सुरक्षित है क्योंकि अमरीका समेत अन्य देश ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर जल्द से जल्द बातचीत शुरु करना चाहेंगे."

उनका कहना है कि ईरान में डेमोक्रेटिक पार्टी के प्रति सकारात्मक रुख रखने वाले मानते हैं कि बराक ओबामा ईरान से रिश्ते बेहतर करने में ज़्यादा समर्थ हैं.

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