क्या हकीकत बनेंगे स्पाइडर मैन?

 गुरुवार, 8 नवंबर, 2012 को 17:17 IST तक के समाचार

सरपट दौड़ती छिपकलियां और रेंगने वाले जीव शीशों, दीवारों और छतों पर कैसे चिपकते हैं इसके बारे में वैज्ञानिकों को लंबे समय तक कोई जानकारी नहीं थी.

लेकिन ताज़ा अध्ययनों ने प्रकृति के इस राज़ की कुंजी दी है. छिपकली के पैरों पर कई लाख की संख्या में मौजूद बाल उसके पैरों को टायर जैसी पकड़ देते हैं. हर बाल के छोर आगे से कई हिस्सों में बंटे होते हैं जिससे छिपकली की ये और भी मज़बूत हो जाती है.

इस बेहतरीन पकड़ को ढीला करने के लिए छिपकली अपने पैरों को अलग अलग कोणों पर मोड़ती और सतह को छोड़ देती है.

ओरेगॉन के लुइस एंड क्लार्क कॉलेज से जुड़े प्रोफेसर कैलर ऑटम को अमरीकी सेना की ओर से दीवार पर चलने वाले रोबोट बनाने की ज़िम्मेदारी सौंपी गई और इस परियोजना के तहत वैज्ञानिकों ने यह पता लगाने की कोशिश की कि छिपकली के पैरों में ऐसा क्या खास है कि वो दीवार पर सहजता से दौड़ती है.

'प्रकृति सबसे बड़ी प्रयोगशाला'

प्रोफेसर कैलर के मुताबिक, ''हम जिस चीज़ की बात कर रहे हैं उसमें गोंद से अलग तरह की चिपचिपाहट है कि लेकिन ये बेहद मज़बूत है. इस पकड़ की खासियत है इसका नियंत्रण और मनचाहे वक्त पर इससे ढीला करने की काबिलियत.''

वैज्ञानिकों का मानना है कि इस सिद्धांत पर अमल हो जाए तो वो दिन दूर नहीं जब स्पाइडर मैन की तरह एक ऐसा सूट तैयार किया जा सकेगा जिसकी मदद से दीवारों पर चढ़ना और इमारतों से छलांग लगाना मुमकिन होगा.

कई संस्थान इस तरह के रोबोट बनाने की तैयारी कर रहे हैं जो दीवारों पर चढ़ सकें और छिपकली पर हुए इस अध्ययन की मदद से ये सपना हकीकत बन सकता है.

प्रोफेसर केलर के मुताबिक, ''हम प्रकृति को एक एक बेहद बड़ी प्रयोगशाला मान सकते हैं जिसके पास हर तरह चीज़ का तोड़ मौजूद है. छिपकलियों के पैर में मौजूद चिपचिपाहट और उनकी पकड़ जिस तरह काम करती है वो अपने आप में अनूठा है. मेरा दावा है कि हम किसी भी कीमत पर इस तरह की चीज़ का आविष्कार नहीं कर सकते थे.''

वैज्ञानिकों के मुताबिक इस सिद्धांत को समझना अपने आप में एक बड़ी कामयाबी है जिससे नई तरह की खोज जन्म लेंगी.

इसे भी पढ़ें

BBC © 2014 बाहरी वेबसाइटों की विषय सामग्री के लिए बीबीसी ज़िम्मेदार नहीं है.

यदि आप अपने वेब ब्राउज़र को अपडेट करते हुए इसे स्टाइल शीट (सीएसएस) के अनुरूप कर लें तो आप इस पेज को ठीक तरह से देख सकेंगे. अपने मौजूदा ब्राउज़र की मदद से यदि आप इस पेज की सामग्री देख भी पा रहे हैं तो भी इस पेज को पूरा नहीं देख सकेंगे. कृपया अपने वेब ब्राउज़र को अपडेट करने या फिर संभव हो तो इसे स्टाइल शीट (सीएसएस) के अनुरुप बनाने पर विचार करें.