मुस्लिम ब्रदरहुड का प्रदर्शन वापस,

 मंगलवार, 27 नवंबर, 2012 को 04:58 IST तक के समाचार
विरोध प्रदर्शन

मुर्सी के विवादास्पद फैसले के विरोध में प्रदर्शनों का सिलसिला जारी है.

मिस्र के मुख्य इस्लामिक दल ने काहिरा में मंगलवार को प्रस्तावित प्रदर्शन वापस ले लिया है.

राष्ट्रपति मोहम्मद मुर्सी की ताकत को बढ़ाए जाने वाले आदेश के समर्थन में ये प्रदर्शन होने थे लेकिन मुस्लिम ब्रदरहुड ने कहा है कि वो प्रदर्शन नहीं करेंगे ताकि संघर्ष से बचा जा सके.

राष्ट्रपति मुर्सी और ब्रदरहुड के विरोधियों का कहना है कि वो लोग अपना प्रदर्शन करेंगे जो राष्ट्रपति मुर्सी के उस आदेश के ख़िलाफ़ होगा जिसके तहत राष्ट्रपति को महत्वपूर्ण अधिकार मिले हैं.

राष्ट्रपति मुर्सी ने इस संकट को खत्म करने के लिए वरिष्ठ न्यायाधीशों से भी मुलाक़ात की है.

सुप्रीम ज्यूडिशियल काउंसिल के साथ पांच घंटे की मुलाकात के बाद राष्ट्रपति मुर्सी के प्रवक्ता ने कहा है कि राष्ट्रपति न्यायिक प्राधिकरण और न्यायधीशों की स्वतंत्रता का सम्मान करते हैं.

प्रवक्ता यासर अली ने कहा है कि राष्ट्रपति इस आदेश को वापस नहीं लेंगे लेकिन उन्होंने जजों को आश्वासन दिया है कि यह आदेश अस्थायी है और इसका अधिकार क्षेत्र संप्रभुता के मामलों तक सीमित है जो कई संस्थानों की सुरक्षा के लिए है.

अभी तक जजों की तरफ से कोई बयान नहीं आया है. काहिरा में बीबीसी संवाददाता जॉन लेन का कहना है कि यह एक फॉर्मूला है जिस पर संभवत जज राज़ी हो सकते हैं.

राष्ट्रपति की तरफ से ये बयान ऐसे समय में आया है जब मुस्लिम ब्रदरहुड ने मंगलवार को राष्ट्रपति के समर्थन में किए जाने वाले अपने प्रदर्शनों को वापस लेने की बात कही है.

ब्रदरहुड के अनुसार वो ये फैसला कर रहे हैं ताकि लोगों को दिक्कत न हो और तनाव न फैले.

ब्रदरहुड ने काहिरा यूनिवर्सिटी के बाहर मुर्सी के समर्थन में दस लाख लोगों के मार्च का आह्वान किया था.

नोबल शांति पुरस्कार विजेता मोहम्मद अल बारादेई समेत विपक्ष के कई नेताओं ने कहा है कि वो राष्ट्रपति के साथ तब तक बातचीत नहीं करेंगे जब तक वो संवैधानिक घोषणा के नाम से जाने जाने वाले अपने विवादास्पद फैसले को वापस नहीं ले लेते.

यह फैसला पिछले हफ्ते लिया गया था जिसके बाद से ही इसके विरोध में प्रदर्शन हो रहे हैं. इस फैसले के तहत कोई भी क़ानून राष्ट्रपति के फैसलों को पलट नहीं सकता है.

इस फैसले के तहत जज भी नया संविधान बनाने के लिए बनी संविधान सभा के सदस्यों को बर्खास्त नहीं कर सकेंगे. इसके तहत राष्ट्रपति को अधिकार मिले हैं कि वो क्रांति को बचाने के लिए और राष्ट्र की रक्षा के लिए कोई भी फैसला कर सकते हैं.

इससे पहले रविवार को नील के डेल्टा वाले शहर दमनहोर में राष्ट्रपति के समर्थक और विरोधियों के बीच हुई झड़प में एक किशोर बालक फाति मसूद की मौत हो गई थी और 60 लोग घायल हो गए थे.

सोमवार को फाति मसूद का जनाज़ा निकाला गया जबकि काहिरा में हज़ारों लोग तहरीर चौराहे पर भी जमा हुए.

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