ब्रिटेन कर सकता है फलस्तीन का समर्थन

ब्रितानी विदेश मंत्री विलियम हेग ने संकेत दिए हैं कि ब्रिटेन संयुक्त राष्ट्र में फलस्तीन का दर्जा बढ़ाए जाने के प्रस्ताव का विरोध नहीं करेगा.

इस मामले पर गुरूवार को संयुक्त राष्ट्र में मतदान होना है. फ़लस्तीन को फिलहाल संयुक्त राष्ट्र में स्थायी पर्यवेज्ञक का दर्जा हासिल है और अब फलस्तीनी नेता पर्यवेक्षक राष्ट्र का दर्जा चाहते हैं.

अगर मतदान में ये प्रस्ताव पारित हो जाता है तो इसके साथ ही फलस्तीन अंतरराष्ट्रीय पटल पर मुल्क के तौर पर मान्यता हासिल करने का एक और पड़ाव तय कर लेगा.

संयुक्त राष्ट्र में आने वाले प्रस्ताव को भारत समेत फ्रांस, रूस, चीन और दक्षिण अफ्रीका जैसे कई देशों का समर्थन हासिल है. वहीं इसराइल, अमरीका, जर्मनी और नीदरलैंड्स प्रस्ताव का विरोध कर रहे हैं.

आश्वासनों की मांग

ब्रितानी संसद में बोलते हुए विदेश मंत्री विलियम हेग ने संकेत दिए कि ब्रिटेन प्रस्ताव का विरोध नहीं करेगा लेकिन उन्होंने कहा कि फलस्तीन को कुछ आश्वासन देने होंगे.

उन्होंने कहा, "पहली शर्त है कि फलस्तीनी प्राधिकरण को इस बात की प्रतिबद्धता दिखानी होगी कि वो बातचीत में शामिल होगा. ये इस आरोप का जवाब देने के लिए जरूरी है कि प्रस्ताव लाकर फलस्तीनी बातचीत की प्रक्रिया से अलग होना चाहते हैं. दूसरी शर्त होगी कि फलस्तीन संयुक्त राष्ट्र के दूसरे अंगों की सदस्यता भी हासिल करे - अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय जैसी संस्थाएं."

ब्रिटेन में फलस्तीन के राजदूत ने कहा है कि फलस्तीनी राष्ट्रपति महमूद अब्बास ने इन शर्तों को नामंजूर कर दिया है.

राजदूत का कहना था कि हालांकि ब्रिटेन इसराइल-फलस्तीन मामले में दो राष्ट्रों का समर्थक है लेकिन संयुक्त राष्ट्र में वोट देने की प्रक्रिया से बाहर रहकर वो अमरीका के रूख़ का भी सीधे-सीधे विरोध नहीं करना चाहता है.

फलस्तीनी मुक्ति संगठन का कहना है कि विश्व के 130 मुल्कों से अधिक की सरकारें फलस्तीन को एक संप्रभु देश का दर्जा देते हैं.

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