फल-फूल रहा है सीरिया में अपहरण का उद्योग

सीरिया में इन दिनों सरकार और चरमपंथियों के बीच संघर्ष की स्थिति है. इस संघर्ष के दौरान सीरिया की राजधानी दमिश्क में फिरौती के लिए अपहरण के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं. बीबीसी संवाददाता लीना सिनजाब ने इस समस्या को अपनी आंखों से देखा.

ग्यारह साल के अहमद जब अपने स्कूली दोस्त के साथ जिम गए तो उन्होंने सोचा नहीं था किस मुसीबत में फंसने वाले हैं. ये वाकया अप्रैल का है, जब दमिश्क और आसपास के इलाकों में शांति थी. शहर के अपमार्केट वाले हिस्से के जिम से वे दोनों जब बाहर निकले तो वापस घर लाने के लिए उनके परिवार का ड्राइवर वहां मौजूद था. लेकिन अहमद अपने घर चार दिन के बाद ही लौट पाए.

ड्राइवर सहित दोनों स्कूली बच्चों का अपहरण कर लिया गया और अगवा करने वालों ने फिरौती के लिए करीब 10 करोड़ रुपए मांगे. अहमद के पिता नाबिल इस घटना के बारे में सबकुछ बताते हैं लेकिन नाम बदलने का अनुरोध करते हैं ताकि यह कहानी फैले नहीं.

उनके अनुरोध का ख्याल रखते हुए हमने अपनी कहानी में परिवार के सदस्यों के नाम बदल दिए हैं. लेकिन इस परिवार के साथ हुए हादसे की कहानी राजधानी के हर परिवार को मालूम है.

अपहरण और फिरौती

नाबिल ने बताया, ''आधे घंटे के बाद ही मुझे मालूम हो गया था कि उनका अपहरण हो चुका है. पहले मैंने सोचा कि ये हमारे ड्राइवर की बदमाशी है. लेकिन जल्दी ही मुझे पता चल गया कि उनका अपहरण हो चुका है.''

नाबिल को फिरौती के लिए अपहरणकर्ताओं ने कई फोन किए. नाबिल ने बताया, ''अपहरणकर्ताओं ने खुद को सीरियाई मुक्ति सेना का सदस्य बताया. वे एक तरफ़ मेरे बेटे की हत्या करने की धमकी दे रहे थे, तो दूसरी तरफ उन्होंने मेरी बात अहमद से कराई.''

नाबिल ने अपहरणकर्ताओं की हर बात मानी. लेकिन फिरौती की रकम बहुत ज़्यादा थी, जिसका भुगतान वे किसी सूरत में नहीं कर सकते थे.

ऐसे में अपरहणकर्ताओं ने फिरौती की रकम आधी कर दी. इसके बाद नाबिल ने पांच करोड़ रुपए की फिरौती देकर अपने बेटे को छुड़ाया.

Image caption सेना और चरमपंथियों के बीच संघर्ष भी जारी

नाबिल को अपहरणकर्ताओं ने पैसे लेकर दमिश्क के एक दूर दराज इलाके में बुलाया और एक पार्क में पैसा छोड़ कर जाने को कहा. जब नाबिल अपने घर पहुंचे तो फिर उनके पास फोन आया कि आप उसी पार्क में आकर अपने बेटे को ले जाइए.

मुत्ति सेना

नाबिल को उसी पार्क में अपना बेटा मिल गया. लेकिन इसके बाद उनके पास सीरियाई मुक्ति सेना की ओर से फिर से फोन आने लगे, ये बताने के लिए ये काम मुक्ति सेना का नहीं है, बल्कि अपराधी समूह मुक्ति सेना के नाम पर ये अपराध कर रहे हैं.

दरअसल सीरिया में इन दिनों लोगों के गायब होने के मामले लगातार बढ़ रहे हैं. मानवाधिकार समूहों ने आरोप लगाया है कि देश भर में अस्सी हज़ार से ज्यादा लोग लापता हैं. इनके परिवार वालों को इन लोगों के बारे में कोई जानकारी नहीं मिल पा रही है.

कइयों को तो ये भी आशंका है कि सरकार ने उनके परिवार के सदस्य को हिरासत में रखा हुआ है.

हालांकि अहमद की कहानी एकदम अलग है. देश के अंदर धनी परिवार के लोगों के अपहरण के मामले भी बढ़ रहे हैं. दमिश्क से महज 10 मिनट के दूरी पर डुम्मार है जहां अपहरण की वारदातों में काफ़ी इज़ाफा हुआ है. ये इलाका बारमूडा ट्रांयगल के नाम से मशहूर है.

आरोप

यहां एक स्थानीय नागरिक ने बताया, ''यहां लोगों का अपहरण आम बात है, कभी कभी तो 200 डॉलर या दस हज़ार रुपए के लिए भी लोगों का अपहरण कर लिया जाता है.''

कई मामलों में तो सरकारी सेना पर भी फिरौती की रकम के लिए अपहरण के आरोप लगे हैं. डुम्मार की एक स्थानीय महिला ने बताया, ''मेरे पति कार सहित लापता हो गए. मेरे पड़ोसियों ने देखा कि मेरी कार सरकारी सैनिकों के कैंप की ओर जा रही थी.''

शहर के कारोबारी के साथ ऐसा ही हादसा सरकारी नाके से महज 30 फ़ीट की दूरी पर हुआ. प्रत्यक्षदर्शियों ने समझा कि पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया है जबकि बाद में उनके परिवार वालों से करीब पच्चीस करोड़ रुपए की फिरौती मांगी गई.

सरकार और चरमपंथियों के बीच संघर्ष की स्थिति में सीरिया में अपहरण एक उद्योग की शक्ल लेता जा रहा है. इसकी कीमत सीरियाई जनता को चुकानी पड़ रही है.

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