चीन के नए नेतृत्व से मिलेंगे शिवशंकर मेनन

Image caption भारत और चीन के बीच सीमा के मुद्दे पर कई दौर की बातचीत हो चुकी है.

चीन में नेतृत्व परिवर्तन के बाद पहली बार भारत और चीन के बीच द्विपक्षीय संबंधों पर चर्चा के लिए भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार शिवशंकर मेनन चीन पहुंचे हैं.

मेनन अपनी तीन दिवसीय यात्रा में उन नेताओं से भी मिलेंगे जिन्हें पिछले महीने चीन की सत्तारुढ़ कम्युनिस्ट पार्टी ने चुना है.

इसी में राष्ट्रपति हू जिंताओ के उत्तराधिकारी का भी चयन हुआ है.

मेनन की यात्रा के बारे में चीन में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है.

चीन के शीर्ष कूटनीतिज्ञ दाय बिंगुओ के साथ बातचीत के अलावा मेनन उप प्रधानमंत्री लि केकियांग से भी मिलेंगे जो इस समय पार्टी की स्थायी समिति में नंबर दो हैं.

पार्टी की स्थायी समिति के प्रमुख महासचिव ज़ी जिपिंग हैं.

लि आने वाले समय में चीन के प्रधानमंत्री होंगे जब प्रधानमंत्री जियाबओ मार्च में पद छोड़ेंगे.

मेनन चीन के शीर्ष नेतृत्व में जाना पहचाना चेहरा हैं क्योंकि मेनन पूर्व में चीन में भारत के राजदूत रह चुके हैं.

दाय बिंगुओ के साथ सोमवार को उनकी मुलाका़त होगी.

ये दोनों अधिकारी दोनों देशों की तरफ से सीमा से जुड़े मुद्दों को सुलझाने के लिए विशेष रुप से नियुक्त किए गए हैं. दोनों नेताओं के बीच 15 दौर की वार्ता हो चुकी है.

सूत्रों के अनुसार दोनों नेता पिछली वार्ताओं में हुई प्रगति और द्विपक्षीय संबंधों पर बातचीत करेंगे.

मेनन और दाय की इस दौर की वार्ता को आधिकारिक रुप से 16वें दौर की वार्ता नहीं कहा गया है क्योंकि दाय रिटायर हो रहे हैं.

दाय की जगह अगले कुछ दिनों में नए अधिकारी की नियुक्ति होने वाली है.

चीनी अधिकारियों के साथ बातचीत के अलावा मेनन प्रोफेसर पी सी बागची की किताबों के चीनी अनुवादों का विमोचन भी करेंगे.

पीसी बागची भारत में चीनी संस्कृति के बड़े विद्वान माने जाते हैं.

मेनन की यात्रा पर टिप्पणी करते हुए चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि मेनन की यात्रा को चीन बहुत महत्व देता है.

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