मालदीव एयरपोर्ट विवाद: जीएमआर की हुई जीत

Image caption जीएमआर को 50 करोड़ डॉलर का ये करार 2010 में हासिल हुआ था.

सिंगापुर उच्च न्यायालय ने माले एयरपोर्ट के आधुनिकीकरण का काम कर रही भारतीय कंपनी जीएमआर के 50 करोड़ डॉलर के करार को रद्द करने के मालदीव सरकार के फैसले को पलट दिया है.

इस फैसले का मतलब ये है कि जीएमआर अब माले के इब्राहिम नसीर अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट के विकास का काम मूल करार के मुताबिक जारी रख सकेगी.

जीएमआर और मलेशिया एयरपोर्ट ने संयुक्त रूप से ये करार 2010 में हासिल किया था जिसके तहत इन कंपनियों को अगले 25 वर्षों तक माले एयरपोर्ट का संचालन करना था.

करार निलंबित

पिछले हफ्ते ही मालदीव के अधिकारियों ने इस करार को अचानक निलंबित कर दिया.

जीएमआर के प्रतिनिधि अरुण भगत ने बीबीसी को बताया, "ये अदालत का आखिरी फैसला है और इसका मतलब ये है कि जीएमआर अब माले एयरपोर्ट के संचालन का काम कर सकेगी."

पिछले हफ्ते मालदीव की सरकार ने कहा था कि पिछले हफ्ते ब्रिटेन और सिंगापुर के कुछ अनाम वकीलों ने उसे जीएमआर के साथ करार निलंबित करने का सुझाव दिया था जिसे पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद के कार्यकाल में हस्ताक्षरित किया गया था.

इस पर भारत ने कहा था कि मालदीव सरकार का ये फैसला विदेशी निवेशकों को बहुत नकारात्मक संकेत देगा.

इस करार में जीएमआर का हिस्सा 77 फीसदी है जबकि बाकी का 23 फीसदी हिस्सा मलेशिया एयरपोर्ट के पास है.

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