इसराइली ज़हर से बचाए गए थे मेशाल

ख़ालिद मेशाल
Image caption हमास नेता ख़ालिद मेशाल जैसे ही ग़ज़ा पहुँचे उन्होंने धरती को चूम लिया

फ़लस्तीनी गुट हमास के निर्वासित नेता ख़ालिद मेशाल ने ग़ज़ा पट्टी की यात्रा शुरू कर दी है. ये पिछले चालीस साल में फ़लस्तीनी इलाक़े की उनकी पहली यात्रा है.

उनकी यात्रा दरअसल हमास की स्थापना की 25वीं वर्षगाँठ के मौक़े पर हो रही है और हमास का ही ग़ज़ा पर नियंत्रण है.

ख़ालिद मेशाल ने जब 1967 में इसराइल के युद्ध के बाद पश्चिमी तट छोड़ा था तो वह सिर्फ़ 11 साल के थे. उनका परिवार पहले निर्वासन में कुवैत गया.

जब इस बार ख़ालिद मेशाल वापस ग़ज़ा पहुँचे तो उन्होंने सबसे पहले धरती को चूमा. इससे ये संदेश साफ़ गया था कि उनके लिए इसका गहरा निजी और सांकेतिक महत्त्व है.

ये काफ़ी अहम समय पर भी हुआ है. हमास को लगता है कि वह पिछले कई वर्षों में अब अपनी सबसे मज़बूत स्थिति में है.

उथल-पुथल का असर

उसने पिछले दिनों इसराइल के साथ हुए आठ दिनों के संघर्ष के बाद संघर्ष विराम के सौदे को अपनी बड़ी जीत के तौर पर भी दिखाया है.

इससे निश्चित ही उस क्षेत्र में हमास को मज़बूती मिली है. वैसे हमास ख़ुद भी अरब देशों में हुए विद्रोह के बाद सत्ता में बदलावों और अपने साझीदारों को देखते हुए बदलाव के दौर में है.

ख़ुद मेशाल के लिए इस उथल-पुथल का असर ये हुआ कि उन्हें लंबे समय से सीरिया की राजधानी दमिश्क में रहे अपने ठिकाने से निकलना पड़ा.

इससे वह कमज़ोर पड़ सकते थे क्योंकि बशर अल असद का शासन उनके बड़े समर्थकों में से रहा है. मगर उन्होंने मिस्र और क़तर में अपने लिए नए और प्रभावशाली साझीदार खोज लिए हैं.

हत्या की कोशिश

इतना ही नहीं नाटकीय घटनाक्रम तब हुआ था जब निर्वासन के दौरान जॉर्डन में इसराइली एजेंटों ने उन्हें ज़हर दे दिया था और उसके बाद ख़ुद शाह हुसैन ने हस्तक्षेप करते हुए उस ज़हर का तोड़ मुहैया करवाया था.

इसराइल ने जब 2004 में हमास के संस्थापक शेख़ यासीन की हत्या कर दी तो उसके बाद ख़ालिद मेशाल हमास में सबसे प्रभावशाली भूमिका में आए थे.

वैसे ग़ज़ा में हमास के नेतृत्त्व और निर्वासन में उनके नेतृत्त्व के बीच कई मतभेद भी रहे. पिछले दिनों इनका फ़ोकस पश्चिमी तट में फ़तह आंदोलन के नेता और फ़लस्तीनी राष्ट्रपति महमूद अब्बास के साथ मेल-मिलाप पर रहा.

मेशाल चाहते हैं कि ये मेल-मिलाप हो जाए मगर ग़ज़ा के हमास नेता इसके पक्ष में नहीं हैं.

अभी कुछ ही दिनों पहले उन्होंने एक नए माहौल की बात की है जहाँ मेल-मिलाप की बात हो सकेगी और माना जा रहा है कि ग़ज़ा की उनकी ये यात्रा उस दिशा में एक और क़दम होगी.

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