क्या है लेनोवो की 'कूल पॉलिसी'?

 शनिवार, 8 दिसंबर, 2012 को 11:28 IST तक के समाचार

नंबर वन कंपनी को अब छवि बनाने की चिंता.

कंप्यूटर बनाने वाली कंपनी लेनोवो अब दुनिया की नंबर एक कंपनी बन गई है.

लेकिन इसके बावजूद कंपनी को ये पता है कि लेनोवो को चीन और चीन के बाहर के बाज़ारों में ‘कूल ब्रांड’ के तौर पर नहीं देखा जाता.

कंपनी जानती है कि ये उसकी सबसे बड़ी कमी भी है. लिहाज़ा आने वाले समय में कंपनी ये छवि बदल कर ख़ुद को 'कूल ब्रांड' के तौर पर पेश करना चाहती हैं.

वैसे, लेनोवो वो कंपनी है जिसने बाज़ार में लंबे समय से अपना झंडा गाड़ने वाली एचपी को पहले स्थान से हटा दिया है.

लेकिन लेनेवो को अब भी बाज़ार में बने रहने की जद्दोजहद जारी रखनी होगी.

लेनोवो के वरिष्ठ अधिकारी मानते हैं कि इस ब्रांड को एक अच्छे, भरोसेमंद और आदर्श बाज़ार बनाना बाकी है.

'कूल ब्रांड पॉलिसी'

कंपनी के अधिकारी आर्थर वेई कहते हैं, “मेरा उद्देश्य है कि लेनोवो की गिनती एक दिन दुनिया के 100 सबसे विश्वसनीय ब्रांड में हो”

"मेरा उद्देश्य है कि लिनोवो की गिनती एक दिन दुनिया के 100 सबसे विश्वसनीय ब्रैंड में हो"

आर्थर वेई, लिनोवो के वरिष्ठ अधिकारी

आर्थर वही शख्स हैं जो खुद लेनोवो में एचपी से आए हैं और आते ही इन्होंने इस ब्रांड को रूस के बाजार में नंबर वन बना दिया.

इससे खुश होकर कंपनी ने आर्थर को बीजिंग के लेनोवो हेडक्वार्टर में बड़ी जिम्मेदारी सौंपी.

यांग युआनक्विंग लेनोवो के दूसरे बड़े अधिकारी हैं जो एप्पल के डिजाइन गुरू जोनाथन लीव के बराबर की हैसियत रखते हैं.

यांग इन दिनों कंपनी के प्रति उपभोक्ताओं की धारणा बदलने में जुटे हैं.

यांग साल 1990 में इस कंपनी में आए और वर्ष 2008 में इन्होंने बीजिंग ओलंपिक टॉर्च को डिजाइन किया.

योगा 13

आजकल यांग हर नए उत्पाद की ‘लुक और फील’ टीम की अगुवाई कर रहे हैं.

यांग योगा थिंकटैंक बनाने में जुटे हैं जिसमें एक साथ लैपटॉप, टैबलेट फ्री स्टैंडिंग और टचस्क्रीन की सुविधा उपलब्ध होगी.

उनका कहना है कि ये लोगों के दिल को छू जाएगा.

यांग का मानना है, "ये उस विचार को पूरी तरह से बदल देगा कि कंप्यूटर एक मृत वस्तु है इसमें भावनाएं नहीं होती."

'प्रोटेक्ट एंड अटैक' नीति

योगा-13, जो सिर्फ पीसी नहीं है बल्कि इसमें एक साथ कई सुविधआएं मौजूद होंगी.

लिनोवा चीन के साथ-साथ दूसरे देशों के स्मार्टफोन और टैबलेट बाज़ारों में जगह बनाना चाहता है.

कंपनी ने इसके लिए एक बेस लाइन तैयार की है, “प्रोटेक्ट एंड अटैक”

'प्रोटेक्ट' यानी चीन के बाज़ार में आगे बने रहना और 'अटैकिंग' यानी दूसरे देशों में कंपनी के प्रोडक्ट को फैलाना.

आर्थर कहते हैं इस नीति ने ही उन्हें रूस के बाज़ार में नंबर वन बनने का अवसर दिया है.

वो कहते हैं, इसके अलावा हमें भारत, जर्मनी और जापान जैसे देशों में भी इसी नीति की वजह से अपना बाज़ार बनाने में मदद मिली है. और ये ना सिर्फ नए बाजारों में घुसने का तरीका है बल्कि स्थापित बाजारों में भी जमे रहने का फॉर्मूला है.

हालांकि, इन तमाम सफलताओं के बावजूद इस कंपनी को अभी काफी कुछ करने की दरकार है.

बाज़ार में सैमसंग और एप्पल के उत्पाद जैसे गैलेक्सी और नोटपैड युवा आईटी पेशेवरों को ज्यादा लुभा रहे हैं.

चीन के बाज़ारों में भी सैमसंग के उत्पाद लोगों को पसंद आते हैं क्योंकि वो तुलनात्क रूप से सस्ते दामों पर उपलब्ध होते हैं.

अभी भी यहां के कॉफी दुकानों में बैठे लोगों के हाथों में सैमसंग, नोकिया और एप्पल के आईपैड से लेकर स्मार्टफोन मिल जाते हैं.

लिनोवा के लिए ये एक बड़ी चुनौती हो सकती है.

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