ख़लील चिश्ती पाकिस्तान जाने को आज़ाद

Image caption ख़लील चिश्ती अब पाकिस्तान जा सकते हैं.

भारत के उच्चतम न्यायालय ने 82 वर्षीय पाकिस्तानी वैज्ञानिक डॉक्टर ख़लील चिश्ती को हत्या के मामले में रिहा कर दिया है.

अदालत ने अधिकारियों को आदेश दिए हैं कि डॉक्टर ख़लील चिश्ती के सभी कागज़ात लौटा दिए जाएं जिसमें उनका पासपोर्ट भी शामिल है.

डॉक्टर चिश्ती अब बिना किसी रोकथाम के पाकिस्तान लौट सकेंगे.

मामले की सुनवाई में सर्वोच्च अदालत ने डॉक्टर ख़लील चिश्ती को जानबूझकर हानि पहुंचाने के मामले में दोषी पाया लेकिन वो सज़ा का वक्त पहले ही जेल में गुज़ार चुके हैं.

ख़लील चिश्ती पर 1992 में अजमेर में रहते हुए एक हत्या में शामिल होने का आरोप था और अजमेर की अदालत ने 2011 में उन्हें उम्र कैद की सज़ा सुनाई थी.

अभियोजन पक्ष के मुताबिक डॉक्टर चिश्ती 1992 में अजमेर आए थे जहाँ उनके छोटे भाई जमील चिश्ती का परिवार रहता था. लेकिन हत्या विवाद में फंस गए और उन पर हत्याकाण्ड में शामिल होने का आरोप लगाया गया.

इसकी वजह से चिश्ती बीस साल तक कराची अपने घर नहीं जा सके. इस दौरान उनके परिजनों को जब भी इजाजत मिली वो उनसे मिलने भारत आते रहे.

हालांकि, चिश्ती अजमेर में ही पैदा हुए थे और बंटवारे के वक्त कराची जा बसे थे.

चिश्ती की रिहाई के लिए भारत के कई मानवाधिकार संगठनों ने भी मुहिम चलाई और साथ ही राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राज्यपाल से इस बाबत सिफ़ारिश भी की. हालांकि तत्कालीन राज्यपाल शिवराज पाटिल ने इस सिफारिश को नकार दिया.

डॉक्टर चिश्ती अजमेर में ही पैदा हुए और बंटवारे के समय कराची जा बसे. चिश्ती की रिहाई की लिए भारत के कई मानवाधिकार संगठनों ने मुहीम चलाई

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