जापान में विपक्षी एलडीपी को 'भारी जीत'

 सोमवार, 17 दिसंबर, 2012 को 01:50 IST तक के समाचार
शिंजो एबे

शिंजो एबे ने चीन के प्रति रुख किया कड़ा

जापान में विपक्षी एलडीपी पार्टी ने आम चुनावों में जोरदार जीत दर्ज की है और पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो एबे एक बार फिर सत्ता में वापसी करने को तैयार हैं.

चुनावों में भारी जीत ने एबे को अपनी राष्ट्रवादी नीतियों को बढ़ावा देना का मौका दिया है.

उन्होंने कहा कि जापान की थमी हुई अर्थव्यवस्था का पुनर्निर्माण उनकी खास प्राथमिकताओं में शामिल होगा.

हालांकि आधिकारिक परिणाम सोमवार को आएंगे लेकिन प्रधानमंत्री योशिहीको नोदा ने अपनी हार मान ली है और डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ जापान (डीजेपी) के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया है. डीजेपी तीन साल तक सत्ता में रही.

दो तिहाई बहुमत

जापानी मीडिया की खबरों में कहा गया है कि कुल 480 सीटों में से डीजेपी ने 55 से 77 के बीच सीटें जीती हैं जबकि एलडीपी ने 300 सीटों पर जीत हासिल की है.

"हम चीन और जापान के बीच रिश्तों को खराब नहीं करना चाहते हैं. दोनों पक्षों को ये बात माननी होगी कि अच्छे रिश्ते दोनों ही देशों के राष्ट्रीय हित में हैं."

शिंजो एबे, एलडीपी पार्टी के नेता

एलडीपी की गठबंधन सहयोगी न्यू कॉमेइतो पार्टी को 30 सीटों पर विजय मिल सकती है. इस तरह एलडीपी के नेतृत्व वाले गठबंधन को संसद में दो तिहाई बहुमत हासिल होगा.

आम चुनावों में जीत पक्की होते ही शिंजो एबे ने पूर्वी चीन सागर में कुछ द्वीपों को लेकर चीन के साथ चल रहे विवाद अपना रुख कड़ा कर लिया, लेकिन उन्होंने ये भी कहा है कि वो चीन के साथ संबंधों को खराब नहीं करना चाहते हैं.

हाल के समय में जापान प्रशासित इन द्वीपों को लेकर चीन के साथ विवाद एक संकट का रूप ले चुका है. चीन भी इन द्वीपों को अपना बताया है. इन द्वीपों पर इंसानी आबादी नहीं रहती है लेकिन रणनीतिक रूप से इन्हें खासा अहम माना जाता है.

दूसरी तरफ चीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ ने अपनी एक समीक्षा में कहा है कि 'जापान की आक्रामता' से इस क्षेत्र को नुकसान हो सकता है.

रिश्तों का इम्तिहान

द्वीपों पर विवाद

द्वीपों पर छिड़े विवाद के कारण जापान और चीन के रिश्ते तनाव का शिकार हैं

एक टीवी इंटरव्यू में एबे ने चीन की सरकार से कहा कि वो जापान के साथ 'रिश्ते सुधारने के लिए और कदम उठाए'.

जापान में सेंकाकू और चीन में तियाओयू के नाम से जाने जाने वाले ये द्वीप एबे के अनुसार मूल रूप से जापान के रहे हैं और उनकी पार्टी का लक्ष्य इस बारे में 'चीन की तरफ से पैदा होने वाली चुनौती को रोकना है'.

उन्होंने कहा, “हम चीन और जापान के बीच रिश्तों को खराब नहीं करना चाहते हैं. दोनों पक्षों को ये बात माननी होगी कि अच्छे रिश्ते दोनों ही देशों के राष्ट्रीय हित में हैं.”

वहीं शिन्हुआ के विश्लेषण में कहा गया है कि आर्थिक रूप से कमजोर और राजनीतिक रूप से नाराज जापान न सिर्फ अपने देश को नुकसान पहुंचाएगा बल्कि इससे इस क्षेत्र और व्यापक तौर पर दुनिया को नुकसान होगा.

शिन्हुआ ने जापान से आग्रह किया है कि वो विदेश नीति के मुद्दे पर 'तार्किक रुख' अपनाए और 'युद्धोन्मादी' विचारों को बढ़ावा न दे.

एबे ने कहा कि वो भारत और ऑस्ट्रेलिया समेत एशियाई देशों के साथ रिश्ते और मजबूत करना चाहते हैं ताकि जापान की पिछड़ती अर्थव्यवस्था में नई जान फूंकी जा सके.

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