क्यों 'काली और जाली' है भारतीय अर्थव्यवस्था?

Image caption भारतीय अर्थव्यवस्था को काले धन के चलते हर साल अरबो का नुकसान

भारतीय अर्थव्यवस्था तो इस साल अवैध वित्तीय लेन देन के चलते करीब 1.6 अरब डॉलर (क़रीब 85 अरब रुपए) का नुकसान उठाना पड़ा है.

इतना ही नहीं बीते एक दशक के दौरान भारतीय अर्थव्यवस्था को 123 अरब डॉलर (करीब 6,642 अरब रुपए) का नुकसान हुआ है.

यह रकम कितनी बड़ी है इसका अंदाज़ा इससे लगाया जा सकता है कि बीते एक दशक के दौरान भारत में शिक्षा, स्वास्थ्य और आधारभूत ढांचे के निर्माण पर इससे कम खर्च हुआ है.

ये आकलन वाशिंगटन स्थित शोध संस्थान ग्लोबल फाइनेंसियल इंटेग्रिटी (जीएफआई) का है. संस्था ने काली और जाली अर्थव्यवस्था पर अध्ययन कर ये रिपोर्ट जारी की है. रिपोर्ट के मुताबिक इस दशक में काली अर्थव्यवस्था के चलते नुकसान के मामले में भारत आठवें नंबर पर हैं.

जीएफआई के निदेशक रेमंड बाकर ने कहा, “भारत में अवैध लेन देने के लिहाज से पिछले कुछ सालों में स्थिति सुधरी है लेकिन अब भी अर्थव्यवस्था को काफी नुकसान उठाना पड़ रहा है.”

बाकर के मुताबिक भारत के नीति निर्माताओं को इस नुकसान को कम करने के लिए अविलंब कदम उठाना चाहिए. बाकर ने कहा, “भारत में काले धन की बरामदगी के मसले को मीडिया में काफी जगह मिल रही है.”

जीएफआई के प्रमुख अर्थशास्त्री और रिपोर्ट के सह लेखक देव कार कहते हैं, “नुकसान के लिहाज से भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए 123 अरब डॉलर (6,642 अरब रुपए) बहुत बड़ी रकम है.”

देव कार कहते हैं, “यह भारतीय नागरिकों के लिए बड़ी चिंता की बात है क्योंकि शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और देश में आधारभूत ढांचे के निर्माण पर कुल मिलाकर 100 अरब डॉलर (करीब 5400 अरब रुपए) खर्च हुआ है यानी काले धन के चलते होने वाला नुकसान इससे कहीं ज़्यादा है.”

जीएफआई की ये रिपोर्ट ये भी बताती है कि भारत के कुल सकल घरेलू उत्पाद की 50 फ़ीसदी जितनी रकम काली अर्थव्यवस्था की भेंट चढ़ जाती है. रिपोर्ट के मुताबिक 1948 से लेकर 2008 के बीच साठ साल के दौरान भारतीय अर्थव्यवस्था को करीब 462 अरब डॉलर (करीब 24,948 अरब रुपए) का नुकसान हुआ है.

चीन को सबसे ज़्यादा नुकसान

वैसे सूची में चीन अव्वल स्थान पर है. 2001 से 2010 के दौरान अवैध वित्तीय लेनदेन के चलते चीन को 2740 बिलियन डॉलर( 1,47,960 अरब रुपए) का नुकसान हुआ है. इसके बाद मैक्सिको, मलेशिया, सऊदी अरब, रूस, फिलीपींस और नाइजीरिया को भी अरबों डॉलर का नुकसान उठाना पड़ा है.

“विकासशील देशों में अवैध वित्तीय लेनदेन- 2001 से 2010” के नाम से जारी इस रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया के सभी विकासशील देशों की अर्थव्यवस्था को 2010 में 858.8 अरब डॉलर (करीब 46,375 अरब रुपए) का नुकसान हुआ है.

यह बीते एक दशक में नुकसान के हिसाब से दूसरा सबसे ख़राब साल साबित हुआ है. इससे पहले 2008 के दौरान विकासशील देशों की अर्थव्यवस्था को 871.3 अरब डॉलर( करीब 47,050 अरब रुपए) का नुकसान सहना पड़ा था.

रिपोर्ट के मुताबिक 2001 से 2010 के दौरान दुनिया भर के विकासशील देशों को काले धन के चलते 5860 अरब डॉलर (3,16,440 अरब रुपए) का नुकसान हुआ है.

ग्लोबल फाइनेंसियल इंटेग्रिटी ने दुनिया भर के नेताओं से अपील की है कि वे काले धन के लेन देन पर अंकुश लगाने के लिए अपने अपने देशों में पारदर्शी व्यवस्था को बढ़ावा दें.

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