एकल गायक की होती है जल्दी मौत !

Image caption एमी वाइनहाउस जिनकी मौत 27 साल की उम्र में हो गई.

सफलता का स्वाद चखने वाले एकल गायक(अकेले गाने वाले कलाकार), बैंड गायकों (समूह गायन) की तुलना में जल्दी मौत के शिकार हो जाते हैं.

बीएमजे पत्रिका ने अपनी रिपोर्ट में इस बात पर टिप्पणी की है.

पत्रिका के मुताबिक़ एकल सफल कलाकार की मौत बैंड कलाकारों की तुलना में जल्दी हो जाती है क्योंकि बैंड कलाकार सबके बीच रहते हैं और एकल कलाकार बेहद अकेले.

यूरोप और उत्तरी अमरीका के चौदह सौ रॉक स्टार और पॉप स्टार के करियर पर किए गए अध्ययन के बाद ये जानकारी सामने आई है.

ये वे कलाकार थे जो 1956 से लेकर 2006 तक चर्चित और नामचीन कलाकारों की श्रेणी में आते थे.

अध्ययन

प्रत्येक दस में से जिस एक कलाकार की मौत को इस अध्ययन में दर्शाया गया वो सफल और चर्चित एकल कलाकार थे.

जबकि उत्तरी अमरीका में प्रत्येक पांच में से एक एकल कलाकार जल्दी मौत को प्यारे हो जाते हैं.

फ़रवरी 2012 में जब इस पत्रिका ने अपना अध्ययन पूरा कर लिया और परिणाम देखने की बारी आई तो पता चला कि तक़रीबन 137 ऐसे सफल कलाकार कम उम्र में अपनी जान गंवा चुके थे.

हैरानी होगी कि इसी फ़ेहरिस्त में माइकल जैक्सन का भी नाम है.

माइकल के अलावा एल्विस, जिमी हेंड्रिक्स, रैपर टू पैक, एमी वाइनहाउस और व्हिटनी हॉस्टन का नाम शामिल है.

इन कलाकारों की मौत की औसत आयु 39 वर्ष आंकी गई है.

अकेलापन

एक बहुत अहम बात अध्ययन कर्ताओं ने इस अध्ययन में जो पाया वो ये कि सफल एकल कलाकारों के बारे में कहीं लिखा जाता है तो उसमें उनके करियर और सफलता की बातें अंतरराष्ट्रीय सर्वेक्षण आदि पर आधारित होते हैं.

जबकि, व्यक्तिगत जीवन या बचपन की जानकारी के लिए वेबसाइट्स आदि जगहों से जानकारी जुटा ली जाती है. फिर चाहे ये उनकी आत्मकथा ही क्यों ना हो.

‘सेलिब्रेटी बिहेवियर’ यानी नामचीन हस्तियों के व्यवहार का अध्ययन करने वाली मनोवैज्ञानिक हनी लैंगकास्टर जेम्स का कहती हैं, “एकल कलाकार अक्सर अकेलेपन के शिकार होते हैं, उनके ईर्द गिर्द सिर्फ़ वो लोग होते हैं जो पेशेवर होते हैं, वो चाहे उनके मैनेजर हों या पीआर गुरू.”

“ये लोग ज़्यादातर लंबे-लंबे दौरे पर भी रहते हैं और इस दौरान इनके साथ इनका परिवार, मित्र साथ नहीं होता और ये सब इन्हें अकेला और उपेक्षित और अलग-थलग बनाता है.”

दिक्कतों से भरा बचपन

Image caption क्या माइकल भी थे तनहा और अकेले.

किसी कलाकार ने कितनी उम्र और कितनी ख्याति पाई इस बात से उनकी निजी ज़िंदग़ी उतनी प्रभावित नहीं हो पाती जितना कि उसका जिया गया बचपन और उसकी समाजिक पृष्ठभूमि और परिस्थितियां होती है.

अध्ययन में बताया गया कि गोरों की तुलना में काले लोगों में जल्दी मौत की आशंका अधिक थी.

यहां तक कि जिन कलाकारों की मौत की वजहें नशा या इस तरह की वजहें रहीं उन कलाकारों के बचपन पर नज़र डाला जाए तो उनका बचपन कहीं ना कहीं दिक़्क़तों भरा मालूम पड़ता है.

अध्ययन के प्रणेता ने सलाह के तौर पर कहा है कि जिन बच्चों का जीवन काफ़ी उपेक्षित होता है उनके लिए संगीत भरा करियर काफ़ी लुभावना होता है.

लेकिन साथ ही ख़तरनाक भी क्योंकि संगीत के साथ उनके जीवन में दौलत और ‘स्टारडम’ भी आता है जो अव्यवहारिक होने की तरफ़ धकेलता है.

अध्ययनकर्ता का ये भी कहना है कि आजकल के बच्चों में पॉप स्टार और रॉकस्टार बनने की ललक बढ़ रही है.

ये इन्हें रोल मॉडल मानते हैं लेकिन इन्हें इनकी दिक़्क़तों को भी देखने की भी ज़रूरत है.

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