साइबर हमले की चपेट में ईरान

 बुधवार, 26 दिसंबर, 2012 को 16:41 IST तक के समाचार

ईरान ने वायरस को नियंत्रित कर लेने का दावा किया है.

ईरान पर एक बार फिर साइबर हमले का कहर बरपा है. इस बार निशाना बिजली संयत्रों और दूसरे उद्योगों को निशाना बनाया गया.

दक्षिण ईरान के होमोजगन प्रांत में ‘स्टक्सनेट’ नाम के वायरस का हमला हुआ है. हालांकि ईरान का दावा है कि इसे नियंत्रित कर लिया गया है.

ईरान की मीडिया रिपोर्ट ने स्पष्ट किया है कि वायरस को फैलने पर रोक लगा पाने में वहां के तकनीकि विशेषज्ञ पूरी तरह सफल हुए हैं.

ईरान पर परमाणु हथियार बनाने का आरोप लगता रहा है और इस हमले को इसी संदर्भ में देखा जा रहा है.

पश्चिमी देश ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर लगातार अंकुश लगाने की बात करते रहे हैं.

बिजली संयंत्र पर नज़र

ईरान की अर्ध- सरकारी एजेंसी ‘इज्ना’ ने ईरान के प्रांतीय सुरक्षा प्रमुख अली अक़बर अखावन के हवाले से बताया है कि हाल में ईरान पर साइबर हमला तेज हुआ है.

अली अक़बर ने कहा है-“ईरान के उद्योगों को साइबर हमले का लगातार निशाना बनाया जा रहा है.”

उन्होंने बताया कि बिजली मुहैया कराने वाली कंपनी बांदर अब्बास पर हमला हुआ लेकिन इससे पहले कि ये साइबर हमला और क्षति पहुंचा पाता इस पर काबू पा लिया गया.

"ईरान के उद्योगों को साइबर हमले का लगातार निशाना बनाया जा रहा है"

अली अक़बर अखावन, प्रांतीय सुरक्षा प्रमुख

ईरान लगातार इस बात का दावा करता रहा है कि उनके यहां हो रहे साइबर हमले को नियंत्रित कर पाने में सफल हुए हैं लेकिन ‘फ्लेम’ के बाद ‘स्टक्सनेट वार्म’ वायरस का ईरान में ये दूसरा हमला है.

इस वायरस से यहां के उद्योगों को काफी नुकसान भी पहुंचाया है.

अप्रैल महीने में ईरान के तेल मंत्रालय और राष्ट्रीय तेल कंपनी पर हुए हमले की वजह से ईरान सरकार को प्रमुख तेल सुविधाओं को रोकना पड़ा.

ईरान पर परमाणु हथियार बनाने का आरोप लगता रहा है.

इनमें खार्ग द्वीप तेल टर्मिनल भी शामिल था जो तेहरान के अधिकतम निर्यात को नियंत्रित करता है.

इससे पहले ईरान ने कहा था कि उनके हां कुछ कंप्यूटरों में ‘ड्क्व स्पाईवेयर’ नाम का संक्रमण आ गया है.

ईरान ने इस संग्रह के जरिए उस डेटा को चुराने का आरोप लगाया था जिससे अगले साइबर हमले को अंजाम दिया जा सके.

इन हमलों में ईरान के उर्जा निर्यात को भी प्रभावित किया गया है. खासतौर से ईरान के विवादास्पद यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम को जिसके बारे में पश्चिमी देशों ने हमेशा आपत्ति जताई है.

लेकिन माना जा रहा है कि ईरान पर हुए अब तक के तमाम साइबर हमलों में ‘स्टक्सनेट वार्म’ सबसे बड़ा और खतरनाक साइबर हमला है.

वर्ष 2010 में ईरान ने पश्चिमी देशों पर आरोप लगाया था कि पश्चिम ‘स्टक्सनेट वार्म’ वायरस के जरिए उनके न्यूक्लियर सेवा को प्रभावित करना चाहता है.

विशेषज्ञों का मानना है कि जून 2009 से अप्रैल 2010 के बीच पांच औद्योगिक संसाधन संगठनों पर कई बार वायरस से हमला हुआ है.

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